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होली खेले राधा संग नटवर नंदकिशोर (Holi Khele Radha Sang Natwar Nand Kishor Lyrics in Hindi) - Holi Bhajan - Bhaktilok

61 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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राधा-कृष्ण की लीलाओं का अमृत भजन

राधा-कृष्ण की होली का आनंद लेते हुए, इस भजन के माध्यम से दिव्य प्रेम का अनुभव करें।

होली खेले राधा संग नटवर नंदकिशोर (Holi Khele Radha Sang Natwar Nand Kishor Lyrics in Hindi) -फागुन का मैहना केसरिया रंग घोलहोली खेले राधा संग नटवर नन्द किशोर ….2ओढ़ के आयी कान्हा नयी रे चुनरियापिचकारी भर मेरे मारो न सावरियापिचकारी मारी कर दीन्ही सर दरहोली खेले राधा संग नटवर नन्द किशोर ….2फागुन का मैहना केसरिया रंग घोलहोली खेले राधा संग नटवर नन्द किशोर ….2उदात्त गुलाल अबीर लाल भये भद्राराधा के आंखें के बिगड़ी है कजरा …2नन्द दे मोहे कान्हा घर सास करे शोरहोली खेले राधा संग नटवर नन्द किशोर ….2फागुन का मैहना केसरिया रंग घोलहोली खेले राधा संग नटवर नन्द किशोर ….2गली हमारी रोको न मुरारीभर पिचकारी मेरी चोली पे मारी …2दही बेचैन आयी मोहे घेर लायी है घोरहोली खेले राधा संग नटवर नन्द किशोर ….2फागुन का मैहना केसरिया रंग घोलहोली खेले राधा संग नटवर नन्द किशोर ….2ग्वाल बाल सब खेलत होलीसखियो के मुख पर मल गए रोलीदेख के ब्रज की होली मन में उठे हिलोलीहोली खेले राधा संग नटवर नन्द किशोर ….2फागुन का मैहना केसरिया रंग घोलहोली खेले राधा संग नटवर नन्द किशोर ….2

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन के माध्यम से राधा और कृष्ण के प्रेमलीला का दृश्य प्रस्तुत किया गया है। होली का पर्व भक्ति, रंग और प्रेम का प्रतीक है। 'फागुन का मैहना केसरिया रंग घोल' पंक्ति में फाल्गुन मास के मौसम का वर्णन किया गया है, जो रंगों और उल्लास का समय होता है। 'राधा संग नटवर नंदकिशोर' के माध्यम से स्पष्ट होता है कि राधा और कृष्ण एक-दूसरे के साथ आनंदमय होली खेलते हैं। कृष्ण का 'नटवर' अर्थात नर्तक रूप इस बात को रेखांकित करता है कि वह राधा के संग खिलंदड़ता करते हैं, जिससे उनकी परस्पर भक्ति का ज्ञान होता है। इस गीत में रंगों की विभिन्नताओं के साथ राधा की भक्ति का भावक रूप है, जहां वह भक्ति को रंगों में बदलती है।

इस गीत में भक्ति का आनंद देखने को मिलता है, जहां भावनाएँ प्रेम और उल्लास से भरी हुई हैं। 'उदात्त गुलाल' से अभिव्यक्त होता है कि भक्त बुनाई, जीवन की चुनौतियों और सुख-दुख का रंग याद करते हुए कृष्ण का साथ पाना चाहता है। 'ग्लाल' और 'अबीर' यह सब कहता है कि मौत से भी बड़े प्रेम में राधा की आँखों का काजल कैसे बिगड़ता है। यह सब इस बात की ओर इशारा करता है कि कृष्ण की आराधना में हमें राधा के प्रेम की गहराई को समझना होगा। भक्ति का यह रिश्ता केवल ना केवल कृष्ण तक बल्कि राधा के माध्यम से तप और त्याग का संदेश भी देता है।

इस भजन में भक्तिवाद का गहराई से विशेष ज्ञान मिलता है। राधा और कृष्ण का प्रेम संबंध केवल व्यक्तिगत स्तर पर नहीं, बल्कि आत्मा के परमात्मा से जुड़ने का मार्ग भी है। यह स्पष्ट होता है कि भक्ति मार्ग (Bhakti marg) केवल पूजा-पाठ में नहीं, बल्कि रोज़ाना के कार्यों में भी रंग भक्ति का सामंजस्य होना चाहिए। होली मातृता का भी प्रतीक है क्योंकि इसमें भक्ति, जाति, रंग और धारणाओं को त्यागकर एकता का प्रतीक है। यहाँ भक्ति भावना की सच्चाई यह है कि भक्त हर रंग और स्वरूप में अपने प्रेम को व्यक्त करें।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व गहन है। श्रीमद्भागवत पुराण में राधा-कृष्ण की लीलाएँ और उनके प्रेम का विशेष विवेचन किया गया है। होली का पर्व कृष्ण की खेलने वाले लीलाओं का प्रमुख प्रतिक है, जिसमें वह अपने भक्तों के साथ रंगों से खेलते हैं। इसे 'ब्रज की होली' के रूप में भी जाना जाता है जहाँ सभी वर्गों के लोग बिना भेदभाव के शामिल होते हैं। पौराणिक कथाओं में वर्णन है कि होली का उत्सव प्रेम, भक्ति और एकता का संदेश देता है, जो भारतीय संस्कृति के मूल में है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। इस भजन का सेवन करने से मानसिक शांति, भावनात्मक सुकून और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है। जब भक्त इसे गाते हैं, तो एक सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है जिससे मन की शांति और एकता का अहसास होता है। साथ ही, दिव्य प्रेम के अनुभव से आत्मा को उच्च स्थिति की प्राप्ति होती है, जिससे सांसारिक दुखों का निवारण होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

यह भजन सुबह के समय या होली के त्योहार पर गाया जा सकता है। भक्तों को इसे गाते समय एक शांत वातावरण में बैठने, दीया जलाने और आस्था के साथ कृष्ण को भोग अर्पित करने का प्रयास करना चाहिए। सही मुद्रा में बैठकर मन को एकाग्र करना और भगवान की लीलाओं की कल्पना करना इस भजन के अनुभव को और भी गहन बनाता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यह भजन किस त्योहार से संबंधित है?

यह भजन होली के त्योहार से संबंधित है, जिसमें भक्त राधा और कृष्ण के प्रेम का आनंद लेते हैं। होली प्रेम, भाईचारे और रंगों का उत्सव है।

क्या इस भजन का कोई विशेष अर्थ है?

इस भजन का विशेष अर्थ प्रेम और भक्ति की भावना है, जिसमें राधा और कृष्ण के आपसी प्रेम को दर्शाया गया है। यह भक्तों को उत्साहित करता है।

इस भजन का गायन किस प्रकार किया जाना चाहिए?

इस भजन का गायन हर्ष और उल्लास के साथ किया जाना चाहिए, विशेषकर होली के समय पर, ताकि भक्त गण मिलकर इसे प्रेमपूर्वक गा सकें।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 27 Aug 2026

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