श्री हरी अष्टकम (Shri Hari Ashtakam Lyrics in Hindi) - Hari Bhajan Vishnu Mantra - Bhaktilok
श्री हरी अष्टकम (Shri Hari Ashtakam Lyrics in Hindi) - Hari Bhajan Vishnu Mantra -
श्री हरी अष्टकम (Shri Hari Ashtakam Lyrics in Hindi) -
हरिर्हरति पापानि दुष्टचित्तैरपि स्मृत:अनिच्छयाऽपि संस्पृष्टो दहत्येवहि पावक:स गङ्गा स गया सेतु: स काशी स च पुष्करम्जिह्वाग्रे वर्तते यस्य हरिरित्यक्षर द्वयम्वाराणस्यां कुरुक्षेत्रे नैमिशारण्य एव चयत्कृतं तेन येनोक्तं हरिरित्यक्षर द्वयम्पृथिव्यां यानि तीर्थानि पुण्यान्यायतनानि चतानि सर्वाण्यशेषानि हरिरित्यक्षर द्वयम्गवां कोटिसहस्राणि हेमकन्या सहस्रकम्दत्तं स्यात्तेन् येनोक्तं हरिरित्यक्षर द्वयम्ऋग्वेदोऽथ यजुर्वेद: सामवेदोऽप्यथर्वण:अधीतस्तेन येनोक्तं हरिरित्यक्षर द्वयम्अश्वमेधैर्महायज्ञै: नरमेधैस्तथैव चइष्टं स्यात्तेन येनोक्तं हरिरित्यक्षर द्वयम्प्राण प्रयाण पाथेयं संसार व्याधिनाषनम्दु:खात्यन्त परित्राणं हरिरित्यक्षर द्वयम्बद्ध: परिकरस्तेन मोक्षाय गमनं प्रतिसकृदुच्चारितं येन हरिरित्यक्षर द्वयम्हर्यष्टकमिदं पुण्यं प्रातरुत्थाय य: पठेत्आयुष्यं बलमारोग्यं यशो व्रुद्धिं च विदन्तिप्रह्लादेन कृतं स्तोत्रं दु:खसागर शोषणम्य: पठेत्स नरो याति तद्विष्णो: परमं पदम
🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "श्री हरी अष्टकम (Shri Hari Ashtakam Lyrics in Hindi) - Hari Bhajan Vishnu Mantra - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।
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