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नारियलवा अरघ चढ़े (Nariyalwa Aragh Chadhe Ho) - Chhath Pooja GeetKALPANA Chhathi Maiya Aaihein Hamaar - Bhaktilok

135 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

नारियलवा अरघ चढ़े हो, छठी मैया अइहिन हमार नारियलवा अरघ चढ़े हो, छठी मैया अइहिन हमार सूरज देव के अरघ चढ़ावत, प्रभु करिहु मेरा कार नारियलवा अरघ चढ़े हो, छठी मैया अइहिन हमार गन्ना, गुड़ आरू खीर अरघ, फल फूल का भार छठी देवी के भक्त भरोसेवा, करिहु उद्धार नारियलवा अरघ चढ़े हो, छठी मैया अइहिन हमार बुझले मोर संकट सब, देवी दिहु सहार नारियलवा अरघ चढ़े हो, छठी मैया अइहिन हमार

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह गीत छठ पर्व की सबसे पवित्र परंपरा को दर्शाता है, जहां भक्त नारियल के माध्यम से सूर्य देव और छठी माता को अर्घ्य प्रदान करते हैं। 'नारियलवा अरघ चढ़े' पंक्ति नारियल को अर्घ्य का मुख्य साधन बताती है, जो शुद्धता, समृद्धि और देवताओं का आह्वान करने का प्रतीक है। गीत में गन्ना, गुड़ और खीर जैसे पारंपरिक भोग का उल्लेख है, जो पूरे परिवार की कल्याण की कामना व्यक्त करता है। 'छठी मैया अइहिन हमार' की पुनरावृत्ति देवी छठ के प्रति अटूट विश्वास और उनके आगमन की प्रतीक्षा को दर्शाती है। भक्त का आह्वान है कि सूर्य देव इस अर्घ्य को स्वीकार करें और माता अपनी कृपा बरसाएं, जिससे सभी संकट दूर हों और परिवार सुख-समृद्धि से भरा रहे।

इस गीत का भावार्थ विश्वास, समर्पण और मातृत्व की शक्ति में निहित है। छठ पर्व भारतीय संस्कृति का सबसे प्राचीन और शुद्ध पर्व है जो सूर्य और उनकी शक्ति (छठी माता) को समर्पित है। जब भक्त नारियल के साथ अर्घ्य चढ़ाते हैं, तो वह केवल एक सामग्री नहीं चढ़ाते, बल्कि अपनी समस्त इच्छाओं, आशाओं और परिवार के कल्याण की भावना को समर्पित करते हैं। 'बुझले मोर संकट सब' की पंक्ति दर्शाती है कि भक्त अपने सभी दुःख, परेशानियों और आंतरिक अंधकार को छठी माता के समक्ष रखता है। देवी की कृपा की याचना करते हुए, भक्त आत्मसमर्पण की मनोवृत्ति अपनाता है। यह गीत न केवल बाहरी पूजा विधि को दर्शाता है बल्कि आंतरिक शुद्धता, निष्ठा और परमात्मा के साथ एकात्मकता की भी व्याख्या करता है।

भक्ति मार्ग के संदर्भ में यह गीत निष्काम भक्ति और शरणागति का उत्तम उदाहरण है। छठ पूजन केवल अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह साधना है जो देवी छठ (दुर्गा का षष्ठ रूप) और सूर्य (प्राण ऊर्जा के स्रोत) की पूजा के माध्यम से आत्मज्ञान की ओर ले जाती है। नारियल के अर्घ्य का तात्विक अर्थ है कि भक्त अपने अहंकार (कठोर खोल) को त्यागकर भीतर की शुद्ध भक्ति (नारियल का सफेद भाग) को प्रदर्शित करता है। छठी माता की आराधना में भक्त की समस्त शक्तियों और संकल्प का समर्पण होता है। यह गीत दर्शाता है कि प्रकृति, देवता और भक्त का त्रिमुखी संबंध कैसे कल्याण और मुक्ति की ओर ले जाता है। देवी की 'सहार' (सहायता) मांगना आत्मनिर्भरता नहीं बल्कि पूर्ण आश्रय की भावना को व्यक्त करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

