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Holi Bhajan

रंग मत डारे रे सांवरिया मारो गुर्जर मारे रे लिरिक्स (Rang Mat Dare Re Sanwariya Lyrics in Hindi) - Chetna Shyam Bhajan - Bhaktilok

93 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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सांवरिया की भक्ति: रंगों में डूबी भजन

सांवरिया के प्रति भक्ति और प्रेम का यह भजन पुकारता है, आइए इसे मन से गा कर उनके प्रति श्रद्धा अर्पित करें।

रंग मत डारे रे सांवरिया मारो गुर्जर मारे रे रंग मत डारे रे सांवरिया मारो गुर्जर मारे रे माला मं सिर पर सजाए, चरणों में कपड़े बेरे जय जय श्री कृष्णा, ढोल बजी हार थोरे रे रंग मत डारे रे सांवरिया मारो गुर्जर मारे रे रंग मत डारे रे सांवरिया मारो गुर्जर मारे रे कुमकुम संग साज बिछाए, राधिका स्वामी सखियाँ सखियाँ पिया की याद सहेजे, आजीना आंगन gonare रंग मत डारे रे सांवरिया मारो गुर्जर मारे रे रंग मत डारे रे सांवरिया मारो गुर्जर मारे रे हरि हरि नाम जस गाए, चढ़ती फिर नंदनी विहार संग में सन्त भक्त प्यारे हैं, हरि संग कांति है यार रंग मत डारे रे सांवरिया मारो गुर्जर मारे रे रंग मत डारे रे सांवरिया मारो गुर्जर मारे रे

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन 'रंग मत डारे रे सांवरिया' का मुख्य विषय प्रेम और भक्ति है। इस भजन की आरंभिक पंक्तियाँ, "रंग मत डारे रे सांवरिया", सांवरे कृष्ण की ओर निर्देशित हैं। यहां 'रंग' का तात्पर्य शृंगार या उत्सव से है, जो भक्त के हृदय में भगवान के प्रति प्रेम और भक्ति के रंग भरने का आग्रह करता है। भजन में भक्त भगवान कृष्ण के सौंदर्य और आकर्षण का वर्णन करते हैं, जिससे भक्त की आत्मा झूम उठती है। 'गुर्जर मारे रे' कहकर यह संकेत देता है कि ये भावनाएँ केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि समूह में प्रकट होती हैं, जिससे एकता का संदेश भी मिलता है।

भजन के भावार्थ में 'कल्याणकारी' भाव है। गीत में कहते हैं कि प्रियतम की याद में होने वाला रंग-रंग भरना साधारण भक्ति नहीं, बल्कि एक गहरा भावनात्मक अनुभव है। भक्त अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए अपने भगवान के आगे अपनी कसम खा रहे हैं कि वे उन्हें अपने प्रेम से रंग देंगे। 'जय जय श्री कृष्णा' की उद्घोषणा इस भक्ति के पूर्ण होने और भक्त के सम्मान का प्रतीक है। भक्तों की सखियाँ और उपासना की क्रियाएँ, एक सामूहिक भावनात्मकता को प्रदर्शित करती हैं, जो भक्त की आत्मा को उज्ज्वल बनाती हैं।

इस भजन में भक्ति मार्ग के तत्व को समझाया गया है। भक्ति मार्ग का अर्थ है प्रेम और समर्पण से भगवान की सेवा करना। भगवान कृष्ण के प्रति भक्ति साधक को 'निश्काम' कार्यों की ओर प्रेरित करती है। स्वयं की इच्छाओं से परे जाकर भगवान की आराधना से मिलता साधक का सुख, भाग्य का वो रंग है जो जीवन को एक नया अर्थ प्रदान करता है। यह भजन भक्त की अंतरात्मा की आवाज है, जो उसे कृष्ण के प्रति अभिन्न प्रेम की ओर ले जाता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भक्तों के साथ सांस्कृतिक, धार्मिक और समुदायिक एकता को जोड़ने का कार्य करता है। महाभारत और पुराणों में भगवान कृष्ण की लीलाओं का वर्णन है, जहां भक्तों ने उन्हें प्रेम से पूजा। इस भजन के माध्यम से भक्त उस प्रेम और भक्ति अनुभव को जीते हैं। यह न केवल व्यक्तिगत भक्ति को व्यक्त करता है, बल्कि समाजिक एकता और धर्म का संदेश भी फैलाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि प्रेम से किए गए जप का फल बहुत अधिक होता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का पाठ मानसिक शांति, आत्मिक शुद्धता और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। यह ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है, जिससे मन की अशांति खत्म होती है। भजन गाने से भक्त की आत्मा में एक नई ऊर्जा का संचार होता है और भगवान के प्रति प्रेम और समर्पण की भावना का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप सुबह के समय, सूर्य उदय से पहले या शाम को संध्या वेला में करना श्रेष्ठ माना जाता है। इस दौरान, एक साफ और एकांत स्थान पर बैठें, वहां एक दीपक जलाएं और भगवान कृष्ण की प्रतिमा के सामने बैठकर ध्यान केंद्रित करें। मन को शुद्ध करते हुए भक्ति भाव से भजन का गान करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश भगवान कृष्ण के प्रति प्रेम और भक्ति का अनुभव करना है, जिससे भक्त की आत्मा में शांति एवं उल्लास का संचार होता है।

भजन के दौरान क्या विशेष ध्यान रखें?

भजन के दौरान ध्यान रखें कि मन में एकाग्रता बनी रहे और भावनाएं सच्ची हों। इससे भगवान के प्रति आत्मीयता बढ़ती है।

क्या इस भजन का कोई विशेष पर्व पर गाने का महत्व है?

जी हां, इस भजन को जन्माष्टमी या राधा द्वादशी पर विशेष रूप से गाने से भक्तों को अधिक पुण्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

श्रेणियां: Holi Bhajan Holi Geet holi song

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 20 Aug 2026

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