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शिव शंकर को जिसने पूजा लिरिक्स(Shiv Shankar Ko Jisne Pooja Lyrics in Hindi) - ANURADHA PAUDWAL Shiv Bhajan - Bhaktilok

78 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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शिव आराधना: भक्ति की असीम यात्रा

भक्ति एवं समर्पण का यह गीत शिव के प्रति अटूट श्रद्धा की अभिव्यक्ति है।

शिव शंकर को जिसने पूजा, अंत में मोक्ष पाया। शिव शंकर को जिसने पूजा, भक्ति में जो समाया। डमरू की धुन में गूँजे, भक्ति की वहं धारा। शिव शंकर को जिसने पूजा, वह सच्चा यार हमारा। हर हर महादेव, ओम नमः शिवाय। शिव शंकर को जिसने पूजा, हर मन बुराई को दूर किया। शिव शंकर को जिसने पूजा, टेर में जो उमंग भरी। जागि हर दिल में सच्चे प्रेम की धारा छाई। शिव शंकर को जिसने पूजा, उसने हर दुख में भलाई पाई। हर हर महादेव, ओम नमः शिवाय। शिव शंकर को जिसने पूजा, उसका नाम है सार्तकता। शिव शंकर को जिसने पूजा, उसने अपनी भी हर बात मानी। आओ सब मिलकर करें शिव की आराधना। शिव शंकर को जिसने पूजा, वह सच्चा यार हमारा। हर हर महादेव, ओम नमः शिवाय।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का प्रमुख विषय शिव शंकर की आराधना है, जिसमें यह बताया गया है कि जो व्यक्ति सत्य और भक्ति से शिव की पूजा करता है, वह अंत में मोक्ष प्राप्त करता है। भक्ति का एक गहरा स्वरूप यहाँ प्रकट होता है, जहाँ 'डमरू की धुन' का संदर्भ यह दर्शाता है कि शिव की भक्ति में एक अद्भुत नाद है जो भक्तों के दिलों में गूंजता है। भावार्थ यह है कि शिव की आराधना केवल बाहरी क्रियाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समर्पण और प्रेम से भरपूर एक अनुभव है। साथ ही, भक्ति की इसी धारा से भक्त का हृदय हर बुराई से दूर हो जाता है।

इस भजन में भावनाओं की गहराई के साथ साथ हमें यह भी दिखाया गया है कि सच्चे प्रेम की धारा कैसे जागृत होती है। जब भक्त शिव की भक्ति में लीन होता है, तो उसके दुख-दर्द दूर हो जाते हैं और उसकी जीवनधारा में सकारात्मकता का प्रवाह शुरू हो जाता है। इस प्रकार, शिव की पूजा से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि जीवन में खुशियों का संचार भी होता है। यहां तक कि भक्त का हर भाव और हर शब्द शिव की स्तुति में रूपांतरित हो जाता है, जिससे शिव के प्रति अपरिहार्य प्रेम और श्रद्धा प्रगट होती है।

इस भजन में बिभिन्न धार्मिक और दार्शनिक तत्व मिलते हैं। शिव को आदिजीव यानी सर्वप्रथम जीव माना जाता है, और उनकी पूजा करने से भक्त का आत्मा का बोध जागृत होता है। यह भजन भक्ति मार्ग की महत्ता को भी प्रकट करता है, जहाँ भक्तिपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा दी जाती है। महादेव के प्रति पूर्ण समर्पण से भक्त आत्मज्ञान की ओर बढ़ता है और अंततः मोक्ष प्राप्त कर लेता है। इसलिए, इस भजन में भगवान शिव के प्रति श्रद्धा केवल एक क्रिया नहीं, बल्कि जीवन का एक उद्देश्य बन जाती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

शिव शंकर की पूजा का महत्व दर्शाते हुए, यह भजन पुरानी भारतीय पौराणिक कथाओं और दर्शनशास्त्र से जुड़ा हुआ है। शिव, जिन्हें 'महादेव' कहा जाता है, देवताओं के देवता हैं, और उनका अनुग्रह पाने के लिए सच्चे मन से भक्ति करना आवश्यक है। पुराणों में बताया गया है कि शिव की भक्ति से भक्तों को उनके सारे कष्टों से मुक्ति मिल जाती है, और उन्हें आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है। इस भजन में प्रकटित धार्मिक तत्वों के माध्यम से भक्त अपने जीवन में शांति और सुख की अनुभूति कराता है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। शिव शंकर की भक्ति से मानसिक शांति, आत्मिक बल, और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसका जाप करने से भक्त जीवन की कठिनाइयों का सामना करने के लिए ऊर्जा और साहस प्राप्त करता है। शिव की आराधना से मानसिक तनाव कम होता है और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह के समय, विशेषकर प्रातःकाल, करना शुभ माना जाता है। पूजा स्थल पर एक दीप जलाना और फूलों का अर्पण करना बेहतर होता है। ध्यान रखें कि मन में निर्मलता और विश्वास हो। सही संवेदनाओं के साथ भजन को गाने से शिव की कृपा जल्द ही प्राप्त होती है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का महत्व क्या है?

इस भजन का महत्व यह है कि यह शिव की सच्ची आराधना का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो भक्त को आत्मिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति में मदद करता है।

कौन गाता है 'शिव शंकर को जिसने पूजा' भजन?

यह भजन प्रसिद्ध गायक अनुराधा पौडवाल द्वारा गाया गया है, जिन्होंने इसे भावपूर्ण और भक्तिपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया है।

भजन का सही समय कब है?

इस भजन का पाठ प्रातःकाल किया जाना सबसे प्रभावी होता है, जबकि शिव की पूजा करने से पूरे दिन सकारात्मकता और शांति बनी रहती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 24 Aug 2026

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