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मैंने सारे सहारे छोड़ दिए बस तेरा सहारा काफी है लिरिक्स भजन (Maine Sare Sahare Chhod Diye Lyrics in HIndi ) - देवी चित्रलेखा जी Shyam Bahjan - Bhaktilok

71 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्री देवी का आश्रय: सम्पूर्ण श्रद्धा का भजन

इस भजन में सच्चे भक्त की भक्ति और प्रेम की गहराई के भाव व्यक्त होते हैं, इसे जरूर गाइए।

मैंने सारे सहारे छोड़ दिए बस तेरा सहारा काफी है मुझे चाह नहीं दुनिया भर की बस तेरा नज़ारा काफी है मैंने सारे सहारे छोड़ दिए बस तेरा सहारा काफ़ी है। तेरी चाहत में जग छूट गया पर तू मुझसे क्यों रूठ गया मैं डूब रहा भव सागर में मैं डूब रहा भव सागर में बस आना तुम्हारा बाकी है मैंने सारे सहारे छोड़ दिए बस तेरा सहारा काफ़ी है। मेरे मोहन तेरा मुस्कुराना लिरिक्स (Mere Mohan Tera Muskurana Lyrics ) - Bhaktilok हरि नाम की माला जप ले लिरिक्स भजन ( Hari Naam Ki Mala Jap Le Lyrics in Hindi ) - Hari Bhajan Shyam Bhajan - Bhaktilok मैंने जबसे तुम्हारा नाम लिया इस जग ने बहुत इल्ज़ाम दिया जब तूने मुझे यूँ थाम लिया बस मेरा गुजारा काफी है मैंने सारे सहारे छोड़ दिए बस तेरा सहारा काफ़ी है। मैंने तेरे लिए ही जोग लिया और छोड़ जगत का भोग दिया रो-रो के बुलाना काम मेरा रो-रो के बुलाना काम मेरा बस आना तुम्हारा बाकी है मैंने सारे सहारे छोड़ दिए बस तेरा सहारा काफ़ी है। मैंने सारे सहारे छोड़ दिए बस तेरा सहारा काफी है मुझे चाह नहीं दुनिया भर की बस तेरा नजारा काफी है मैंने सारे सहारे छोड़ दिए बस तेरा सहारा काफ़ी है।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन 'मैंने सारे सहारे छोड़ दिए बस तेरा सहारा काफी है' में भक्त की निष्ठा और उसकी सच्ची भक्ति का गहरा संदेश समाहित है। यह भजन स्वयं को सभी बाह्य आकांक्षाओं और संबंधों से काटकर केवल देवी के सहारे को समर्पित करने की भावनाओं को व्यक्त करता है। "मुझे चाह नहीं दुनिया भर की बस तेरा नज़ारा काफी है" पंक्ति दिखाती है कि भक्त का ध्यान पूरी तरह से देवी की ओर केन्द्रित हो गया है। वह संसार की टेढ़ी-मेढ़ी राहों से संतुष्ट नहीं है, क्योंकि उसकी आत्मा का शांति और सहारा केवल देवी में है। इस प्रकार, यह भजन भक्त की भक्ति का सजीव प्रतीक है, जो शक्ति और सहारे की खोज में हर और से निराश होकर केवल देवी को अपने जीवन का आधार मानता है।

भावार्थ की दृष्टि से, इस भजन में भक्त की आत्मिक यातना और प्रेम का अद्भुत स्वरूप प्रकट होता है। "तेरी चाहत में जग छूट गया" इस पंक्ति से पता चलता है कि देवी की अदृश्य प्रेम की छाया में, यह संसार ही उसकी दृष्टि से ओझल हो गया है। भक्त, संसार की अशांति और विकर्षण से दूर जाकर भाव सागर में गोताखोरी करते हुए केवल देवी के पास आने की याचना करता है। इस गहरे भावनात्मक कनेक्शन में, भक्त अपने हृदय के सबसे गहरे स्थान से देवी को आमंत्रित करता है। यह अभिव्यक्ति एक प्रेमी की तरह होती है जो अपने प्रिय के बिना अधूरा महसूस करता है, और इस प्यार में डूबते हुए, वह दुनिया से निराश हो गया है।

भक्ति मार्ग की दृष्टि से, यह भजन एक गूढ़ सन्देश देता है कि सच्ची भक्ति में किसी भी प्रकार की शर्त नहीं होती। भक्त ने सभी सांसारिक सहारे छोड़ दिए हैं और अब वह केवल देवी के साक्षात्कार की प्रतीक्षा कर रहा है, जैसे कि वह अपनी हृदय तल से कह रहा है कि "तू ही मेरा सब कुछ है।" यह ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का परिचायक है। भक्ति की यह गहराई बताती है कि भक्ति केवल प्रार्थना व पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अनंत प्रेम और विश्वास का संबंध है। संत और भक्तों ने हमेशा ऐसे ही प्रेम को सौम्यता से स्वीकार किया है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन की महत्वपूर्णता न केवल इसके मर्म में है, बल्कि यह विभिन्न पुराणों और ग्रंथों के संदर्भ में भी गूंजती है। भक्ति परंपरा में देवी-भक्ति को अत्यधिक महत्व दिया गया है, जैसा कि भगवद गीता में कहा गया है कि जब भक्त अपने हृदय से समर्पण करता है, तो उसे ईश्वर का आशीर्वाद मिलता है। देवी दुर्गा, महाकाली और अन्य देवी-देवताओं की पूजा में यह भजन बहुत से भक्तों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता है। ऐसे भजन भक्तों की साधना का हिस्सा बनते हैं और उन्हें आंतरिक शांति एवं शक्ति प्रदान करते हैं।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, तनाव का निवारण और आध्यात्मिक उन्नति होती है। भक्त जब इस भजन का प्रतिदिन गान करते हैं, तो उन्हें मानसिक संतुलन मिलता है और आत्मविश्वास बढ़ता है। इसके साथ ही, भावनात्मक स्थिति में स्थिरता भी प्राप्त होती है, जिससे व्यक्ति अपने जीवन की चुनौतियों का सामना बेहतर ढंग से कर सकता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का उच्चारण सुबह के समय या संध्याकाल में करना सबसे उचित है। भजन गाते समय एक शुद्ध वातावरण में बैठें, जहां दीया जलाना और फल या फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। भक्त को शांत और ध्यानमग्न स्थिति में रहना चाहिए, जिससे वह देवी के प्रति अपनी भक्ति और प्रेम का उच्चारण कर सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन को कब गाना चाहिए?

इस भजन को प्रात:काल या संध्या के समय गाना चाहिए। ये समय देवी की कृपा पाने के लिए श्रेष्ठ माने जाते हैं।

क्या यह भजन सभी देवीों के लिए है?

यह भजन विशेष रूप से देवी शक्ति की उपासना के लिए है, और इसे सभी देवी भक्त गा सकते हैं।

इस भजन के जाप से क्या लाभ होता है?

इस भजन के जाप से मानसिक शांति, आध्यात्मिक प्रगति, और तनाव से मुक्ति मिलती है। यह संपूर्ण भक्ति की भावना को प्रकट करता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 03 Sep 2026

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