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तुम हमारे थे प्रभु जी, तुम हमारे हो (शरणागति भजन) लिरिक्स | Tum Hamare The Prabhu Ji Tum Hamare Ho Sharnagati Bhajan Lyrics

304 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah | 2 मिनट पठन समय
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🙏 तुम हमारे थे प्रभु जी – तुम हमारे हो

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

(Tum Hamare The Prabhu Ji – Tum Hamare Ho) – शरणागति भजन / कृष्ण भजन

🌸 हम तुम्हारे थे, हम तुम्हारे हैं – पूर्ण समर्पण का भाव

📝 भजन विवरण

🏷️ श्रेणी: शरणागति भजन / कृष्ण भजन
🎶 भाव: समर्पण, प्रेम, आत्मीयता, विश्वास
📍 विशेषता: तुम-हम का अटूट संबंध – “तू मेरा, मैं तेरा” का भाव
📀 प्रचलन: कृष्ण भक्तों में प्रिय, विशेषकर शरणागति रस में डूबने के लिए

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

तुम हमारे थे प्रभु जी, तुम हमारे हो
तुम हमारे ही रहोगे, ओ मेरे प्रियतम
हम तुम्हारे थे प्रभु जी, हम तुम्हारे हैं
हम तुम्हारे ही रहेंगे, ओ मेरे प्रियतम

तुम्हें छोड़ सुन नंद दुलारे,
कोई ना मीत हमारो
तुम्हें छोड़ सुन नंद दुलारे,
कोई ना मीत हमारो
किसके द्वारे जाए पुकारूँ,
और ना कोई सहारो
किसके द्वारे जाए पुकारूँ,
और ना कोई सहारो
अब तो आके बाह पकड़ लो,
ओ मेरे प्रियतम
तुम हमारे थे प्रभु जी,
तुम हमारे हो....

तेरे कारण सब जग छोड़ा,
तुम संग नाता जोड़ा
तेरे कारण सब जग छोड़ा,
तुम संग नाता जोड़ा
एक बार प्रभु बस ये कह दो,
तू मेरा, मैं तेरा
एक बार प्रभु बस ये कह दो,
तू मेरा, मैं तेरा
साची प्रीति की रीति निभा दो,
ओ मेरे प्रियतम
तुम हमारे थे प्रभु जी,
तुम हमारे हो........

दास की यह विनती सुन लीजो,
ओ ब्रजराज दुलारे
दास की यह विनती सुन लीजो,
ओ ब्रजराज दुलारे
आखिरी आस यही जीवन की,
पूर्ण करना प्यारे
आखिरी आस यही जीवन की,
पूर्ण करना प्यारे
एक बार हृदय से लगा लो,
ओ मेरे प्रियतम
तुम हमारे थे प्रभु जी,
तुम हमारे हो......

तुम हमारे थे प्रभु जी, तुम हमारे हो
तुम हमारे ही रहोगे, ओ मेरे प्रियतम
हम तुम्हारे थे प्रभु जी, हम तुम्हारे हैं
हम तुम्हारे ही रहेंगे, ओ मेरे प्रियतम

✍️ रचनाकार :- लोक परम्परा / शरणागति भजन

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह अत्यंत भावपूर्ण शरणागति भजन है, जिसमें भक्त प्रभु से अपने नित्य संबंध का स्मरण कराता है। “तुम हमारे थे प्रभु जी, तुम हमारे हो, तुम हमारे ही रहोगे” – भक्त विश्वास दिलाता है कि प्रभु सदा उसके थे, हैं और रहेंगे। वहीं “हम तुम्हारे थे, हम तुम्हारे हैं, हम तुम्हारे ही रहेंगे” – यह परस्पर संबंध का अटूट बंधन है। यह भक्ति का अभेद भाव है – “तू मेरा, मैं तेरा”।

पहले अंतरे में – भक्त कहता है कि हे नंददुलारे, तुम्हें छोड़कर कोई मित्र नहीं। किसके द्वार पर जाकर पुकारूँ? कोई और सहारा नहीं। अब तुम आकर मेरी बाँह पकड़ लो।

दूसरे अंतरे में – तुम्हारे कारण मैंने सब संसार छोड़ दिया, तुमसे नाता जोड़ लिया। बस एक बार यह कह दो – “तू मेरा, मैं तेरा”। सच्चे प्रेम की रीति निभा दो।

तीसरे अंतरे में – हे ब्रजराज दुलारे, यह विनती सुन लो। यही जीवन की आखिरी आशा है, इसे पूर्ण कर दो। एक बार हृदय से लगा लो।

यह भजन सिखाता है कि सच्चा भक्त वह है जो प्रभु को अपना सर्वस्व मानता है और उससे “तू मेरा, मैं तेरा” का संबंध स्थापित करता है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

“तू मेरा, मैं तेरा” – भक्ति का सर्वोच्च भाव: यह पंक्ति राधा-कृष्ण के प्रेम और सूफी फना-फिल्लाह (ईश्वर में विलीन होने) के भाव को दर्शाती है।

अतीत, वर्तमान और भविष्य का अटूट संबंध: “तुम हमारे थे, हो, रहोगे” – यह तीनों कालों में प्रभु की उपस्थिति और भक्त के विश्वास को दर्शाता है।

ब्रजराज संबोधन: कृष्ण को “ब्रजराज” (ब्रज के राजा) कहकर भक्त ब्रज की लीलाओं और उनके वात्सल्य स्वरूप का स्मरण करता है।

💖 शरणागति का परम रस

🎯 संदेश

भक्त और प्रभु का नाता अनादि और अनंत है। प्रभु सदा हमारे हैं, और हम सदा उनके। यह विश्वास ही शरणागति का आधार है। “तू मेरा, मैं तेरा” का अहसास ही सच्ची भक्ति है।

✨ आस्था का प्रतीक

यह भजन उन सभी भक्तों के लिए प्रेरणा है जो प्रभु से अपना नित्य संबंध अनुभव करना चाहते हैं। “तुम हमारे थे, तुम हमारे हो” का उच्चारण मात्र हृदय को सुरक्षा और विश्वास का अहसास कराता है।

🙏 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।। तुम हमारे थे प्रभु जी, तुम हमारे हो ।।

॥ इति शरणागति भजनम् ॥
॥ तुम हमारे थे प्रभु जी, तुम हमारे हो – तुम हमारे ही रहोगे, ओ मेरे प्रियतम ॥
श्रेणियां: hari bhajan

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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