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रुद्राष्टकम - नमामि शमीशन निर्वाण रूपम (Namami Shamishan Nirvan Roopam Lyrics) - Shiv Stotram Shiva Songs Bhakti Song - Bhaktilok

222 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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नमामीशमीशान निर्वाण रूपं विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदः स्वरूपम् (Namaam-Iisham-Iishaana Nirvaanna Ruupam Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

रुद्राष्टकम - नमामि शमीशन निर्वाण रूपम (Namami Shamishan Nirvan Roopam Lyrics) - 


[ श्री रुद्राष्टकम ]

Shri Rudrashtakam


ॐ नमः शिवाय

Om Namah Shivaya


नमामीशमीशान निर्वाणरूपं

Namaam-Iisham-Iishaana Nirvaanna-Ruupam

विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्

Vibhum Vyaapakam Brahma-Veda-Svaruupam

निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं

Nijam Nirgunnam Nirvikalpam Niriiham

चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम्

Cidaakaasham-Aakaasha-Vaasam Bhaje-[A]ham

नमामीशमीशान निर्वाणरूपं

Namaam-Iisham-Iishaana Nirvaanna-Ruupam

विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्

Vibhum Vyaapakam Brahma-Veda-Svaruupam


निराकारमोङ्करमूलं तुरीयं

Niraakaaram-Ongkara-Muulam Turiiyam

गिराज्ञानगोतीतमीशं गिरीशम्

Giraa-Jnyaana-Go-[A]tiitam-Iisham Giriisham

करालं महाकालकालं कृपालं

Karaalam Mahaakaala-Kaalam Krpaalam

गुणागारसंसारपारं नतोऽहम्

Gunna-[A]agaara-Samsaara-Paaram Nato-[A]ham

नमामीशमीशान निर्वाणरूपं

Namaam-Iisham-Iishaana Nirvaanna-Ruupam

विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्

Vibhum Vyaapakam Brahma-Veda-Svaruupam


तुषाराद्रिसंकाशगौरं गभिरं

Tussaara-Adri-Samkaasha-Gauram Gabhiram

मनोभूतकोटिप्रभाश्री शरीरम्

Mano-Bhuuta-Kotti-Prabhaa-Shrii Shariiram

स्फुरन्मौलिकल्लोलिनी चारुगङ्गा

Sphuran-Mauli-Kallolinii Caaru-Ganggaa

लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा

Lasad-Bhaala-Baale[a-I]ndu Kanntthe Bhujanggaa

चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालं

Calat-Kunnddalam Bhruu-Sunetram Vishaalam

प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम्

Prasanna-[A]ananam Niila-Kannttham Dayaalam

मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं

Mrga-Adhiisha-Carma-Ambaram Munndda-Maalam

प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि

Priyam Shangkaram Sarva-Naatham Bhajaami

नमामीशमीशान निर्वाणरूपं

Namaam-Iisham-Iishaana Nirvaanna-Ruupam

विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्

Vibhum Vyaapakam Brahma-Veda-Svaruupam


प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं

Pracannddam Prakrssttam Pragalbham Pare[a-Ii]sham

अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशं

Akhannddam Ajam Bhaanu-Kotti-Prakaasham

त्र्यःशूलनिर्मूलनं शूलपाणिं

Tryah-Shuula-Nirmuulanam Shuula-Paannim

भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यम्

Bhaje[a-A]ham Bhavaanii-Patim Bhaava-Gamya

नमामीशमीशान निर्वाणरूपं

Namaam-Iisham-Iishaana Nirvaanna-Ruupam

विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्

Vibhum Vyaapakam Brahma-Veda-Svaruupam


कलातीतकल्याण कल्पान्तकारी

Kalaatiita-Kalyaanna Kalpa-Anta-Kaarii

सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी

Sadaa Sajjana-[A]ananda-Daataa Pura-Arii

चिदानन्दसंदोह मोहापहारी

Cid-Aananda-Samdoha Moha-Apahaarii

प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी

Prasiida Prasiida Prabho Manmatha-Arii

न यावद् उमानाथपादारविन्दं

Na Yaavad Umaa-Naatha-Paada-Aravindam

भजन्तीह लोके परे वा नराणाम्

Bhajanti-Iha Loke Pare Vaa Naraannaam

