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Matarani Bhajan

माँ मुझे दरबार बुला ले (Maa mujhe darbaar bula le Lyrics in Hindi) - Matarani Bhajan Sunny Hari - Bhaktilok

65 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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माँ का दरबार: भक्ति का अद्वितीय उपासना

इस भजन में मातृ शक्तियों की महिमा का बखान किया गया है, संभावित साधना के लिए एक संजीवनी है।

माँ मुझे दरबार बुला ले तेरी महिमा सदा गाते हैं हर कोई तेरा प्याला पीता है जग में तेरा नाम बड़ा है कर दे गगन में नर्तन, जग में मिलो, माँ मुझे दरबार बुला ले दुख भरे दिन, सब मेटा ले, सुभग छवि में सीधा ले, माँ मुझे दरबार बुला ले हर घर से सब दूर करते, हर मन से राग द्वेष मिटाते, हर हाय तेरी हर गली में, हर पद में चरण छोड़ती, माँ मुझे दरबार बुला ले 닌 यग्न में तुम बांत दो, हर सांस में तेरा दिहा कर दो, और बस्त्र ना मांगा मैं तुमसे, अपनी सदा आशीष दे, माँ मुझे दरबार बुला ले हर ना हर हर ना, माँ मुझे दरबार बुला ले।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में भक्ति और समर्पण का अद्भुत स्वरूप प्रकट होता है। इसकी प्रारंभिक पंक्तियाँ माँ से दरबार बुलाने की प्रार्थना करती हैं, जो भक्तों के लिए सर्वोच्च स्थान रखता है। यहाँ 'दरबार' का संदर्भ उस दिव्य स्थान से है, जहाँ माता सभी की समस्याओं का समाधान करती हैं। इस संदर्भ में यह बताया गया है कि माँ की महिमा का उच्चारण सदा किया जाना चाहिए, जिससे भक्ति में गहराई आये। जैसे 'तेरी महिमा सदा गाते हैं' की पंक्ति से भक्त की श्रद्धा और विश्वास की अभिव्यक्ति होती है, जिसे हर कोई स्वीकार करता है। भक्ति का यह मार्ग दुखों को सूखाने का संदेश देता है और सुभाग्य की प्राप्ति का आश्वासन देता है।

भावार्थ की दृष्टि से, इस भजन में भक्त की भावना स्पष्ट है। भक्त माँ से न केवल दरबार बुलाने की प्रार्थना करता है, अपितु उसके माध्यम से दुःख और दुखों से मुक्ति की भी कामना करता है। 'हर कोई तेरा प्याला पीता है' का अर्थ है कि जिस प्रकार माता का दान सभी के लिए सुखदाई होता है, उसी प्रकार भक्त भी उसी आनंद को प्राप्त करना चाहता है। यह पंक्ति माँ के असीम प्रेम और दान का प्रतीक है। 'दुख भरे दिन, सब मेटा ले' में भक्त का आत्म समर्पण, मातृ शक्ति के प्रति विश्वास और श्रद्धा प्रकट होती है। यहाँ तक कि भक्त माँ से केवल अकिंचन वस्तुएँ नहीं मांगता, बल्कि रिश्तों में प्रेम और सद्भावना भी चाहाता है।

इस भजन के माध्यम से भक्तिभाव की एक अद्भुत गहराई दिखाई देती है। यह भक्ति मार्ग, जो कि समर्पण और निष्काम प्रेम से भरा होता है, हमें यह सिखाता है कि एक सच्चा भक्त हमेशा अपनी माँ से संपर्क में रहकर उनकी कृपा की कामना करता है। देवी पूजा की परंपरा में, माँ को सर्वशक्तिमान माना गया है। यहाँ 'दुख भरे दिन' का उल्लेख करके यह ध्यान आकर्षित करता है कि जीवन में कठिनाइयाँ सबके साथ होती हैं, परंतु माँ के दरबार में हर दुख का समाधान संभव है। यह भजन हमें याद दिलाता है कि भक्ति का मार्ग आत्मा को शुद्ध करता है और भक्त को एक नई ऊर्जा प्रदान करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन संसारिक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करता है और भक्तों को देवी के दरबार में बुलाकर उनके जीवन में शांति एवं सुख का संचार करता है। हिंदू पौराणिक कथाओं में मातृ शक्ति को सर्वोच्च स्थान दिया गया है, विशेषकर माँ दुर्गा और माँ काली के रूप में। देवी महात्म्य, जो कि मार्कंडेय पुराण में उल्लिखित है, में माँ की महिमा का वर्णन है। यहाँ, भक्त का सीधा संबंध देवी के साथ देखा जाता है, जो कि मध्यस्थता करते हुए सभी भक्तों के दुःख दूर करती हैं।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, खुशी, और आध्यात्मिक उन्नति का अनुभव होता है। भावनात्मक रूप से, यह भक्त को तनाव से मुक्त करता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। शारीरिक रूप से यह रोगों से मुक्ति का आश्वासन देता है। आध्यात्मिक रूप से, यह माँ की कृपा एवं आशीर्वाद की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह जल्दी करना शुभ होता है, क्योंकि दिन की सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है। जागरण के समय अपने आस-पास साफ-सफाई रखकर दीया जलाएं और पुष्प अर्पित करें। ध्यान करते समय मन को संयमित रखें और भक्ति भाव से माँ का स्मरण करें। सही ध्यान और साधना से भजन का अर्थ और भी गहरा हो जाता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या इस भजन का पाठ करने का कोई विशेष समय है?

हाँ, इस भजन का पाठ प्रात: समय में करना सबसे शुभ होता है। इससे दिन की सकारात्मक ऊर्जा बँटती है।

इस भजन का क्या मुख्य उद्देश्य है?

इस भजन का मुख्य उद्देश्य माँ से सहायता और आशीर्वाद प्राप्त करना है, जिससे भक्त के जीवन की समस्याएँ समाप्त हों।

क्या मैं इस भजन का पाठ अकेले कर सकता हूँ?

जी हाँ, आप इसे अकेले या सामूहिक रूप से गा सकते हैं। व्यक्तिगत पाठ से विशेष ध्यान और एकाग्रता में वृद्धि होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 22 Aug 2026

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