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Durga Bhajan Lyrics

Jagadamba Bhavani Tu Jaane Maa Teriyaan Lyrics (जगदम्बा भवानी तू जाने माँ तेरियाँ) – Hansraj Raghuvanshi Maa Bhajan 2026

339 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah | 2 मिनट पठन समय
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🙏 जगदम्बा भवानी – तू जाने माँ तेरियाँ

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें।

(Jagadamba Bhavani Tu Jaane Maa Teriyaan Lyrics In Hindi) – Hansraj Raghuvanshi Maa Bhajan 2026

गायक: हंसराज रघुवंशी || माँ भजन

📝 भजन विवरण

🎤 गायक: हंसराज रघुवंशी (Hansraj Raghuvanshi)
🏷️ श्रेणी: माँ भजन / दुर्गा भजन
📍 भाव: श्रद्धा, समर्पण, माँ की कृपा

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

तू जाने माँ तेरियाँ, तू जाने,
तू जाने माँ तेरियाँ, तू जाने॥

॥ अंतरा १ ॥

माँ की ममता से ऊपर,
ना जग में कोई छाया है।
मैं राह तकूँ हर दिन तेरा,
तू ही मेरा साया है।
तुम रुद्राणी, तुम ब्रह्माणी,
तुमसे ही जग ये आया है।
मैं क्यों ना तुमको पूजूँ माँ,
तुमने ही मुझे बनाया है॥

॥ अंतरा २ ॥

जब मन ये मेरा डर से काँपे,
तुम हिम्मत भरने आना।
कभी जगदंबा, कभी बनके भवानी,
मुझ पे कृपा बरसाना।
कभी जगदंबा, कभी बनके भवानी,
मुझ पे कृपा बरसाना॥

जय माँ, जय माँ,
जय माँ, जय माँ॥

॥ अंतरा ३ ॥

चाहे पार करो, चाहे आर करो,
मेरी मैया तुम स्वीकार करो।
मैं आया जग से खा के धोखे,
अब नैया मेरी पार करो।
उद्धार करो माँ, मुझे प्यार करो माँ,
मैं जग का सताया, दुलार करो माँ।
जब भटकूँ मैं इस दुनिया से,
रस्ता तू मुझको दिखा देना।
कभी जगदंबा, कभी बनके भवानी,
मुझ पे कृपा बरसाना।
कभी जगदंबा, कभी बनके भवानी,
मुझ पे कृपा बरसाना॥

तू जाने माँ तेरियाँ, तू जाने,
तू जाने माँ तेरियाँ, तू जाने॥

🎤 गायक :- हंसराज रघुवंशी (Hansraj Raghuvanshi)

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भावपूर्ण भजन "जगदम्बा भवानी (तू जाने माँ तेरियाँ)" हंसराज रघुवंशी की सुरीली आवाज़ में माँ जगदम्बा और माँ भवानी के प्रति अगाध श्रद्धा और समर्पण को दर्शाता है। भजन का मूल स्वर एक भक्त की माँ के प्रति गहरी आस्था और उनसे मिलने वाली कृपा का वर्णन करता है।

"तू जाने माँ तेरियाँ, तू जाने" – यह मुखड़ा भक्त की उस गहरी आस्था को दर्शाता है जहाँ वह माँ से कहता है कि तू ही जाने तेरी बातें (तेरियाँ)। यह माँ के प्रति पूर्ण समर्पण और विश्वास का प्रतीक है।

"माँ की ममता से ऊपर, ना जग में कोई छाया है" – भक्त कहता है कि इस संसार में माँ की ममता से बढ़कर कोई छाया (सुरक्षा) नहीं है। वह हर दिन माँ की राह तकता है, क्योंकि माँ ही उसका साया (सहारा) है।

"तुम रुद्राणी, तुम ब्रह्माणी, तुमसे ही जग ये आया है" – माँ को रुद्राणी (रुद्र की शक्ति) और ब्रह्माणी (ब्रह्मा की शक्ति) कहकर उनके सर्वोच्च स्वरूप का वर्णन किया गया है। यह संपूर्ण जगत माँ से ही उत्पन्न हुआ है। भक्त कहता है कि माँ ने ही उसे बनाया है, इसलिए वह उनकी पूजा करता है।

"जब मन ये मेरा डर से काँपे, तुम हिम्मत भरने आना" – जब कभी भक्त का मन डर से काँपता है, वह माँ से प्रार्थना करता है कि वे कभी जगदम्बा के रूप में, कभी भवानी के रूप में आकर उसमें हिम्मत भर दें और उस पर कृपा बरसाएँ।

