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Punjabi Devi Bhajan

लागी रे लगन ओं माँ एक तेरे नाम की भजन लिरिक्स (Lagi Re Lagan Wo Maa Aik Tere Naam Ki Lyrics in Hindi ) - Mata Bhajan Devi Bhajan - Bhaktilok

60 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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माँ का असीम प्रेम: भक्ति का गूंजता स्वर

इस भजन में माँ के प्रति अटूट प्रेम और आस्था की गूंज सुनिए, जो हमें अद्वितीय शांति प्रदान करती है।

लागी रे लगन ओं माँ एक तेरे नाम की भजन लिरिक्स (Lagi Re Lagan Wo Maa Aik Tere Naam Ki Lyrics in Hindi ) -लागी रे लगन ओं माँ एक तेरे नाम कीएक तेरे नाम की माँ एक तेरे नाम कीभवसागर में भटकी भटकी थकी जिव आत्मा ज्ञान का दीप जला दो मिले परमात्मा ॥ हे माँ!.. पायी रे शरण तेरी कृपा श्री राम की लागी रे लगन ओं माँ  एक तेरे नाम की दुर्गा देवी स्तुति लिरिक्स (Durga Stuti in Sanskrit Lyrics Sanskrit) - Maa Durga Stuti - जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी (Jai Ambe Gauri Maiya Jai Shyama Gauri) - Durga Maa Aarti - गीत तेरा गाये बिना माँ भक्ति नही जागती दिल में बसाये बिना शक्ति नही जागती ॥ हे माँ!.. भगवती कहू के अम्बा जुदाई तेरे नाम की लागी रे लगन ओं माँ  एक तेरे नाम की मन सारा मेल धोकर निर्मल मन कीजिये निर्मल बनाकर मन को सद्बुद्धि दीजिये ॥ हे माँ!.. अब न सताये हे माँ चिन्ता धन धान्य कीलागी रे लगन ओं माँ  एक तेरे नाम की एक तेरे दर्शन खातिर एक तेरे प्यार मेंढूँढते फिरे हम तुझको सारे संसार में॥ हे माँ!.. तुझे नहीं पाया तो यह दुनियाँ किस काम कीलागी रे लगन ओं माँ  एक तेरे नाम की ले चल हमें तू हे माँ जहाँ तेरा वास होसब कुछ दिखाई दे माँ इतना प्रकाश हो॥ हे माँ!.. अन्तिम अभिलाषा है माँ पूर्ण विराम कीलागी रे लगन ओं माँ  एक तेरे नाम की समझ नहीं आती हे माँ कहाँ तेरा वास हैजिससे भी पूँछूँ हे माँ करे परिहास है॥ हे माँ!.. अब तो है आशा केवल शान्तिकुञ्ज धाम कीलागी रे लगन ओं माँ  एक तेरे नाम की 

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन 'लागी रे लगन ओं माँ एक तेरे नाम की' में माँ के प्रति गहरी भक्ति और प्रेम की भावना का अभिव्यक्ति किया गया है। शुरुआत में भजनकार कहते हैं कि वे ज्ञान का दीप जलाना चाहते हैं ताकि वे परमात्मा से मिल सकें। यहाँ 'भवसागर में भटकी भटकी थकी जिव आत्मा' का संदर्भ हमें जीवन की कठिनाइयों और संघर्षों की ओर ले जाता है। भक्ति की एक ऐसी यात्रा जिसमें मां के नाम की महिमा गाई जाती है। मां की कृपा से ही श्रीराम का आश्रय प्राप्त होता है। यह दर्शाता है कि जब हम अपनी आत्मा को मां के चरणों में समर्पित करते हैं, तो हमें सच्चा मार्गदर्शन और शांति मिलती है। भजन में माँ की भक्ति को महत्वपूर्ण बताया गया है, क्योंकि 'गीत तेरा गाये बिना माँ भक्ति नही जागती' से पता चलता है कि माँ के नाम से जुड़ी भक्ति की शक्ति हमारे मन को निर्मल बनाती है।

