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जय जय नारायण नारायण हरि हरि (Jay Jay Narayan Hari Hari Lyrics in Hindi) - श्री विष्णु वंदना LATA MANGESHKAR - Bhaktilok

81 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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भगवान विष्णु की कृपा: जय जय नारायण

इस भजन से भगवान विष्णु की महिमा का स्तोत्र और भक्तों में भक्ति का संचार होता है।

जय जय नारायण नारायण हरि हरि स्वामी नारायण नारायण हरि हरि तेरी लीला सब से न्यारी न्यारी हरि हरि तेरी महिमा प्रभु है प्यारी प्यारी हरि हरि॥ अलख निरंजन भवभय भंजन जनमन रंजन दाता हमे शरण दे अपने चरण में कर निर्भय जगत्राता तुने लाखों की नईया तारी तारी हरि हरि॥ प्रभु के नाम का पारस जो छूले वो हो जाए सोना दो अक्षर का शब्द हरि है लेकिन बड़ा सलोना उसने संकट टाले भारी भारी हरि हरि॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन की मुख्य थीम भगवान नारायण के प्रति भक्ति और श्रद्धा को दर्शाती है। 'जय जय नारायण नारायण हरि हरि' का उद्घोष भक्तों द्वारा भगवान की महिमा को व्यक्त करने के लिए किया जाता है। इसमें भगवान की लीला, उनके द्वारा भक्तों की संकट से रक्षा करने की क्षमता का बखान किया गया है। यह भजन हमें याद दिलाता है कि जब हम प्रभु के चरणों में शरण लेते हैं, तब वह हमें न केवल भौतिक संकटों से उबारते हैं बल्कि आध्यात्मिक स्तर पर भी हमें सशक्त बनाते हैं। भगवान की महिमा का वर्णन करते हुए यह भजन बताता है कि भगवान की रूप और लीला अनन्त हैं और वह हमेशा अपने भक्तों की रक्षा हेतु तत्पर रहते हैं।

भावार्थ के दृष्टिकोण से यह भजन भक्तों के मन में विश्वास, आशा और भक्ति का संचार करता है। 'अलख निरंजन भवभय भंजन' की पंक्ति से यह अभिप्राय निकलता है कि भगवान की उपासना करने से जीवन की सभी प्रकार की चिंता समाप्त हो जाती है। यह भाव भक्त को यह विश्वास दिलाता है कि जो भक्त अपने हृदय में भगवान को धारण करता है, उसका जीवन आनंदमय बन जाता है। 'कर निर्भय जगत्राता' का आशय है कि भगवान सच्चे मार्गदर्शक हैं, जो अपने भक्तों के संकटों को अपने ऊपर लेते हैं और उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाते हैं।

इस भजन में भक्ति मार्ग की गहराई का भी उल्लेख है। भक्ति एक ऐसा माध्यम है जो हमें भगवान के निकट ले जाता है। इसमें कहा गया है कि भगवान का नाम सुनने या छूने के मात्र से ही भक्त का जीवन धन्य हो जाता है। भगवान के नाम की महिमा का कोई पार नहीं। यह भजन इस बात का संकेत देता है कि भक्ति करते समय हमारे हृदय में निस्वार्थ प्रेम और विश्वास होना चाहिए। भगवान विष्णु का नाम लेते हुए सभी प्रकार की नकारात्मकता का विलोपन संभव है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व गहरा है। भारतीय पुराणों में भगवान विष्णु को जगत के पालनहार के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। विष्णु के ऊपर अनेक पुराणों, जैसे कि भागवत पुराण, में महान शिक्षाएँ दी गई हैं। महाभारत, रामायण आदि ग्रंथों में भगवान विष्णु की लीला का विस्तृत वर्णन मिलता है। ये सभी ग्रंथ हमें भगवान विष्णु की उपासना की महिमा को समझाते हैं और इस भजन के माध्यम से भक्तों में विष्णु की गुणों और शक्तियों की प्रतीति होती है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित जाप करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। भक्तों को जीवन के तनाव और परेशानियों से मुक्ति मिलती है। भगवान के नाम का जप करने से आत्मिक संतोष मिलता है और व्यक्तित्व में सकारात्मकता का संचार होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह या शाम को करना उत्तम माना गया है। भजन के समय एक दीपक जलाना और कुछ मिठाई का भोग लगाना शुभ रहता है। ध्यान रखते हुए एक साफ स्थान पर बैठकर, मन को शांत करके इस भजन का गान करना चाहिए। ध्यान और श्रद्धा से भजन करने से भक्ति की भावना अधिक अनुभव होती है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यह भजन भगवान विष्णु के किस रूप का गुणगान करता है?

यह भजन भगवान विष्णु के महासृष्टिकर्ता और पालनकर्ता रूप का गुणगान करता है, जो भक्तों के सुख-दुख का सदैव ध्यान रखते हैं।

भजन के तहत भक्तों के लिए क्या संदेश है?

इस भजन के माध्यम से भक्तों को यह संदेश दिया गया है कि भगवान की तुलना में कोई अन्य शक्ति नहीं है, और भक्ति करते समय विश्वास और प्रेम का होना आवश्यक है।

इस भजन का उच्चारण करते समय क्या उचित है?

भजन का उच्चारण करते समय मन को पूरी तरह से एकाग्र करना चाहिए और भगवान की उपासना में अपना संपूर्ण समर्पण होना चाहिए, इससे भक्ति में गहराई आएगी।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 23 Aug 2026

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