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श्री नर्मदा अष्टकम लिरिक्स (Shri Narmada Ashtakam Lyrics in Hindi) - BHaktilok

72 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

श्री नर्मदा अष्टकम लिरिक्स (Shri Narmada Ashtakam Lyrics in Hindi) - Bhaktilok श्री नर्मदा अष्टकम लिरिक्स (Shri Narmada Ashtakam Lyrics in Hindi) - सबिंदु सिन्धु सुस्खल तरंग भंग रंजितमद्विषत्सु पाप जात जात कारि वारि संयुतमकृतान्त दूत काल भुत भीति हारि वर्मदेत्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे ॥1॥ त्वदम्बु लीन दीन मीन दिव्य सम्प्रदायकमकलौ मलौघ भारहारि सर्वतीर्थ नायकंसुमस्त्य कच्छ नक्र चक्र चक्रवाक् शर्मदेत्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे ॥2॥ महागभीर नीर पुर पापधुत भूतलंध्वनत समस्त पातकारि दरितापदाचलमजगल्ल्ये महाभये मृकुंडूसूनु हर्म्यदेत्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे ॥3॥ गतं तदैव में भयं त्वदम्बु वीक्षितम यदामृकुंडूसूनु शौनका सुरारी सेवी सर्वदापुनर्भवाब्धि जन्मजं भवाब्धि दुःख वर्मदेत्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे ॥4॥ अलक्षलक्ष किन्न रामरासुरादी पूजितंसुलक्ष नीर तीर धीर पक्षीलक्ष कुजितमवशिष्ठशिष्ट पिप्पलाद कर्दमादि शर्मदेत्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे ॥5॥ सनत्कुमार नाचिकेत कश्यपात्रि षटपदैधृतम स्वकीय मानषेशु नारदादि षटपदै:रविन्दु रन्ति देवदेव राजकर्म शर्मदेत्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे ॥6॥ अलक्षलक्ष लक्षपाप लक्ष सार सायुधंततस्तु जीवजंतु तंतु भुक्तिमुक्ति दायकंविरन्ची विष्णु शंकरं स्वकीयधाम वर्मदेत्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे ॥7॥ अहोमृतम श्रुवन श्रुतम महेषकेश जातटेकिरात सूत वाड़वेषु पण्डिते शठे नटेदुरंत पाप ताप हारि सर्वजंतु शर्मदेत्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे ॥8॥ इदन्तु नर्मदाष्टकम त्रिकलामेव ये सदापठन्ति ते निरंतरम न यान्ति दुर्गतिम कदासुलभ्य देव दुर्लभं महेशधाम गौरवमपुनर्भवा नरा न वै त्रिलोकयंती रौरवम ॥9॥ त्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदेनमामि देवी नर्मदे, नमामि देवी नर्मदेत्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

श्री नर्मदा अष्टकम का मूल स्वरुप देवी नर्मदा की महिमा का विवरण है। देवी नर्मदा को अज्ञात भय के समय में आश्रय देने वाली, पापों का नाश करने वाली, और जीवों को मुक्ति प्रदान करने वाली देवी माना गया है। पहले श्लोक में कहा गया है, ‘सबिंदु सिन्धु सुस्खल तरंग भंग रंजितम’, इसमें यह दर्शाया गया है कि नर्मदा नदी के जल में बसी हुई शक्ति जीवों के पापों का नाश करती है। दुसरे श्लोक में देवी की महिमा का वर्णन किया गया है कि वह सभी तीर्थों की नायक हैं और इसларға संपूर्ण संसार में सभी पौधों और जीवों का पोषण करती हैं। इस प्रकार, इस अष्टकम के माध्यम से ऐसा प्रतीत होता है कि नारायण की भक्ति के समान नर्मदा की आराधना भी पूरे जीवन के समस्त पापों को दूर करती है।