भावार्थ के अनुसार, 'अब न सताये हे माँ चिन्ता धन धान्य की' से भक्त अपनी समस्याओं को माँ के समक्ष रखते हैं, यह दर्शाते हुए कि उन्होंने आर्थिक तथा जीवन की अन्य चिंताओं को माँ के ऊपर पूर्णतया छोड़ दिया है। तभी भक्ति शक्ति की वास्तविकता की समझ के लिए अनिवार्य है। भजन में, भक्त अपनी पहचान और अस्तित्व को माँ से जोड़ते हुए कहते हैं कि 'तुझे नहीं पाया तो यह दुनियाँ किस काम की', जिससे यह स्पष्ट होता है कि भक्ति का उच्चतम उद्देश्य माँ का साक्षात्कार करना है। यह बात हृदय की गहराइयों में बैठती है, जहां भक्त का प्रेम और समर्पण के स्तर को दर्शाया गया है। उनके दृष्टिकोण से संसार की सम्पूर्णता माँ के अलावा अनुपम और अर्थहीन लगती है। अंतिम अभिलाषा की ओर इशारा करते हुए, भक्त माँ के चरणों में अंतिम शांति की कामना करते हैं।

इस भजन में भक्ति मार्ग का उल्लेख स्पष्ट है। भक्त माँ को 'ऐसी स्थिति में, हमें ले चल' कहते हैं, जहां शांति है। इसमें भक्ति और शरणागति की भावना झलकती है। भक्त का भाव यह है कि मां के बिना इस भौतिक संसार का कोई मूल्य नहीं है। भक्ति के मार्ग में मन का शुद्धिकरण और सही विचार धारणा पर जोर दिया गया है। मां का नाम लेने से ही आत्मा को शांति, सुरक्षा और ज्ञान की प्राप्ति होती है। अनुष्ठान और मंत्रों की इस पारंपरिक दृष्टि में यह भजन हमें भक्ति के गहन अनुभव की ओर ले जाता है। सम्पूर्णता और सत्य से भरे इस भव्य मार्ग को समझते हुए मां के प्रति अटूट विश्वास का होना अनिवार्य है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन माँ दुर्गा की आराधना का एक आदर्श उदाहरण है। भारतीय पौराणिक कथाओं में माँ दुर्गा को शक्ति, साहस और संवेदना का प्रतीक माना गया है। उनकी आराधना से भक्तों को असंख्य कठिनाइयों से लड़ने की शक्ति प्राप्त होती है। माँ दुर्गा के विभिन्न रूपों को पहचाना गया है, जिसमें अम्बा, जगदंबा, और श्यामा शामिल हैं, जो भक्ति के विशेष आसनों का प्रतिनिधित्व करते हैं। रामायण और उपनिषदों में भी माँ की महिमा का उल्लेख किया गया है। इस भजन का पाठ करने से भक्त भक्ति, शांति और मानसिक संतुलन को प्राप्त करते हैं।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस भजन का नियमित जाप करने से मानसिक शांति, आंतरिक सुख और आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ती है। माँ के नाम का उच्चारण भक्त की आत्मा को शक्ति और संजीवनी प्रदान करता है, जिससे जीवन में कठिनाइयाँ कम होती हैं। इसके अतिरिक्त, साधक को ध्यान के माध्यम से आत्मा की स्थिति को समझने एवं मानसिक स्वास्थ्य में सुधार प्राप्त होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप सुबह सूर्योदय के समय या सायंकाल में करना उत्तम है। साधक को एक शुद्ध स्थिति में बैठकर, धूप और दीया जलाकर पूजा प्रारंभ करनी चाहिए। भजन गाते समय मन को एकाग्र करते हुए माँ के प्रति प्रेम और समर्पण का भाव रखकर भजन का सामर्थ्य बढ़ाया जा सकता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यह भजन किस देवी को समर्पित है?

यह भजन माँ दुर्गा, जिन्हें शक्ति और साहस का प्रतीक माना जाता है, को समर्पित है। यह माँ से प्रार्थना करने का एक सुंदर तरीका है।

भजन का मुख्य संदेश क्या है?

भजन का मुख्य संदेश है कि माँ के नाम के उच्चारण से हमारे दुःख और चिंता दूर हो सकते हैं, और हमें शांति और सुरक्षा प्राप्त होती है।

क्या इस भजन का पाठ करते समय कोई विशेष ध्यान रखना चाहिए?

भजन का पाठ करते समय ध्यान रखें कि आपका मन शुद्ध हो और आप माँ के प्रति सच्ची भक्ति से भरे हों। साधना के समय शांति और एकाग्रता महत्वपूर्ण हैं।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 24 Aug 2026

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