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Holi Bhajan

भरो ना झोली श्याम

69 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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भरो ना झोली श्याम



भरो ना झोली श्याम(Bharo Na Jholi Shyam Lyrics in Hindi )- Bhavishya Sikri Shyam Bhajan - 


Song: Bharo Na Jholi Shyam Lyrics in Hindi 
Singer: Bhavishya Sikri - 9718727714
Music:  Sahni Brothers
Recording: DSb Dhaani Studio
Mix-Master: Sandy
Lyricist: Jay Kumar Albela
Special Thanks: Rishabh Goyal, Dadri
Blessings: Mata-PIta
Video: Vaid Production
Category: Hindi Devotional (Shyam Bhajan)
Producers: Amresh Bahadur, Ramit Mathur
Label: Yuki

भरो ना झोली श्याम(Bharo Na Jholi Shyam Lyrics in Hindi )- 


आजा बाबा आजा अब तो और न तू तरसा
निकले आँख से आंसू जैसे सावन है बरसा 
दुनिया से मैं हार के आया बाबा तेरे द्वारे
मैंने सुना है खाटू में तुम हारे के हो सहारे
भरो ना झोली श्याम पुकारूँ तुमको श्याम 
सांवरे ........सांवरे.............

जिन जिन को मैंने अपना माना कोई ना साथ निभाए
तू ही बता ना बाबा अब हम किससे आस लगाए 
तेरे प्रेमी बन के हम गुणगान तेरा ही गायें 
तुझसे ना मांगे तो झोली और कहाँ फैलाएं 
भरो ना झोली श्याम पुकारूँ तुमको श्याम 

निर्धन निर्बल मैं तो बाबा जैसा भी हूँ तेरा 
देख के दुनिया ताना मारे संकट ने है घेरा
भव से बाबा पार लगदे नैया झोंके खाये 
तुझसे ना मांगे तो झोली और कहाँ फैलाएं 
भरो ना झोली श्याम पुकारूँ तुमको श्याम 
सांवरे ........सांवरे.............

झूठी नहीं अदालत तेरी झूठी दुनिया साड़ी 
मेरा भविष्य संवारने वाला तू ही श्याम मुरारी 
जय कुमार पर कृपा कर दे तुझसे आस लगाएं 
तुझसे ना मांगे तो झोली और कहाँ फैलाएं 
भरो ना झोली श्याम पुकारूँ तुमको श्याम




🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "भरो ना झोली श्याम" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

श्रेणियां: Holi Bhajan Holi Geet holi song

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 15 Aug 2026

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