भावार्थ के अनुसार, नर्मदा माँ की कृपा सभी जीवों के लिए सरसता, आनन्द और शांति का स्रोत है। तीसरे श्लोक में नर्मदा माताजी की गहराई का बखान किया गया है - ‘महागभीर नीर पुर पापधुत भूतल’. यही कारण है कि भक्तजन अपनी दीनता और शरणागतता को लेकर देवी नर्मदा से प्रार्थना करते हैं, ताकि इससे उनके जीवन में भक्ति और सिद्धि की प्राप्ति हो सके। इससे साधक की मानसिकता और ईश्वर में विश्वास को बढ़ावा मिलता है, जिससे भक्ति मार्ग का प्रसंग एवं ईश्वर का साक्षात्कार सम्भव हो पाता है।

इस अष्टकम का साधारणार्थ ध्यान करते हुए, यह स्पष्ट होता है कि भक्ति मार्ग पर चलने से व्यक्ति जीव, कर्म, और परमात्मा के बीच का संबंध समझ सकता है। भक्ति का यह मार्ग केवल देवी-देवताओं की पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन के समस्त दुखों और समस्याओं का समाधान भी प्रदान करता है। आठवें श्लोक में वर्णित ‘अहोमृतम श्रुवन श्रुतम’ भावार्थ में बताया गया है कि नर्मदा का स्तवन सुनने से और इसे समझने से सभी पाप समाप्त होते हैं। यह दर्शाता है कि भक्त की सच्ची आस्था ही उन्हें मुक्ति दिला सकती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्री नर्मदा अष्टकम, देवी नर्मदा के प्रति भक्तों की श्रद्धा और आस्था का चित्रण है। पुराणों में नर्मदा का विशेष स्थान है, जहां देवी को गंगा के समान माना गया है। नर्मदा को महान तीर्थों का प्रतीक कहा गया है जो जीवों को मोक्ष प्रदान करती है। यह अष्टकम उन सभी इच्छाओं और पापों का नाश करने वाली देवी की महिमा का रूपांतर है। ऐसे स्थानों पर, जहाँ नर्मदा की आराधना होती है, भक्त मन्नते मांगते हैं, और सब प्रकार की संकटों से मुक्ति प्राप्त करते हैं।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। श्री नर्मदा अष्टकम का जप करने से मन और मस्तिष्क को शांति मिलती है, और यह भक्ति की भावना को जगाता है। इसे नियमित रूप से पढ़ने से जीवन में सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है। मानसिक तनाव से मुक्ति और सकारात्मकता की प्राप्ति होती है, जिससे व्यक्ति को अपने कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

श्री नर्मदा अष्टकम का जप सबसे अच्छा सुबह या शाम के समय किया जाता है। इस दौरान दीप जलाना, इत्र, और फूलों का अर्पण करना, एक उत्तम सिद्धि की ओर ले जाता है। सही मानसिकता के साथ, एक शांत जगह पर बैठकर ध्यान और श्रद्धा से इस अष्टकम का पाठ करना चाहिए। इससे भक्ति के भाव को बढ़ावा मिलता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

श्री नर्मदा अष्टकम का पाठ कैसे करना चाहिए?

श्री नर्मदा अष्टकम का पाठ शांति और श्रद्धा के साथ सुबह या शाम के समय करना चाहिए। श्रद्धापूर्वक दीप जलाकर पाठ करने से मन में सकारात्मकता आती है।

क्या इस अष्टकम का पाठ करने से कोई विशेष लाभ होता है?

इस अष्टकम का नियमित पाठ करने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि इससे पापों का नाश और भक्ति की वृत्ति में वृद्धि होती है।

क्या यह अष्टकम केवल देवी नर्मदा की आराधना के लिए है?

यह अष्टकम देवी नर्मदा के प्रति श्रद्धा और आस्था का प्रदर्शन करता है, और इसे सभी प्रकार की मुसीबतों से मुक्ति के लिए पाठ किया जाता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Aug 2026

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