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Krishna Bhajan

ब्रज रस भजन लिरिक्स – बी प्राक | हरि रस बैठक (पूरा हिंदी भजन) | Braj Ras Bhajan B Praak Hari Ras Baithak Lyrics

1,092 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah | 2 मिनट पठन समय
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🙏 ब्रज रस भजन – राधे-राधे गोविन्द राधे

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

(बी प्राक – हरि रस बैठक) – पूरा हिंदी भजन

🎵 राधे-राधे गोविन्द राधे – श्याम सुन्दर – वृन्दावन धाम – प्रेम भक्ति का रस

📝 भजन विवरण

🎤 गायक/रचनाकार: बी प्राक (B Praak) – हरि रस बैठक
🏷️ श्रेणी: ब्रज रस भजन / राधा-कृष्ण भक्ति
🎶 भाव: प्रेम, समर्पण, रास, आनंद
📀 विशेषता: राधा-कृष्ण के युगल स्वरूप, वृन्दावन धाम, बरसाना, और पूर्ण समर्पण का अद्भुत संगम

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

राधे-राधे गोविन्द राधे, राधे।
राधे-राधे गोविन्द राधे, राधे।
राधे-राधे गोविन्द राधे, राधे।
राधे-राधे गोविन्द राधे, राधे॥
सा ग म प, मा प नि ध नि प,
मा प नि ध नि म, आ...
नि सा ग म प, मा प नि ध नि प,
मा प नि ध नि म, आ...

मैं तेरे, सिर सिरहाना बन जाऊँ,
तू राधा, मैं कान्हा बन जाऊँ।
तू मेरी दीवानी बन जाए,
मैं तेरा दीवाना बन जाऊँ॥

हो, रखा ही क्या है तेरे-मेरे शहरों में,
वृन्दावन चल सखी कृष्ण के पैरों में।
वो ही नदी, वो ही दरिया,
वो स्वर्गों का ज़रिया, वो इसकी ही माया है।
रातों के तारे वारे सारे, ये पानी के किनारे,
वो चाँद लेके आया है॥

तेरी भूख में खाना बन जाऊँ,
तू शमा, मैं परवाना बन जाऊँ।
तू मेरी दीवानी बन जाए,
मैं तेरा दीवाना बन जाऊँ॥

राधे-राधे गोविन्द राधे, राधे।
राधे-राधे गोविन्द राधे, राधे।
राधे-राधे गोविन्द राधे, राधे।
राधे-राधे गोविन्द राधे, राधे॥

जय-जय राधा रमण हरि बोल,
प्यारो राधा रमण हरि बोल।
जय-जय राधा, राधा,
जय-जय राधा, राधा।
जय-जय राधा रमण हरि बोल,
प्यारो राधा रमण हरि बोल॥

श्याम-श्याम सुन्दर, राधे,
श्याम-श्याम सुन्दर, राधे,
श्यामा-श्याम सुन्दर राधे॥
श्याम सुन्दर, श्याम सुन्दर राधे,
श्याम-श्याम सुन्दर, राधे,
श्याम-श्याम सुन्दर, राधे,
श्यामा-श्याम सुन्दर राधे॥

जय-जय राधे, जय-जय श्याम,
जय-जय श्री वृन्दावन धाम।
जय-जय श्री वृन्दावन धाम॥
श्याम-श्याम सुन्दर, राधे,
श्याम-श्याम सुन्दर, राधे,
श्यामा-श्याम सुन्दर राधे॥

श्यामा प्यारी, कुंज बिहारी,
जय-जय श्री हरिदास दुलारी।
श्यामा प्यारी, कुंज बिहारी,
जय-जय श्री हरिदास दुलारी॥

मन भूल मत जइयो,
राधा रानी के चरण,
राधा रानी के चरण,
महारानी के चरण।
मन भूल मत जइयो,
राधा रानी के चरण॥
राधे-राधे गोविन्द, गोविन्द राधे,
राधे-राधे गोविन्द, गोविन्द राधे।
मन भूल मत जइयो,
राधा रानी के चरण॥

यशोदा नंदन लाल की जय हो।
बाँके बिहारी लाल की जय हो।
राधा बल्लभ लाल की जय हो।
राधा रमण जू लाल की जय हो।
वृषभानु की किशोरी की जय हो।
वृषभानु के जमाई की जय हो।
वृन्दावन धाम की जय हो।
बरसाना धाम की जय हो॥

