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Ganesha Mantra

श्री गणेशपञ्चरत्नम् - मुदाकरात्तमोदकं (Shri Ganesha Pancharatnam - Mudakaratta Modakam Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

372 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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 श्री गणेशपञ्चरत्नम् - मुदाकरात्तमोदकं (Shri Ganesha Pancharatnam - Mudakaratta Modakam Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

श्री गणेशपञ्चरत्नम् - मुदाकरात्तमोदकं (Shri Ganesha Pancharatnam - Mudakaratta Modakam Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

श्री गणेशपञ्चरत्नम् - मुदाकरात्तमोदकं (Shri Ganesha Pancharatnam - Mudakaratta Modakam Lyrics in Hindi) - 


श्री गणेश पंच रत्न स्तोत्र!


मुदाकरात्तमोदकं सदा विमुक्तिसाधकं

कलाधरावतंसकं विलासिलोकरक्षकम् ।

अनायकैकनायकं विनाशितेभदैत्यकं

नताशुभाशुनाशकं नमामि तं विनायकम् ॥१॥

नतेतरातिभीकरं नवोदितार्कभास्वरं

नमत्सुरारिनिर्जरं नताधिकापदुद्धरम् ।

सुरेश्वरं निधीश्वरं गजेश्वरं गणेश्वरं

महेश्वरं तमाश्रये परात्परं निरन्तरम् ॥२॥


समस्तलोकशंकरं निरस्तदैत्यकुञ्जरं

दरेतरोदरं वरं वरेभवक्त्रमक्षरम् ।

कृपाकरं क्षमाकरं मुदाकरं यशस्करं

मनस्करं नमस्कृतां नमस्करोमि भास्वरम् ॥३॥


अकिंचनार्तिमार्जनं चिरन्तनोक्तिभाजनं

पुरारिपूर्वनन्दनं सुरारिगर्वचर्वणम् ।

प्रपञ्चनाशभीषणं धनंजयादिभूषणम्

कपोलदानवारणं भजे पुराणवारणम् ॥४॥


नितान्तकान्तदन्तकान्तिमन्तकान्तकात्मजं

अचिन्त्यरूपमन्तहीनमन्तरायकृन्तनम् ।

हृदन्तरे निरन्तरं वसन्तमेव योगिनां

तमेकदन्तमेव तं विचिन्तयामि सन्ततम् ॥५॥


महागणेशपञ्चरत्नमादरेण योऽन्वहं

प्रजल्पति प्रभातके हृदि स्मरन् गणेश्वरम् ।

अरोगतामदोषतां सुसाहितीं सुपुत्रतां

समाहितायुरष्टभूतिमभ्युपैति सोऽचिरात् ॥६॥



सरल संस्कृत: श्री गणेश पंच रत्न स्तोत्र!


मुदा करात्त मोदकं सदा विमुक्ति साधकम् ।

कलाधरावतंसकं विलासिलोक रक्षकम् ।

अनायकैक नायकं विनाशितेभ दैत्यकम् ।

नताशुभाशु नाशकं नमामि तं विनायकम् ॥ 1 ॥


नतेतराति भीकरं नवोदितार्क भास्वरम् ।

नमत्सुरारि निर्जरं नताधिकापदुद्ढरम् ।

सुरेश्वरं निधीश्वरं गजेश्वरं गणेश्वरम् ।

महेश्वरं तमाश्रये परात्परं निरन्तरम् ॥ 2 ॥


समस्त लोक शङ्करं निरस्त दैत्य कुञ्जरम् ।

दरेतरोदरं वरं वरेभ वक्त्रमक्षरम् ।

कृपाकरं क्षमाकरं मुदाकरं यशस्करम् ।

मनस्करं नमस्कृतां नमस्करोमि भास्वरम् ॥ 3 ॥


अकिञ्चनार्ति मार्जनं चिरन्तनोक्ति भाजनम् ।

पुरारि पूर्व नन्दनं सुरारि गर्व चर्वणम् ।

प्रपञ्च नाश भीषणं धनञ्जयादि भूषणम् ।

कपोल दानवारणं भजे पुराण वारणम् ॥ 4 ॥


नितान्त कान्ति दन्त कान्ति मन्त कान्ति कात्मजम् ।

अचिन्त्य रूपमन्त हीन मन्तराय कृन्तनम् ।

हृदन्तरे निरन्तरं वसन्तमेव योगिनाम् ।

तमेकदन्तमेव तं विचिन्तयामि सन्ततम् ॥ 5 ॥


महागणेश पञ्चरत्नमादरेण योऽन्वहं ।

प्रजल्पति प्रभातके हृदि स्मरन् गणेश्वरम् ।

अरोगतामदोषतां सुसाहितीं सुपुत्रताम् ।

समाहितायु रष्टभूति मभ्युपैति सोऽचिरात् ॥ 6 ॥



🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)

प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश जी का यह भजन "श्री गणेशपञ्चरत्नम् - मुदाकरात्तमोदकं (Shri Ganesha Pancharatnam - Mudakaratta Modakam Lyrics in Hindi) - Bhaktilok" सभी कार्यों के निर्विघ्न संपन्न होने की कामना से गाया जाता है। विघ्नहर्ता गणेश जी बुद्धि, ज्ञान और विवेक के अधिष्ठाता देव हैं। इस भजन के प्रत्येक शब्द में गणेश जी के गजमुख, विशाल उदर, और चूषक वाहन का सुंदर वर्णन है।

इस भजन की मूल भावना विघ्न विनाश और शुभ-लाभ की प्राप्ति की है। जीवन में जब भी कोई नया कार्य प्रारंभ करना हो, तो गणेश जी का स्मरण करना अनिवार्य माना गया है, क्योंकि वे ऋद्धि-सिद्धि के प्रदाता हैं।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)

गणेश पुराण के अनुसार, श्री गणेश जी की स्तुति और भजन सुनने से बुद्धि का विकास होता है, विद्या अर्जन में आने वाली बाधाएं समाप्त होती हैं और घर में शांति का वातावरण बनता है।

प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के जन्म और उनकी कथाओं का संपूर्ण विवरण जानने के लिए ब्रह्म पुराण गणेश महिमा का पाठ करें। गणेश संकीर्तन से मानसिक अशांति दूर होती है, बुद्धि कुशाग्र होती है और किसी भी कार्य में आने वाली विघ्न-बाधाएं स्वतः ही दूर हो जाती हैं।

🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)

बुधवार और गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जी के सम्मुख दूर्वा और मोदक अर्पित कर इस भजन का संकीर्तन करें। गायन के समय सिंदूर का तिलक लगाना शुभ होता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

गणेश जी की पूजा में 'दूर्वा' (दूब घास) क्यों चढ़ाई जाती है?

दूर्वा शीतलता प्रदान करने वाली है। अनलासुर नामक दैत्य को निगलने के बाद गणेश जी के पेट में उत्पन्न जलन को शांत करने के लिए मुनियों ने उन्हें दूर्वा चढ़ाई थी। तब से गणेश जी को दूर्वा अत्यंत प्रिय है।

भगवान गणेश के भजन किस दिन विशेष रूप से गाने चाहिए?

बुधवार का दिन और हर माह आने वाली संकष्टी व विनायक चतुर्थी की तिथियां गणेश आराधना के लिए सर्वोत्तम हैं।

क्या प्रथम पूज्य गणेश जी का स्मरण हर पूजा से पहले जरूरी है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव से मिले वरदान के कारण किसी भी शुभ कार्य या देव पूजा की शुरुआत गणेश जी के पूजन व स्मरण से ही की जाती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

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