राम की कहानी – श्लोक 16

संस्कृत श्लोक

वास्तुकर्म निवेशं च भरतागमनं तथा । प्रसादनं च रामस्य पितुश्च सलिलक्रियाम् ॥

हिंदी अनुवाद

चित्रकूट में कुटी बनाना और निवास, भरत का आगमन, राम का प्रसादन (मनाना), तथा पिता (दशरथ) का जल-तर्पण।

अर्थ / व्याख्या

यह श्लोक चित्रकूट में राम के निवास, भरत के वहाँ आने, राम को मनाने के प्रयास, और दशरथ के निधन पर जलांजलि देने का वर्णन करता है।

टिप्पणी

राम ने चित्रकूट में एक कुटी बनाई। भरत माता-पिता की आज्ञा से राम को वापस लेने आए, लेकिन राम ने वनवास पूरा करने का निश्चय किया। भरत ने राम की पादुकाएँ लेकर राज्य संभाला। पिता दशरथ के निधन पर राम ने जलांजलि दी।

॥ श्री रामायण – बालकाण्ड – सर्ग ३ – श्लोक १६ ॥

वास्तुकर्म निवेशं च भरतागमनं तथा ।
प्रसादनं च रामस्य पितुश्च सलिलक्रियाम् ॥
vāstukarma niveśaṃ ca bharatāgamanaṃ tathā |
prasādanaṃ ca rāmasya pituśca salilakriyām ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : चित्रकूट में कुटी बनाना और निवास, भरत का आगमन, राम का प्रसादन (मनाना), तथा पिता (दशरथ) का जल-तर्पण।

🔹 English Translation : Constructing a hut and dwelling in Chitrakuta, the arrival of Bharata, the pacification of Rama, and the offering of water to the father (Dasharatha).

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृत पदव्याकरणहिन्दी अर्थEnglish Meaning
वास्तुकर्मनपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनकुटी बनाने का कार्यconstruction of a hut
निवेशम्पुल्लिंग, द्वितीया एकवचननिवास, ठहरनाdwelling, staying
चअव्ययऔरand
भरतागमनम्नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनभरत का आगमनarrival of Bharata
तथाअव्ययइसी प्रकारalso, similarly
प्रसादनम्नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनप्रसन्न करना, मनानाpacification, pleasing
चअव्ययऔरand
रामस्यपुल्लिंग, षष्ठी एकवचनराम काof Rama
पितुःपुल्लिंग, षष्ठी एकवचनपिता (दशरथ) काof the father (Dasharatha)
चअव्ययऔरand
सलिलक्रियाम्स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचनजल-क्रिया, तर्पणoffering of water (funeral rite)

📜 श्लोक का अर्थ एवं महत्व

चित्रकूट में राम ने लक्ष्मण के साथ मिलकर एक सुंदर कुटी बनाई (वास्तुकर्म) और वहाँ निवास किया (निवेशम्)। इसी बीच भरत अयोध्या से चित्रकूट पहुँचे (भरतागमनम्) और राम को वापस चलने का आग्रह किया। राम ने उन्हें धर्म और कर्तव्य का पाठ पढ़ाया और अंततः भरत ने उनकी पादुकाएँ ले लीं (प्रसादनम् – राम को मनाने का प्रयास, यद्यपि राम नहीं माने)। पिता दशरथ के निधन का समाचार सुनकर राम ने उनके लिए जलांजलि दी (पितुः सलिलक्रिया)।

📖 व्याकरणिक एवं साहित्यिक पक्ष

"वास्तुकर्म" वास्तु (भवन) और कर्म (कार्य) का समास है। "प्रसादनम्" राम को मनाने की क्रिया है। "सलिलक्रिया" जलांजलि देने की क्रिया, जो मृतक के लिए की जाती है।

🕉️ आध्यात्मिक संदेश

राम ने पिता की आज्ञा का पालन करते हुए वनवास स्वीकार किया, और भरत ने राम के प्रति अपने प्रेम एवं कर्तव्य का निर्वाह किया। यह श्लोक भ्रातृ-प्रेम, कर्तव्यपरायणता और पितृ-भक्ति का आदर्श प्रस्तुत करता है।

॥ भरतो रामभक्तः – भरत राम के परम भक्त हैं ॥