श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,
हे नाथ नारायण वासुदेवा॥
तुझसे ही धरती है,
तुझसे ही अम्बर है।
तेरे इस रूप से ही
रोशन संसार है।
मुझको भी अपना बना ले,
अपने नैनों में बसा ले,
रंग-रंग जाऊँ तेरे रंग में,
अब कोई न मेरे संग में।
मेरा हाथ थाम ले, तू संभाल ले,
ओ जग के पालनहार॥
श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,
हे नाथ नारायण वासुदेवा॥

हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे-हरे,
हरे राम, हरे राम, राम राम हरे-हरे।
हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे-हरे,
हरे राम, हरे राम, राम राम हरे-हरे॥

🎵 गायक/रचनाकार : बी प्राक (B Praak) – हरि रस बैठक

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह ब्रज रस में रचित अत्यंत भावपूर्ण भजन है, जिसे बी प्राक ने हरि रस बैठक के अंतर्गत प्रस्तुत किया है। भजन राधा-कृष्ण के प्रेम, वृन्दावन की दिव्यता और शरणागति के भाव से ओतप्रोत है। “राधे-राधे गोविन्द राधे” के जाप से वातावरण भक्तिमय हो जाता है। संगीत में सरगम (सा ग म प...) का प्रयोग इसे और भी रसमय बनाता है।

पहले अंतरे में भक्त कहता है – “मैं तेरे सिर सिरहाना बन जाऊँ, तू राधा, मैं कान्हा बन जाऊँ” – वह कृष्ण के सिरहाने (तकिया) के रूप में सेवा करना चाहता है, और राधा-कृष्ण के युगल रूप में लीन हो जाना चाहता है। वह कृष्ण का दीवाना बनना चाहता है।

दूसरे अंतरे में – “वृन्दावन चल सखी कृष्ण के पैरों में” – शहरों की माया छोड़कर वृन्दावन जाने का आग्रह। वही नदी, दरिया, स्वर्गों का ज़रिया – सब वृन्दावन की महिमा है। चाँद भी वहाँ आया है।

तीसरे अंतरे में – “तेरी भूख में खाना बन जाऊँ, तू शमा, मैं परवाना बन जाऊँ” – पूर्ण समर्पण और प्रेम की मशाल का भाव।

भजन के मध्य में राधा-कृष्ण के विभिन्न नामों का जयघोष है – राधा रमण हरि, श्याम सुन्दर, राधा वल्लभ लाल, बाँके बिहारी। वृन्दावन धाम और बरसाना धाम की जय है।

“मन भूल मत जइयो, राधा रानी के चरण” – यह सबसे महत्वपूर्ण संदेश है – मन राधा रानी के चरणों में ही लगा रहे, कहीं और मत भटके।

अंत में श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी, नाथ नारायण वासुदेव का स्मरण और हरे कृष्ण महामंत्र के साथ भजन समाप्त होता है। यह भजन भक्त को राधा-कृष्ण के प्रेम रस में पूर्ण रूप से डुबो देता है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

बी प्राक का हरि रस बैठक: यह भजन बी प्राक के हरि रस बैठक श्रृंखला का हिस्सा है, जहाँ वे पारंपरिक भक्ति को आधुनिक संगीत के साथ प्रस्तुत करते हैं।

राधा चरणों का महत्व: “मन भूल मत जइयो, राधा रानी के चरण” – यह पंक्ति राधा की शरणागति को सर्वोपरि बताती है।

ब्रज के सभी धामों का स्मरण: वृन्दावन, बरसाना, राधा रानी के चरण, सभी का वर्णन कर यह भजन ब्रज भक्ति की पूर्णता को दर्शाता है।

💖 राधा-कृष्ण प्रेम रस का संगम

🎯 संदेश

राधा-कृष्ण का स्मरण, उनके चरणों में मन लगाना, और वृन्दावन धाम की महिमा ही सच्ची भक्ति है। यह भजन हमें प्रेम में पूर्ण समर्पण और राधा रानी की शरण में जाने की प्रेरणा देता है।

✨ आस्था का प्रतीक

बी प्राक के इस भजन ने युवा पीढ़ी को राधा-कृष्ण भक्ति से जोड़ा है। “राधे-राधे गोविन्द राधे” का जप सहजता से भक्ति में लीन कर देता है।

🙏 राधे-राधे ।। जय श्री कृष्ण ।। हरे कृष्ण हरे राम ।।

॥ इति बी प्राक – हरि रस बैठक भजनम् ॥
॥ मन भूल मत जइयो, राधा रानी के चरण – राधे-राधे गोविन्द राधे ॥
श्रेणियां: Krishna Bhajan radha bhajan

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 11 Aug 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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