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शिव रुद्राष्टकम लिरिक्स ( Shiv Rudrashtakam Lyrics in Hindi ) - Jeetu Sharma Shiv Rudrastakam - Bhaktilok

57 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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शिव रुद्राष्टकम: शिव की दिव्य आराधना

भगवान शिव की महिमा का गान, रुद्राष्टकं भक्त के हृदय को शांति और सुख प्रदान करेगा।

नमामीशमीशान निर्वाणरूपंविभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहंचिदाकाशमाकाशवासं भजेहम्निराकारमोङ्करमूलं तुरीयंगिराज्ञानगोतीतमीशं गिरीशम् करालं महाकालकालं कृपालंगुणागारसंसारपारं नतोहम्मन मेरा मंदिर शिव मेरी पूजा तुषाराद्रिसंकाशगौरं गभिरंमनोभूतकोटिप्रभाश्री शरीरम् स्फुरन्मौलिकल्लोलिनी चारुगङ्गालसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गाचलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालंप्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालंप्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामिप्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशंअखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशं त्र्यःशूलनिर्मूलनं शूलपाणिंभजेहं भवानीपतिं भावगम्यम्कलातीतकल्याण कल्पान्तकारीसदा सज्जनानन्ददाता पुरारी चिदानन्दसंदोह मोहापहारीप्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारीन यावद् उमानाथपादारविन्दंभजन्तीह लोके परे वा नराणाम् न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशंप्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासंन जानामि योगं जपं नैव पूजांनतोहं सदा सर्वदा शम्भुतुभ्यम् जराजन्मदुःखौघ तातप्यमानंप्रभो पाहि आपन्नमामीश शंभो

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

शिव रुद्राष्टकम का मुख्य विषय भगवान शिव की दिव्यता और अनंतता को प्रस्तुत करना है। इसमें 'नमामीशमीशान निर्वाणरूपं' के द्वारा शिव के निर्वाण स्वरूप की महिमा का वर्णन किया गया है। शिव को ब्रह्मवेदस्वरूप, निर्गुण, और निर्विकल्प कहा गया है, जो उनके असीमित और अज्ञेय स्वरूप को दर्शाता है। ‘कृपालं गुणागार’ के शब्दों में उनकी करुणा और दया का वर्णन है, जो संसार के जीवों के प्रति उनकी उदारता को संकेत करता है। यह भजन श्रद्धालुओं को शिव की भक्ति में लीन होने और उनके दिव्य गुणों का स्मरण करने के लिए प्रेरित करता है। भगवान शिव का वर्णन विभिन्न रूपों में किया गया है - वे कराल, महाकाल हैं, जिनका नाम सुनकर ही भय दूर होता है। साथ ही, उन्हें 'प्रशांतानन' और 'दयाल' के रूप में दर्शाया गया है, जो उनकी अंतर्क्रिया को दर्शाता है।

भजन में 'मृगाधीशचर्माम्बरं' जैसे पदों के द्वारा शिव की उपासना का उच्चतम भाव प्रस्तुत किया गया है। यहाँ, भक्त शिव को उनके विविध स्वरूपों में पहचानता है, उन्हें सर्वव्यापी, कालातीत और शक्तिशाली के रूप में ग्रहण करता है। भावार्थ में यह वर्णित है कि जब भी भक्त मन से शिव का स्मरण और ध्यान करते हैं, उनका सभी प्रकार का दुख और तनाव समाप्त हो जाता है। 'प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी' वाक्यांश में प्रार्थना की गई है कि भगवान शिव अपनी कृपा से भक्ति का आशीर्वाद दें और भक्त को मोहा हुआ संसार से मुक्ति प्रदान करें। यह एक उदात्त भावना है, जो भक्त की दिव्य संबंध की खोज को दर्शाता है।

शिव रुद्राष्टकम का एक गूढ़ और सांस्कृतिक महत्व है जो भक्ति मार्ग के दर्शन को प्रस्तुत करता है। शिव को 'सर्वनाथम्' के रूप में देखा जाता है जो सभी भूतों के संरक्षक हैं। यह भजन भक्तों को निर्देशित करता है कि वे शिव का स्मरण करें, जो उन्हें मानसिक और आध्यात्मिक शांति प्रदान करेगा। इसमें तत्वज्ञान की झलक भी मिलती है, जहां भगवान शिव को निर्गुण और सगुण दोनों रूपों में स्वीकार किया गया है। इससे भक्तों को संपूर्णता और अखंडता का अनुभव होता है। यह भक्ति का एक महत्वपूर्ण मानक बन जाता है कि भक्त जप द्वारा शिव की उपासना करते हैं और मानसिक शांति अर्जित करते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

भगवान शिव की पूजन विधि को रुद्राष्टक के माध्यम से समझाया गया है, जो पुराणों में भी उल्लेखित है। इस भजन में भगवान शिव का दिव्य रूप, उनके अनेक नाम, और उनका संसार में महत्व दर्शाया गया है। यह भजन भक्तों को एकजुटता और भक्ति की प्रेरणा देने के लिए प्रसिद्ध है। शिव की महिमा का वर्णन 'महाभारत' और 'रामायण' में मिलता है, जहां वे देवताओं के देवता माने जाते हैं। हर भक्त अपनी भक्ति के अनुरूप शिव को अपने हृदय में स्थान देता है, जिसके कारण इस भजन का अत्यधिक महत्व है।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। इस भजन का नियमित जप एवं ध्यान करने से अनेक मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक लाभ होते हैं। भक्तों को मानसिक शांति, भयमुक्ति और जीवन में सकारात्मकता की अनुभूति होती है। यह भजन हृदय को संतुलित करता है और आत्मसंयम की ओर प्रवृत्त करता है, जिससे साधक की आध्यात्मिक यात्रा में गति मिलती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

शिव रुद्राष्टकम का पाठ सुबह या संध्या के समय किया जाना चाहिए। दीये का प्रकाश जलाकर और पुष्प अर्पित कर शिव की पूजा करना शुभ होता है। बैठने की स्थिति स्पष्ट एवं शांत होनी चाहिए, और मन को अकेले में स्थिर रखते हुए भगवान शिव के दिव्य गुणों का ध्यान करना चाहिए। इस साधना से साधक को आंतरिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

शिव रुद्राष्टकम का क्या महत्व है?

इस भजन का महत्व शिव की अनंतता और शक्ति के गहन अनुभव में है, जो भक्तों को मानसिक और आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है।

शिव रुद्राष्टकम का पाठ कब करना चाहिए?

इसका पाठ सुबह या संध्या के समय किया जाता है, जब मन शांति में हो, ताकि शिव की कृपा प्राप्त हो सके।

क्या शिव रुद्राष्टकम का पाठ करने से भक्ति में वृद्धि होती है?

जी हां, इस भजन के नियमित पाठ से भक्ति में वृद्धि होती है और भक्त भगवान शिव के प्रति अधिक समर्पित हो जाता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 03 Sep 2026

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