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पता नहीं किस रूप में आकर नारायण मिल जाएगा (भजन) लिरिक्स | Pata Nahi Kis Roop Mein Aakar Narayan Mil Jayega Bhajan Lyrics

423 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah | 2 मिनट पठन समय
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🙏 पता नहीं किस रूप में आकर, नारायण मिल जाएगा

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

(Pata Nahi Kis Roop Mein Aakar Narayan Mil Jayega) – भजन

🌸 प्रेम प्रभु का बरस रहा है – कण-कण में हरि, क्षण-क्षण में हरि

📝 भजन विवरण

🏷️ श्रेणी: भजन / प्रार्थना / नारायण भक्ति
🎶 भाव: विश्वास, समर्पण, कर्म सिद्धांत, आस्था
📍 विशेषता: ईश्वर के अज्ञात रूपों में मिलने का अद्भुत भाव, प्रेम और करुणा का संदेश
📀 प्रचलन: सभी भक्तों में अत्यंत प्रिय, ध्यान एवं प्रार्थना के लिए उपयुक्त

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

प्रेम प्रभु का बरस रहा है,
पीले अमृत प्यासे,
सातों तीरथ तेरे अंदर,
बाहर किसे तलाशे ...
कण-कण में हरि,
क्षण-क्षण में हरि,
मुस्कानों में, असुअन में हरि,
मन की आँखें तूने खोली,
तो ही दर्शन पाएगा...
पता नहीं किस रूप में आकर,
नारायण मिल जाएगा
पता नहीं किस रूप में आकर,
नारायण मिल जाएगा...

॥ अंतरा १ – नियति और कर्म का सिद्धांत ॥

नियति भेद नहीं करती,
जो लेती है वो देती है,
जो बोएगा वो काटेगा,
ये जग कर्मों की खेती है।
यदि कर्म तेरे पावन हैं,
सभी डूबेगी नहीं तेरी नाव कभी,
तेरी बाँह पकड़ने को,
वो भेष बदल के आएगा...
पता नहीं किस रूप में आकर,
नारायण मिल जाएगा
पता नहीं किस रूप में आकर,
नारायण मिल जाएगा

॥ अंतरा २ – नेकी, फूल, दीप, साथी का भाव ॥

नेकी व्यर्थ नहीं जाती,
हरि लेखा-जोखा रखते हैं,
औरों को फूल दिए जिसने,
उसके भी हाथ महकते हैं।
कोई दीप मिले तो बाती बन,
तू भी तो किसी का साथी बन,
मन को मानसरोवर कर ले,
तो ही मोती पाएगा...
पता नहीं किस रूप में आकर,
नारायण मिल जाएगा
पता नहीं किस रूप में आकर,
नारायण मिल जाएगा...

॥ अंतरा ३ – श्रद्धा की परीक्षा, माली का विश्वास ॥

कान लगा के बातें सुन ले,
सूखे हुए दरख़्तों की,
लेता है भगवान परीक्षा,
सबसे प्यारे भक्तों की।
एक प्रश्न है गहरा,
जिसकी हरि को थाह लगानी है,
तेरी श्रद्धा सोना है या,
बस सोने का पानी है...
जो फूल धरे हर डाली पर,
विश्वास तो रख उस माली पर,
तेरे भाग में पत्थर है तो,
पत्थर भी खिल जाएगा...
पता नहीं किस रूप में आकर,
नारायण मिल जाएगा
पता नहीं किस रूप में आकर,
नारायण मिल जाएगा...

✍️ रचनाकार :- लोक परम्परा / अज्ञात

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह अत्यंत सारगर्भित भजन नारायण (ईश्वर) के अप्रत्याशित रूपों में मिलने की बात करता है। “पता नहीं किस रूप में आकर, नारायण मिल जाएगा” – भक्त कहता है कि हम नहीं जानते कि भगवान किस रूप में हमसे मिलने आएंगे। वे किसी गरीब, किसी दुखी, किसी मित्र या किसी अजनबी के रूप में आ सकते हैं।

“प्रेम प्रभु का बरस रहा है, पीले अमृत प्यासे” – ईश्वर का प्रेम अमृत की तरह बरस रहा है। सातों तीर्थ हमारे अंदर ही हैं, बाहर किसे ढूंढें? कण-कण में हरि, क्षण-क्षण में हरि – हर जगह, हर पल वे विद्यमान हैं। मन की आँखें खोलने पर ही दर्शन मिलते हैं।

दूसरे अंतरे में कर्म का सिद्धांत – नियति भेदभाव नहीं करती, जो बोएगा वही काटेगा। यदि कर्म पवन हैं तो नाव नहीं डूबेगी, और प्रभु स्वयं भेष बदलकर बाँह पकड़ने आएंगे।

तीसरे अंतरे में – नेकी व्यर्थ नहीं जाती, हरि हर कर्म का लेखा रखते हैं। दूसरों को फूल देने वाले के हाथ महकते हैं। दीप मिले तो बाती बनो, किसी के साथी बनो। मन को मानसरोवर (पवित्र सरोवर) बना लो तो मोती पाओगे।

चौथे अंतरे में – सूखे पेड़ों की बात सुनो, भगवान अपने प्यारे भक्तों की परीक्षा लेते हैं। सवाल है – तुम्हारी श्रद्धा सच्चा सोना है या केवल सोने का पानी? यदि तुम विश्वास रखते हो तो पत्थर भी खिल जाएगा।

यह भजन सिखाता है कि ईश्वर हर कण में है, हर क्षण में है, और वह किसी भी रूप में हमसे मिलने आ सकता है। हमें बस विश्वास, सच्ची श्रद्धा और अच्छे कर्मों की आवश्यकता है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

कण-कण में हरि, क्षण-क्षण में हरि: यह पंक्ति अद्वैत वेदांत के सिद्धांत को सहज भाषा में प्रस्तुत करती है – ईश्वर सर्वव्यापी है, हर जगह और हर पल विद्यमान है।

कर्म सिद्धांत: “जो बोएगा वो काटेगा, ये जग कर्मों की खेती है” – यह गीता के कर्म सिद्धांत की सरल व्याख्या है।

श्रद्धा की परीक्षा: “तेरी श्रद्धा सोना है या बस सोने का पानी है” – यह हमारी आस्था की गहराई को परखने वाला प्रश्न है।

💖 आस्था और समर्पण का संगम

🎯 संदेश

नारायण किसी भी रूप में आ सकते हैं – किसी जरूरतमंद, किसी मित्र, किसी अजनबी या किसी संकट के रूप में। हमें हर रूप में उनका स्वागत करने के लिए तैयार रहना चाहिए। सच्ची श्रद्धा और अच्छे कर्म ही हमें उनसे मिलवा सकते हैं।

✨ आस्था का प्रतीक

यह भजन हर उस भक्त के लिए प्रेरणा है जो ईश्वर को एक निश्चित रूप में ढूंढ रहा है। यह बताता है कि ईश्वर हर रूप में है, और सच्ची भक्ति से वह किसी भी रूप में प्रकट हो सकता है।

🙏 ॐ नमो नारायणाय ।। पता नहीं किस रूप में आकर, नारायण मिल जाएगा ।।

॥ इति नारायण भजनम् ॥
॥ कण-कण में हरि, क्षण-क्षण में हरि – मन की आँखें खोलो तो ही दर्शन पाओगे ॥
श्रेणियां: hari bhajan

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

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