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मन मेरा मंदिर शिव मेरी पूजा भजन लिरिक्स (Man Mera Mandir Shiv Meri Puja Bhajan Lyrics in Hindi) - Shiv Bhajan Anuradha Paudwal - Bhaktilok

73 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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शिव की महिमा: हृदय में शिव की पूजा

शिव की भक्ति से भरा यह भजन आत्मा को शांति और सच्ची भक्ति का अनुभव कराता है।

मन मेरा मंदिर शिव मेरी पूजा भजन लिरिक्स (Man Mera Mandir Shiv Meri Puja Bhajan Lyrics in Hindi) -ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवायओम नमः शिवाय ओम नमः शिवायसत्य है ईश्वर शिव है जीवनसुन्दर ये संसार है तीनों लोक हैतुझमे तेरी माया अपरम्पार हैओम नमः शिवाय नमोओम नमः शिवाय नमो ||मन मेरा मंदिर शिव मेरी पूजा शिव से बड़ा नहीं कोई दूजाबोल सत्यम शिवम बोल तू सुन्दरममन मेरे शिव की महिमा के गुण गाये जा ||पार्वती जब सीता बन कर जय श्री राम के सम्मुख आई राम ने उनको माता कहकर शिव शंकर की महिमा गायीशिव भक्ति में सब कुछ सूझा शिव से बड़ा नहीं कोई दूजाबोल सत्यम शिवम बोल तू सुन्दरम मन मेरे शिव की महिमा के गुण गाये जा ||तेरी जटा से निकली गंगा और गंगा ने भीष्म दिया है तेरे भक्तों की शक्ति ने सारे जगत को जीत लिया हैतुझको सब देवोँ ने पूजा शिव से बड़ा नहीं कोई दूजाबोल सत्यम शिवम बोल तू सुन्दरम मन मेरे शिव की महिमा के गुण गाये जा ||मन मेरे मंदिर शिव मेरी पूजा शिव से बड़ा नहीं कोई दूजाबोल सत्यम शिवम बोल तू सुन्दरम मन मेरे शिव की महिमा के गुण गाये जा ||ओम नमः शिवाय नमोओम नमः शिवाय नमो ….||Singer - Anuradha Paudwal

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय शिव की भक्ति और उनकी महिमा का गान है। भजन की पहली पंक्ति में 'मन मेरा मंदिर, शिव मेरी पूजा' कहा गया है, जिसमें भक्त अपने हृदय को भगवान शिव का मंदिर मानते हुए उसकी पूजा करते हैं। यह दर्शन दर्शाता है कि वास्तविक पूजा स्थल और साधना का केंद्र मन है, जो अंतःकरण की शुद्धता पर निर्भर करता है। 'शिव से बड़ा नहीं कोई दूजा' की पंक्ति यह भी दर्शाती है कि शिव की महिमा अद्वितीय और अपार है। भक्त इस गीत के माध्यम से राधा, सीता, और अन्य देवी-देवताओं के साथ शिव की निरंतर भक्ति में लिपटे होने की सलाह देते हैं।

भावार्थ की दृष्टि से, 'तेरी जटा से निकली गंगा' पंक्ति यह संकेत करती है कि शिव का आशीर्वाद कैसे पृथ्वी पर जीवन और जल का साधन देता है। गंगा का जल पवित्र है और यह जीवन के लिए आवश्यक है, यह दर्शाता है कि शिव की कृपा से ही सभी कल्याणकारी तत्व हम तक पहुँचते हैं। इसकी दूसरी पंक्ति में कहा गया है कि शिव की भक्ति से भक्तों में शक्ति आती है। यह वास्तविकता जीवन के सभी क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता और विश्वास पैदा करती है। यीशु राम के सामने पार्वती का आना और उनकी महिमा का गान करना हमें यह बताता है कि शिव इतने महान हैं कि सभी देवी-देवता भी उनके समक्ष झुकते हैं।

भगवान शिव का यह भजन भक्ति मार्ग पर चलने वाले भक्तों के लिए प्रेरणास्त्रोत है। यह दर्शाता है कि सच्चिदानंद स्वरूप शिव को समर्पित होकर भक्ति करना ही सच्ची पूजा है। शिव पूजा में 'सत्यम शिवम सुंदरम' का जप करना हमें सत्य, श्रेष्ठता और सौंदर्य की प्रेरणा देता है। भक्ति मार्ग के अनुसार, भक्त शिव को केवल एक देवता नहीं मानते, बल्कि उन्हें जीवन के संपूर्ण तत्व का प्रतीक मानते हैं। भक्ति का यह मार्ग हमें आंतरिक शांति और सच्चाई का अनुभव कराता है, जो अंततः मोक्ष की ओर ले जाता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व बहुत गहरा है और इसकी जड़ें प्राचीन भारतीय पुराणों में हैं। जैसे रामायण में पार्वती और शिव की प्रेम कथा का वर्णन है, जो सदियों से भक्तों को प्रेरणा देती आ रही है। शिव के प्रति भक्ति का एक अनोखा उदाहरण रामायण में सीता के माध्यम से प्रदर्शित होता है जब वह माता कहकर शिव की महिमा गाती हैं। साथ ही, इस भजन में 'गंगा' का संदर्भ भी महाभारत के भीष्म के देवत्व से जुड़ा है, जो कि इस गणेश भक्ति की मान्यता और समर्पण को दर्शाता है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। इस भजन का नियमित जाप करने से भक्तों को मानसिक शांति, आत्मविश्वास, और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है। यह तनाव को कम करता है और जीवन में सकारात्मकता बढ़ाता है। शिव की कृपा से भक्तों को नई ऊर्जा मिलती है, जिससे वे कठिनाइयों का सामना आसानी से कर पाते हैं।

🕒 साधना एवं गायन विधि

अध्यात्म के अनुसार, इस भजन का जाप प्रात:काल और संध्या काल में विशेष असरदार होता है। भक्तों को चाहिए कि वे अपने पूजा स्थान को साफ रखें, एक दीपक जलाएँ और शुद्ध मन से शिव का स्मरण करें। स्वास्थ्य और मानसिक संकल्प के लिए शांत और समर्पित मुद्रा में बैठना आवश्यक है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या इस भजन का विशेष समय है?

इस भजन का जाप प्रात: और संध्या काल में करना विशेष फलदायी होता है, क्योंकि इन समय में मन अधिक शुद्ध होता है।

क्या इस भजन का कोई विशेष फल है?

भजन का नियमित जाप करने से भक्तों में मानसिक शांति, आत्मविश्वास और सकारात्मकता का संचार होता है।

क्या इस भजन का सही तरीका है?

भजन का सही तरीका यह है कि भक्त उसे ध्यानपूर्वक सुनें, पढ़ें और अपने मन में शिव की छवि बनाकर करें।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Aug 2026

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