न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं

Na Taavat-Sukham Shaanti Santaapa-Naasham

प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासं

Prasiida Prabho Sarva-Bhuuta-Adhi-Vaasam


नमामीशमीशान निर्वाणरूपं

Namaam-Iisham-Iishaana Nirvaanna-Ruupam

विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्

Vibhum Vyaapakam Brahma-Veda-Svaruupam


न जानामि योगं जपं नैव पूजां

Na Jaanaami Yogam Japam Naiva Puujaam

नतोऽहं सदा सर्वदा शम्भुतुभ्यम्

Natoham Sadaa Sarvadaa Shambhu-Tubhyam

जराजन्मदुःखौघ तातप्यमानं

Jaraa-Janma-Duhkhau-[A]gha Taatapyamaanam

रभो पाहि आपन्नमामीश शंभो

Prabho Paahi Aapanna-Maam-Iisha Shambho

नमामीशमीशान निर्वाणरूपं

Namaam-Iisham-Iishaana Nirvaanna-Ruupam

विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्

Vibhum Vyaapakam Brahma-Veda-Svaruupam


रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये

Rudraassttaka-Idam Proktam Viprenna Hara-Tossaye

ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति

Ye Patthanti Naraa Bhaktyaa Tessaam Shambhuh Prasiidati


इति श्रीगोस्वामितुलसीदासकृतं श्रीरुद्राष्टकं सम्पूर्णम्

Iti Shrii-Gosvaami-Tulasiidaasa-Krtam Shriirudraassttakam Sampuurnnam


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🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)

भगवान श्री रामचंद्र जी को समर्पित यह भजन "रुद्राष्टकम - नमामि शमीशन निर्वाण रूपम (Namami Shamishan Nirvan Roopam Lyrics) - Shiv Stotram Shiva Songs Bhakti Song - Bhaktilok" मर्यादा पुरुषोत्तम के पावन चरित्र का स्मरण कराता है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस के सिद्धांतों के अनुसार, राम का नाम स्वयं राम से भी अधिक सामर्थ्यवान है। इस भजन की लय और शब्द भक्त को सीधे साकेत धाम की पावन चेतना से जोड़ते हैं।

भजन का प्रमुख भाव शरणागति का है। जब जीव समस्त सांसारिक प्रपंचों से थककर भगवान राम के चरणों में शरण लेता है, तो उसे परम अभय की प्राप्ति होती है। राम नाम की ध्वनि से वातावरण शुद्ध होता है और अंतःकरण में धर्म और सत्य के प्रति निष्ठा दृढ़ होती है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)

सनातन ग्रंथों के अनुसार, राम नाम का जाप कलयुग का सर्वश्रेष्ठ साधन माना गया है। वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस में राम नाम की असीम महिमा गाई गई है। यह भजन साधक के मन में वैराग्य, संयम, दया और कर्तव्य परायणता जैसे नैतिक मूल्यों का संचार करता है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। राम नाम के संकीर्तन से व्यक्ति का आत्मबल जागृत होता है, भय तथा शंकाओं का नाश होता है और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य रखने की शक्ति प्राप्त होती है। यह पारिवारिक सौहार्द और मर्यादा की स्थापना में सहायक है।

🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)

राम भजन का संकीर्तन प्रातःकाल स्नान के पश्चात राम दरबार की प्रतिमा के सम्मुख घी का दीपक जलाकर करें। तुलसी की माला से राम नाम का जप करने के पश्चात इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी होता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

राम भजन के गायन से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?

राम भजन के संकीर्तन से मानसिक शांति, उत्तम चरित्र, और विपत्तियों में धैर्य बनाए रखने का आत्मबल प्राप्त होता है।

राम नाम जप के लिए सर्वश्रेष्ठ माला कौन सी है?

भगवान श्री राम के मंत्र जाप और संकीर्तन के लिए तुलसी की माला को सर्वश्रेष्ठ और अत्यंत पवित्र माना गया है।

क्या राम भजन बच्चों के संस्कारों के लिए उपयोगी है?

हाँ, भगवान राम के मर्यादापूर्ण चरित्र के भजन सुनने से बच्चों में बड़ों के प्रति सम्मान, सत्यप्रियता और उच्च नैतिक संस्कारों का विकास होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 13 Aug 2026

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