"चाहे पार करो, चाहे आर करो, मेरी मैया तुम स्वीकार करो" – भक्त कहता है कि माँ चाहे उसे पार करें (संसार सागर से पार) या आर (विघ्न) करें, वह सब स्वीकार है। वह जग से धोखा खाकर माँ के पास आया है, और उसकी नैया (जीवन रूपी नाव) को पार करने की प्रार्थना करता है।

"उद्धार करो माँ, मुझे प्यार करो माँ, मैं जग का सताया, दुलार करो माँ" – भक्त माँ से उद्धार, प्यार और दुलार की याचना करता है। वह इस दुनिया से सताया हुआ है, इसलिए जब भी वह भटके, माँ उसे रास्ता दिखा दे।

🔍 माँ भजन का विशेष महत्त्व

"तू जाने माँ तेरियाँ" का भाव: यह मुखड़ा बहुत ही गहरा और मार्मिक है। "तेरियाँ" का अर्थ है तेरी बातें या तेरे भाव। भक्त कहता है कि हे माँ, तू ही जाने तेरी बातें – यह उस परिपूर्ण समर्पण को दर्शाता है जहाँ भक्त माँ के रहस्यों को जानने का दावा नहीं करता, बस उन पर विश्वास करता है।

माँ के विभिन्न रूप: इस भजन में माँ के कई रूपों का उल्लेख है – जगदम्बा (जगत की माता), भवानी (कल्याणकारी), रुद्राणी (रुद्र की शक्ति), ब्रह्माणी (ब्रह्मा की शक्ति)। यह दर्शाता है कि माँ ही सभी शक्तियों का स्रोत हैं।

"जय माँ, जय माँ" का उद्घोष: बीच में आने वाला यह जयकार भजन को और अधिक भक्तिमय बना देता है। यह माँ के प्रति श्रद्धा और उल्लास को दर्शाता है।

"चाहे पार करो, चाहे आर करो": यह पंक्ति भक्त के अद्भुत समर्पण को दर्शाती है। वह कहता है कि माँ चाहे उसे पार लगाए या विघ्न दे, वह सब स्वीकार है। यह पूर्ण समर्पण का भाव है।

हंसराज रघुवंशी का गायन: गायक हंसराज रघुवंशी ने अपनी सुरीली और भावपूर्ण आवाज़ में इस भजन को जीवंत कर दिया है। उनके गायन में वह गहराई और श्रद्धा है जो इस भजन को विशेष बनाती है। यह भजन हर उस भक्त के दिल की आवाज़ है जो माँ के दरबार में अपनी व्यथा लेकर आता है और उनसे कृपा की भीख माँगता है।

💖 माँ की कृपा का आह्वान

🎯 संदेश

इस भजन का मूल संदेश यह है कि माँ ही इस जगत की सबसे बड़ी शक्ति हैं। वे रुद्राणी हैं, ब्रह्माणी हैं, जगदम्बा हैं और भवानी हैं। उनकी ममता से बढ़कर इस संसार में कोई छाया नहीं। जब मन डर से काँपता है, तो माँ ही हिम्मत भरने आती हैं। जो भी जग से धोखा खाकर, सताया हुआ माँ के पास आता है, माँ उसे प्यार और दुलार देती हैं, उसकी नैया पार लगाती हैं, और उसे सही रास्ता दिखाती हैं।

✨ समर्पण की पराकाष्ठा

तू जाने माँ तेरियाँ केवल एक भजन नहीं, बल्कि समर्पण की उस पराकाष्ठा का प्रतीक है जहाँ भक्त माँ के प्रति अपना सब कुछ समर्पित कर देता है। यह भजन हर उस व्यक्ति के दिल की आवाज़ है जो माँ की शरण में आना चाहता है, जो जग के धोखों से तंग आकर माँ के दरबार में पहुँचता है, और माँ से केवल प्यार, दुलार और उद्धार की भीख माँगता है। यह भजन हमें सिखाता है कि माँ के दरबार में सबका स्वागत है, चाहे कोई कैसा भी हो।

🙏 ॐ श्री जगदम्बायै नमः || जय माँ भवानी || जय माँ जगदम्बा 🙏

॥ हंसराज रघुवंशी कृत माँ भजन ॥
॥ कभी जगदंबा, कभी बनके भवानी, मुझ पे कृपा बरसाना ॥

गायक: हंसराज रघुवंशी | Singer: Hansraj Raghuvanshi

॥ तू जाने माँ तेरियाँ, तू जाने ॥

श्रेणियां: Durga Bhajan Lyrics Durga Puja

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 11 Aug 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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