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Krishna Bhajan

मैं राधा वल्लभ की, राधा वल्लभ मेरे (श्री राधा वल्लभ संकीर्तन) लिरिक्स | Main Radha Vallabh Ki Radha Vallabh Mere Shri Radha Vallabh Sankirtan Lyrics

339 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah | 2 मिनट पठन समय
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🙏 मैं राधा वल्लभ की – राधा वल्लभ मेरे

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।

(Main Radha Vallabh Ki – Radha Vallabh Mere) – श्री राधा वल्लभ संकीर्तन

🌸 राधा वल्लभ – कृष्ण का राधा प्रिय स्वरूप | पूर्ण समर्पण और शरणागति का संकीर्तन

📝 भजन विवरण

🏷️ श्रेणी: राधा-कृष्ण भजन / संकीर्तन / शरणागति
🎶 भाव: समर्पण, आत्मीयता, श्रद्धा, निस्वार्थ प्रेम
📍 विशेषता: राधा वल्लभ (कृष्ण) के साथ अपने नित्य संबंध का स्मरण, भटकने के बाद शरणागति
📀 प्रचलन: राधा वल्लभ सम्प्रदाय और राधा-कृष्ण भक्तों में अत्यंत प्रिय संकीर्तन

📜 संकीर्तन लिरिक्स (हिन्दी में)

मैं राधा वल्लभ की
राधा वल्लभ मेरे
मैं राधा वल्लभ की
राधा वल्लभ मेरे
मैं राधा वल्लभ की
राधा वल्लभ मेरे

तुम सदा-सदा से मेरे
राधा वल्लभ मेरे
तुम सदा-सदा से मेरे
राधा वल्लभ मेरे
तुम सदा-सदा से मेरे
राधा वल्लभ मेरे

हम सदा-सदा से तेरे
राधा वल्लभ मेरे
हम सदा-सदा से तेरे
राधा वल्लभ मेरे
हम सदा-सदा से तेरे
राधा वल्लभ मेरे
मैं राधा वल्लभ की
राधा वल्लभ मेरे

हम भटक चुके बहुतेरे
राधा वल्लभ मेरे
हम दुख पाए बहुतेरे
राधा वल्लभ मेरे
हम दुख पाए बहुतेरे
राधा वल्लभ मेरे
मैं राधा वल्लभ की
राधा वल्लभ मेरे

अब रखिए अपने नेरे
राधा वल्लभ मेरे
तुम सदा-सदा से मेरे
राधा वल्लभ मेरे
हम सदा-सदा से तेरे
राधा वल्लभ मेरे
मैं राधा वल्लभ की
राधा वल्लभ मेरे
मैं राधा वल्लभ की
राधा वल्लभ मेरे

जय जय राधावल्लभ श्री हरिवंश
जय जय श्री वृन्दावन श्री वनचंद
जय जय राधावल्लभ श्री हरिवंश
जय जय श्री वृन्दावन श्री वनचंद
जय जय राधावल्लभ श्री हरिवंश
जय जय श्री वृन्दावन श्री वनचंद
जय जय राधावल्लभ श्री हरिवंश
जय जय श्री वृन्दावन श्री वनचंद

मैं राधा वल्लभ की
राधा वल्लभ मेरे
मैं राधा वल्लभ की
राधा वल्लभ मेरे

🎵 रचनाकार : लोक परम्परा / राधा वल्लभ संकीर्तन

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह श्री राधा वल्लभ संकीर्तन अत्यंत सरल किन्तु गहन समर्पण भाव से युक्त है। “मैं राधा वल्लभ की, राधा वल्लभ मेरे” – भक्त कहता है कि मैं राधा वल्लभ (श्रीकृष्ण) का हूँ, और राधा वल्लभ मेरे हैं। यह परस्पर संबंध का स्मरण है – जैसे राधा और कृष्ण अभिन्न हैं, वैसे ही भक्त और प्रभु का संबंध भी नित्य और अटूट है।

“तुम सदा-सदा से मेरे” और “हम सदा-सदा से तेरे” – यह दोहराव भक्त के विश्वास को दृढ़ करता है कि यह संबंध अनादि है, सदा से है और सदा रहेगा। यह भक्ति का अभेद भाव है – जहाँ “मैं तुम्हारा” और “तुम मेरे” का अहसास होता है।

“हम भटक चुके बहुतेरे, हम दुख पाए बहुतेरे” – भक्त स्वीकार करता है कि उसने संसार में बहुत भटकना और दुख सहा है। अब वह थक गया है और राधा वल्लभ की शरण में आता है। “अब रखिए अपने नेरे” – अब हमें अपने पास (समीप) रखिए।

अंत में जयघोष है – “जय जय राधावल्लभ श्री हरिवंश, जय जय श्री वृन्दावन श्री वनचंद” – राधा वल्लभ (कृष्ण) की जय, और श्री वृन्दावन (जहाँ रास-लीला होती है) के वनचंद (चंद्रमा के समान सुंदर) की जय।

यह संकीर्तन सिखाता है कि सच्चा भक्त वह है जो स्वयं को पूर्ण रूप से राधा वल्लभ को समर्पित कर देता है, और यह जानता है कि उसका प्रभु भी सदा उसके साथ है। यह भक्ति में पूर्ण आत्मसमर्पण और विश्वास का गीत है।

🔍 संकीर्तन का विशेष महत्त्व

राधा वल्लभ सम्प्रदाय: यह भजन राधा वल्लभ सम्प्रदाय (हित हरिवंश महाप्रभु द्वारा स्थापित) में अत्यंत महत्वपूर्ण है। “राधा वल्लभ” का अर्थ है राधा के प्रिय – श्रीकृष्ण। इस सम्प्रदाय में राधा को सर्वोपरि माना जाता है और कृष्ण उनके वश में हैं।

“मैं राधा वल्लभ की” – समर्पण का उच्चतम भाव: यह पंक्ति बताती है कि भक्त का सर्वस्व राधा वल्लभ हैं, और वह उनका है। इसमें किसी प्रकार की शर्त या अपेक्षा नहीं, केवल समर्पण है।

भटकने के बाद शरणागति: “हम भटक चुके बहुतेरे” – यह स्वीकारोक्ति बहुत महत्वपूर्ण है। सच्चा भक्त वही है जो अपनी असफलताओं और भटकन को स्वीकार करता है और फिर प्रभु की शरण में आता है।

💖 राधा वल्लभ के प्रति समर्पण

🎯 संदेश

जब भक्त सच्चे मन से कहता है “मैं राधा वल्लभ की”, तो वह अपना अहंकार, अपनी स्वतंत्रता और अपनी सारी चिंताएँ प्रभु को सौंप देता है। राधा वल्लभ उसके सदा अपने रहते हैं, और भक्त सदा उनका।

✨ आस्था का प्रतीक

यह संकीर्तन राधा-कृष्ण भक्ति के गहरे रस में डुबो देता है। “राधा वल्लभ मेरे” के बार-बार दोहराने से भक्त के हृदय में अपनत्व और विश्वास का संचार होता है।

🙏 राधे-राधे ।। जय राधा वल्लभ ।। जय श्री वृन्दावन धाम ।।

॥ इति राधा वल्लभ संकीर्तन सम्पूर्णम् ॥
॥ मैं राधा वल्लभ की, राधा वल्लभ मेरे – तुम सदा-सदा से मेरे, हम सदा-सदा से तेरे ॥
श्रेणियां: Krishna Bhajan radha bhajan

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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