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ऐसी सुबह ना आए आए ना ऐसी शाम भजन लिरिक्स (Aisi Subah Na Aaye Aaye Na Aisi Saam Lyrics in Hindi) - ANURADHA PAUDWAL Shiv Bhajan - Bhaktilok

99 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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शिव भक्ति की अनंत सुबह: समर्पण का गान

शिव के प्रति समर्पण और भक्ति का यह अद्भुत भजन, मन में शांति और आनंद का संचार करता है।

ऐसी सुबह ना आए आए ना ऐसी शामश्लोक – शिव है शक्तिशिव है भक्तिशिव है मुक्ति धामशिव है ब्रह्माशिव है विष्णुशिव है मेरा राम ।।ऐसी सुबह ना आएआए ना ऐसी शामजिस दिन जुबाँ पे मेरीआए ना शिव का नाम।।ॐ नमः शिवायॐ नमः शिवाय।मन मंदिर में वास है तेरातेरी छवि बसाईप्यासी आत्मा बनके जोगनतेरी शरण में आईतेरे ही चरणों में पायामैंने ये विश्रामऐसी सुबह ना आएआए ना ऐसी शाम ।।तेरी खोज में न जानेकितने युग मेरे बीतेअंत में काम क्रोध मद हारेहे भोले तुम जीतेमुक्त किया तूने प्रभु मुझकोशत शत है प्रणामऐसी सुबह ना आएआए ना ऐसी शाम ।।सर्व कला संम्पन तुम्ही होहे मेरे परमेश्वरदर्शन देकर धन्य करो अबहे त्रिनेत्र महेश्वरभव सागर से तर जाउंगालेकर तेरा नामऐसी सुबह ना आएआए ना ऐसी शाम ।।ऐसी सुबह ना आए आए ना ऐसी शामजिस दिन जुबाँ पे मेरीआए ना शिव का नाम ।。

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में भक्त अपने हृदय की गहराइयों से भगवान शिव की स्तुति करते हैं। 'ऐसी सुबह ना आए' की पंक्तियाँ दर्शाती हैं कि जब भगवान शिव का नाम न लिया जाए, तब सवेरे और शाम का कोई अर्थ नहीं होता। यहाँ भगवान शिव को विभिन्न रूपों में प्रस्तुत किया गया है जैसे कि शक्ति, मुक्ति, और ब्रह्म। भक्त का मन मंदिर में है, जहाँ शिव की छवि बसी हुई है। यह छवि अपनी आत्मा की pyas को दूर करती है। प्रार्थना में भक्त शिव से उनके चरणों में विश्राम की कामना करता है। इस कारण, शिव की भक्ति ही सुकून और शांति की प्राप्ति का माध्यम है।

भावार्थ में यह स्पष्ट है कि भक्त ने शिव को अपने जीवन का केंद्र मान लिया है। 'तीरी खोज में न जाने कितने युग मेरे बीते' में भक्त के भक्ति पथ का उल्लेख है, जिसमें उन्होंने नासमझी और कठिनाइयों का सामना किया है। अंत में काम, क्रोध और मद को हराकर भोलेनाथ द्वारा मुक्ति का अनुभव किया। यह बोध कराता है कि भगवान शिव की भक्ति असाधारण है, और भक्त केवल शिव को नमन करते हुए उन पर निर्भर होते हैं। उसे अपने भक्त की रक्षा और मुक्ति का प्रयोजन करने वाले साधक के रूप में देखा जाता है।

यह भजन भक्ति मार्ग की गहराई को उजागर करता है। यहाँ 'सर सर्व कला संम्पन' का बोध कराता है कि शिव सभी प्रकार की कलाओं और क्षमताओं के धारणकर्ता हैं। जब भक्त शिव का ध्यान करता है, तब उसे उस सशक्त ऊर्जा का अनुभव होता है जो सीधे ब्रह्म से जुड़ी होती है। भक्ति का यह मार्ग श्रद्धा, समर्पण, और कठिनाइयों से गुजरकर शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है। जब व्यक्ति शिव के चरणों में प्रविष्ट होता है, तब उसकी आत्मा को शांति मिलती है, जो भक्ति का सही अर्थ है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का धार्मिक और पौराणिक संदर्भ काफी गहरा है। शिव को विश्व के रचनाकार, संहारक और पालनकर्ता के रूप में देखा जाता है। शिवपुराण और अन्य शास्त्रों में भी भक्तों को प्रेरित किया गया है कि वे कठिनाइयों में शिव का ध्यान करें। भजन प्रार्थना का माध्यम है, जो मुक्ति की प्राप्ति और कर्मों से मुक्त होने की प्रेरणा देता है। शिव को तीन नेत्रों वाले महादेव के रूप में अंकित किया गया है, जिनका ध्यान ध्यानारूढ़ता व अंतर्दृष्टि का प्रतीक है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। इस भजन का नियमित पाठ मानसिक शांति, स्थिरता और आत्मिक ऊर्जा का संचार करता है। यह न केवल तनाव को कम करता है, बल्कि हृदय में सकारात्मकता भी भरता है। शिव की भक्ति में लगन रखने से व्यक्ति आत्मा की शांति, मानसिक स्वास्थ्य और कठिनाईयों से उबरने की शक्ति अर्जित करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह और शाम के समय विशेष रूप से लाभप्रद होता है। श्रद्धालु को उचित वातावरण में बैठकर, दीप जलाकर और मन में एकाग्रता के साथ भजन का गायन करना चाहिए। सही मुद्रा में बैठकर भक्ति भाव से इस भजन का जप करने से आभा और मन में शांति का अनुभव होता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन में शिव की महिमा और भक्ति का महत्व दर्शाया गया है। यह बताता है कि शिव का नाम लेना जीवन में सभी संतोष और साहस का स्रोत है।

भजन का कुछ पौराणिक संदर्भ क्या है?

भजन में शिव को ब्रह्मा, विष्णु और राम के रूप में दर्शाया गया है, जो तीनों गुणों को समाहित करते हैं और मानवता की रक्षा करते हैं।

इस भजन का पाठ किस प्रकार करना चाहिए?

इस भजन का पाठ एकाग्रता और शांति से सुबह या शाम के समय करना चाहिए, और निःसंदेह एक दीप जलाने से वातावरण को शुभ बनाना चाहिए।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 18 Aug 2026

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