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Punjabi Devi Bhajan

या देवी सर्वभूतेषु | Ya Devi Sarva Bhuteshu | Durga Mantra Anuja Sinha - Bhaktilok

69 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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सर्वभूति माता: देवी की स्तुति

या देवी सर्वभूतेषु का भजन देवी के स्वरूपों की आराधना में मन को शांति देता है।

या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिताऽ। नमास्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः।। या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिताऽ। नमास्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः।। या देवी सर्वभूतेषु विद्या रूपेण संस्थिताऽ। नमास्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः।। या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिताऽ। नमास्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः।। या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मी रूपेण संस्थिताऽ। नमास्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः।। या देवी सर्वभूतेषु भाग्य रूपेण संस्थिताऽ। नमास्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः।। या देवी सर्वभूतेषु तारण रूपेण संस्थिताऽ। नमास्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः।। या देवी सर्वभूतेषु सृष्टि स्वरूपेण संस्थिताऽ। नमास्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः।।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

या देवी सर्वभूतेषु का यह मन्त्र मां दुर्गा की महिमा का बखान करता है। यहाँ हर पंक्ति में देवी की विभिन्न प्रवृत्तियों का उल्लेख किया गया है। जैसे, "या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिताऽ", यह उनके मातृ स्वरूप को दर्शाता है जो सभी प्राणियों में विद्यमान है। उनके रूप अनेक हैं और प्रत्येक रूप में शक्ति और विद्या का संचार है। यह दर्शाता है कि देवी विश्व में हर एक प्राणी के हृदय में विद्यमान हैं, चाहे वह शक्ति, विद्या, या सौभाग्य का स्वरूप हो। यह भजन मुख्यतः उनके अनंत रूपों एवं शक्तियों का गुणगान करने हेतु गाया जाता है, जिससे भक्त उनके प्रति समर्पण और श्रद्धा का अनुभव करते हैं।

ये पंक्तियाँ देवी के विभिन्न स्वरूपों की आराधना करती हैं, जो सभी प्राणियों में शक्ति का संचार करती हैं। इस मन्त्र का मुख्य भावार्थ यह है कि देवी का अस्तित्व केवल एक शारीरिक रूप में नहीं है, बल्कि वह हर जगह, हर मन में और हर जीवन में समाहित हैं। जब हम देवी की पूजा करते हैं, तो हम अपने अंतर्मन की शुद्धि के साथ-साथ उन्हें हमारे जीवन के हर क्षेत्र में प्रवेश करने का निमंत्रण देते हैं। इससे भक्त का मन शांति, संतुलन और सद्गुणों की ओर अग्रसर होता है। प्रत्येक "नमस्तस्यै" का उच्चारण उनके प्रति गहरी आस्था और समर्पण का प्रमाण है।

यह भक्ति मार्ग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहाँ भक्त देवी को समर्पित होकर उनके स्वरूपों का ध्यान करते हैं। भक्ति का यह सन्देश हमें प्रेरणा देता है कि हम अपने अंदर की सकारात्मकता, शक्ति और प्रेम को जागृत करें। यह भजन केवल देवी माँ की स्तुति नहीं है, बल्कि यह हमारे अपने अंदर जो कुछ अच्छा है, उसे पहचानने और विकसित करने का मार्ग भी दिखाता है। देवी की विविधता में एकता का सन्देश है, जो हमें सिखाता है कि कैसे हम समाज और संसार में एकजुट होकर प्रेम और एकता की भावना के साथ रह सकते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का शास्त्रीय संदर्भ देवी दुर्गा की महिमा में निहित है, जिसे मां शक्ति के अवतार के रूप में पूजा जाता है। इसे आमतौर पर देवी भागवत तथा मार्कंडेय पुराण में वर्णित देवी महात्म्य से जोड़ा जाता है। यहाँ देवी के विभिन्न रूपों का उल्लेख किया गया है, जैसे कि मातृत्व, शक्ति, विद्या, और शांति। यह भजन हमें याद दिलाता है कि देवी की महिमा अनंत है और वे सृष्टि के प्रत्येक कण में विद्यमान हैं। यह सिर्फ भक्ति का सरल मार्ग नहीं है, बल्कि बार-बार के श्रवण से आत्मा को शुद्ध करने का एक साधन भी है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। या देवी सर्वभूतेषु का जाप मानसिक तनाव को कम करने में सहायक है। यह भक्ति भावना को जागृत करती है और सकारात्मकता का संचार करती है। नियमित रूप से इसका जाप करने से भक्ति में सम्पूर्णता का अनुभव होता है। साथ ही, यह संतुलन, शांति, और आत्मविश्वास की भावना बढ़ाता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस मन्त्र का जाप सुबह जल्दी या शाम को करना सर्वोत्तम होता है। पूजा स्थल को स्वच्छ करें, वहाँ एक दीया जलाएँ और माता के चरणों में फूल अर्पित करें। मन को एकाग्र करते हुए बैठें और ध्यानपूर्वक मन्त्र का जाप करें। सही मुद्रा में बैठना और ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

या देवी सर्वभूतेषु मन्त्र का महत्व क्या है?

यह मन्त्र देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों की स्तुति में है, जो अनंत शक्तियों और गुणों का संचार करती है। इसे जपने से भक्त में सकारात्मकता और ऊर्जा का अनुभव होता है।

किस वक्त इस मन्त्र का जाप करना चाहिए?

सुबह या शाम का समय सबसे उपयुक्त है, जब मन शांत और एकाग्र होता है। इससे ध्यान और जाप में अधिक प्रभावीता आती है।

या देवी सर्वभूतेषु का जाप कैसे करें?

साधक को एक शांत स्थान पर बैठकर ध्यानपूर्वक इस मन्त्र का जाप करना चाहिए। आँखें बंद कर आत्मा में देवी के गुणों को अनुभव करते हुए, श्रद्धा के साथ जाप करें।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 27 Aug 2026

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