छठ पर्व हिंदू धर्म के सबसे प्राचीन पर्वों में से एक है, जिसका वर्णन ऋग्वेद और अथर्ववेद में मिलता है। यह पर्व विशेषकर बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है। महाभारत में भी छठ पूजन का संदर्भ है, जहां द्रौपदी ने अपने परिवार की समृद्धि के लिए इस व्रत को किया था। छठी माता को कन्या दुर्गा का षष्ठ अवतार माना जाता है, जो शिशु और माता दोनों की रक्षा करती हैं। सूर्य देव को 'आदित्य' कहा जाता है और वेदों में उन्हें सर्वोच्च देवता का दर्जा दिया गया है। छठ पर्व का संबंध फसल कटाई के समय से भी है, जब किसान अपनी मेहनत के फल के लिए देवताओं को धन्यवाद देते हैं। पुराणों में वर्णित है कि छठी माता शरीर में षष्ठ चक्र (आज्ञा चक्र) को नियंत्रित करती हैं और आध्यात्मिक जागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यह गीत इसी प्राचीन परंपरा को जीवंत रूप देता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस गीत का गायन और श्रवण मन को शांति, प्रसन्नता और आत्मविश्वास से भर देता है। नियमित चिंतन से भक्त के मन में सकारात्मकता बढ़ती है और नकारात्मक विचार दूर होते हैं। शारीरिक स्तर पर इस भजन का मंत्र-सदृश असर होता है, जो तनाव को कम करता है और रक्त संचार में सुधार लाता है। आध्यात्मिक दृष्टि से यह गीत देवी छठ के साथ सीधे संबंध स्थापित करता है, जिससे अंतःचेतना का विकास होता है और आत्मशक्ति जागृत होती है। परिवार की समृद्धि, स्वास्थ्य और मंगल के लिए यह भजन अत्यंत प्रभावी है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस गीत का गायन सूर्योदय या सूर्यास्त के समय सर्वोत्तम है। शुद्ध हृदय और स्नानोपरांत, दीप जलाकर और नारियल, गन्ना, फूल रखकर गीत का गायन करें। घुटनों के बल बैठकर या खड़े होकर सूर्य की ओर मुख करें। मन में माता के प्रति विश्वास और समर्पण की भावना रखें। प्रतिदिन कम से कम सात बार इस गीत का पाठ करें। व्रत के दिनों में विशेषकर कार्तिक शुक्ल षष्ठी को इसका गायन अधिक प्रभावी है। आंखें बंद करके और सच्ची भक्ति से गीत गाएं, जिससे देवी का आशीर्वाद सहज ही मिले।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

छठ पूजन में नारियल के अर्घ्य का क्या विशेष महत्व है?

नारियल को शुद्धता, समृद्धि और दीर्घायु का प्रतीक माना जाता है। इसका कठोर बाहरी खोल अहंकार को और भीतर की सफेद गिरी शुद्ध भक्ति को दर्शाता है। नारियल का अर्घ्य देवी को अपनी समस्त शक्तियों के साथ संपूर्ण समर्पण का संदेश देता है।

छठी माता का क्या स्वरूप और शक्तियां हैं?

छठी माता को दुर्गा का षष्ठ अवतार माना जाता है, जो शिशु और मातृत्व की रक्षक हैं। वे आज्ञा चक्र को नियंत्रित करती हैं और आध्यात्मिक जागरण में सहायता करती हैं। उनकी कृपा से संतति, स्वास्थ्य और परिवार की समृद्धि मिलती है।

इस भजन को गाने का सही समय और तरीका क्या है?

सूर्योदय या सूर्यास्त समय सर्वोत्तम है। स्नानोपरांत शुद्ध हृदय से, सूर्य की ओर मुख करके दीप जलाकर, फूल और नारियल के साथ गीत गाएं। कार्तिक शुक्ल षष्ठी को इसका गायन विशेषकर प्रभावी है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 03 Sep 2026

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