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हरिद्रा गणेश कवचम् लिरिक्स (Haridra Ganesh Kavach Lyrics in Hindi) - Haridraganesh Kavacham Usha Mangeshkar - Bhaktilok

68 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें


हरिद्रा गणेश कवचम् लिरिक्स (Haridra Ganesh Kavach Lyrics in Hindi) - 


श्वरउवाच:

शृणु वक्ष्यामि कवचं सर्वसिद्धिकरं प्रिये ।

पठित्वा पाठयित्वा च मुच्यते सर्व संकटात् ॥१॥


अज्ञात्वा कवचं देवि गणेशस्य मनुं जपेत् ।

सिद्धिर्नजायते तस्य कल्पकोटिशतैरपि ॥ २॥


ॐ आमोदश्च शिरः पातु प्रमोदश्च शिखोपरि ।

सम्मोदो भ्रूयुगे पातु भ्रूमध्ये च गणाधिपः ॥ ३॥


गणाक्रीडो नेत्रयुगं नासायां गणनायकः ।

गणक्रीडान्वितः पातु वदने सर्वसिद्धये ॥ ४॥


जिह्वायां सुमुखः पातु ग्रीवायां दुर्मुखः सदा ।

विघ्नेशो हृदये पातु विघ्ननाथश्च वक्षसि ॥ ५॥


गणानां नायकः पातु बाहुयुग्मं सदा मम ।

विघ्नकर्ता च ह्युदरे विघ्नहर्ता च लिङ्गके ॥ ६॥


गजवक्त्रः कटीदेशे एकदन्तो नितम्बके ।

लम्बोदरः सदा पातु गुह्यदेशे ममारुणः ॥ ७॥


व्यालयज्ञोपवीती मां पातु पादयुगे सदा ।

जापकः सर्वदा पातु जानुजङ्घे गणाधिपः ॥ ८॥


हारिद्रः सर्वदा पातु सर्वाङ्गे गणनायकः ।

य इदं प्रपठेन्नित्यं गणेशस्य महेश्वरि ॥ ९॥


कवचं सर्वसिद्धाख्यं सर्वविघ्नविनाशनम् ।

सर्वसिद्धिकरं साक्षात्सर्वपापविमोचनम् ॥ १०॥


सर्वसम्पत्प्रदं साक्षात्सर्वदुःखविमोक्षणम् ।

सर्वापत्तिप्रशमनं सर्वशत्रुक्षयङ्करम् ॥ ११॥


ग्रहपीडा ज्वरा रोगा ये चान्ये गुह्यकादयः ।

पठनाद्धारणादेव नाशमायन्ति तत्क्षणात् ॥ १२॥


धनधान्यकरं देवि कवचं सुरपूजितम् ।

समं नास्ति महेशानि त्रैलोक्ये कवचस्य च ॥ १३॥


हारिद्रस्य महादेवि विघ्नराजस्य भूतले ।

किमन्यैरसदालापैर्यत्रायुर्व्ययतामियात् ॥ १४॥


|| इति विश्वसारतन्त्रे हरिद्रागणेशकवचं सम्पूर्णम् ||


🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश जी का यह भजन "हरिद्रा गणेश कवचम् लिरिक्स (Haridra Ganesh Kavach Lyrics in Hindi) - Haridraganesh Kavacham Usha Mangeshkar - Bhaktilok" सभी कार्यों के निर्विघ्न संपन्न होने की कामना से गाया जाता है। विघ्नहर्ता गणेश जी बुद्धि, ज्ञान और विवेक के अधिष्ठाता देव हैं। इस भजन के प्रत्येक शब्द में गणेश जी के गजमुख, विशाल उदर, और चूषक वाहन का सुंदर वर्णन है।

इस भजन की मूल भावना विघ्न विनाश और शुभ-लाभ की प्राप्ति की है। जीवन में जब भी कोई नया कार्य प्रारंभ करना हो, तो गणेश जी का स्मरण करना अनिवार्य माना गया है, क्योंकि वे ऋद्धि-सिद्धि के प्रदाता हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

गणेश पुराण के अनुसार, श्री गणेश जी की स्तुति और भजन सुनने से बुद्धि का विकास होता है, विद्या अर्जन में आने वाली बाधाएं समाप्त होती हैं और घर में शांति का वातावरण बनता है।

प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के जन्म और उनकी कथाओं का संपूर्ण विवरण जानने के लिए ब्रह्म पुराण गणेश महिमा का पाठ करें। गणेश संकीर्तन से मानसिक अशांति दूर होती है, बुद्धि कुशाग्र होती है और किसी भी कार्य में आने वाली विघ्न-बाधाएं स्वतः ही दूर हो जाती हैं।

🕒 साधना एवं गायन विधि

बुधवार और गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जी के सम्मुख दूर्वा और मोदक अर्पित कर इस भजन का संकीर्तन करें। गायन के समय सिंदूर का तिलक लगाना शुभ होता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

गणेश जी की पूजा में 'दूर्वा' (दूब घास) क्यों चढ़ाई जाती है?

दूर्वा शीतलता प्रदान करने वाली है। अनलासुर नामक दैत्य को निगलने के बाद गणेश जी के पेट में उत्पन्न जलन को शांत करने के लिए मुनियों ने उन्हें दूर्वा चढ़ाई थी। तब से गणेश जी को दूर्वा अत्यंत प्रिय है।

गणेश जी के भजन किस दिन विशेष रूप से गाने चाहिए?

बुधवार का दिन और हर माह आने वाली संकष्टी व विनायक चतुर्थी की तिथियां गणेश आराधना के लिए सर्वोत्तम हैं।

क्या प्रथम पूज्य गणेश जी का स्मरण हर पूजा से पहले जरूरी है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव से मिले वरदान के कारण किसी भी शुभ कार्य या देव पूजा की शुरुआत गणेश जी के पूजन व स्मरण से ही की जाती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Aug 2026

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