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मेरे मन में बस गयी है मोहन छवि तुम्हारी लिरिक्स (Mere Man Me Bas Gayi Hai Mohan Chhavi Tumhari Lyrics in Hindi) - by Pandit Neeraj - Bhaktilok

83 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मोहन की छवि: प्रेम और भक्ति की अभिव्यक्ति

इस भजन से मोहन की छवि में रम जाकर भक्ति की गहराइयों का अनुभव करें।

 मेरे मन में बस गयी है मोहन छवि तुम्हारी लिरिक्स (Mere Man Me Bas Gayi Hai Mohan Chhavi Tumhari Lyrics in Hindi) - मेरे मन में बस गयी हैमोहन छवि तुम्हारीनैनों में कैसा जादूमुस्कान कितनी प्यारीमेरे मन में बस गई हैमोहन छवि तुम्हारी ||तेरी अदा पे चर्चेहोते गली गली मेंकैसे तुम्हे भुला दूरहते हो मेरे दिल मेंमेरी धड़कनों में तुम होहर सांस तुम पे वारिमेरे मन में बस गई हैमोहन छवि तुम्हारी ||सुन्दर सी तेरी सूरतलगती है भोली भालीगालों पे झूमती हैभँवरे सी लट ये कालीमीठी सी तेरी बोलीअधरों पे तेरे लालीमेरे मन में बस गई हैमोहन छवि तुम्हारी ||दासी यशोदा कहतीतूने जिन्दगी संवारीअपना बनाया मुझकोमेरी हस्ती ही निखारीजाऊं मैं तेरे सदकेतेरी हर छटा निरालीमेरे मन में बस गई हैमोहन छवि तुम्हारी ||मेरे मन में बस गयी हैमोहन छवि तुम्हारीनैनों में कैसा जादूमुस्कान कितनी प्यारीमेरे मन में बस गई हैमोहन छवि तुम्हारी ||**  Singer - Pandit Neeraj Ji  **

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में मोहन की दीवानी भक्ति का अद्भुत प्रतिबिंब देखने को मिलता है। 'मेरे मन में बस गई है मोहन छवि तुम्हारी' से प्रारंभ होकर, भक्त अपने मन में भगवान कृष्ण की छवि को स्थायी रूप से बसाने की कामना करता है। इस भजन में उनकी मोहक मुस्कान, नयन, और अदाएं भक्त के मन में गहराई से स्थापित होती हैं। जैसे-जैसे ये पंक्तियाँ आगे बढ़ती हैं, भक्त की भावनाएँ और भक्ति की गहराई प्रकट होती है। 'तेरी अदा पे चर्चे होते गली गली में' इस पंक्ति से भक्ति के समाजिक पहलू का भी उल्लेख होता है। भक्त कृष्ण के प्रति अपनी अनुपम भक्ति को साझा करता है। यहां प्रत्येक चरण में प्रेम, पूजा और श्रद्धा की भावना को बहुत सुंदरता से व्यक्त किया गया है।

भजन में 'सुंदर सी तेरी सूरत, लगती है भोली भाली' जैसे वाक्यांश व्यक्तिगत प्रेम और स्नेह का अभिव्यक्त करते हैं। भक्त की दृष्टि में मोहन का सौंदर्य केवल बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक भी है, जो उसे पूरे दिल से भक्ति में लीन करता है। इस संदर्भ में, भक्त यशोदा को माता के रूप में स्वीकार करते हुए अपनी भक्ति के स्तर को और ऊपर उठाता है। 'दासी यशोदा कहती' इस पंक्ति में माँ का प्रेम और उनके समर्पण की छवि साफ दिखती है। यह भक्ति केवल व्यक्तिगत अनुभव नहीं, बल्कि समाज के लिए भी महत्वपूर्ण है, जिसमें माता-पिताओं के प्रति श्रद्धा और स्नेह पर जोर दिया जाता है।

इस भजन की स्थायी भावनाओं में भक्ति मार्ग का सार छिपा है। भक्त एक अदृश्य संबंध को प्रत्यक्ष में लाते हैं जो भक्ति और प्रेम का माध्यम बनता है। भक्ति मार्ग के अनुसार, भगवान कृष्ण की छवि में अपनी स्वयं की आत्मा की पहचान करना महत्वपूर्ण है। 'तेरी हर छटा निराली' इस बात का परिचायक है कि प्रत्येक भावना, हर छवि में कृष्ण का अस्तित्व है। भगवान से प्रेम करना और उनकी छवि का ध्यान करना साधक को आत्म-ज्ञान की ओर अग्रसर करता है। भक्ति, प्रेम और समर्पण की यह भावनाएँ व्यक्ति को आध्यात्मिक रूप से बल प्रदान करती हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भारतीय पौराणिक कथाओं में भगवान कृष्ण के अनंत प्रेम और भक्ति को प्रदर्शित करता है। श्री कृष्ण का एक विशेष स्थान है, जो न केवल प्रेम के प्रतीक हैं, बल्कि दया, करुणा और आत्मा के उद्धार के भी प्रतीक हैं। इस भजन का संदर्भ यशोदा माता की ममता और कृष्ण के जीवन की अद्भुत लीलाओं से है। कई पुराणों में, जैसे भागवत पुराण, कृष्ण के प्रेम में लीन भक्तों का वर्णन मिलता है, जो इस भजन के माध्यम से उद्घाटित किया गया है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का ध्यान करने से मानसिक शांति और संतुलन मिलता है। मन में कृष्ण की छवि बसा कर, भक्त तनाव और चिंता से मुक्ति पा सकता है। यह भजन भक्ति में झूमने से आत्मिक विकास का माध्यम बनता है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। नियमित गायन से आध्यात्मिक ऊर्जा को भी बढ़ावा मिलता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह सवेरे या संध्या के समय करना अत्यधिक लाभकारी होता है। पूजा के समय एक दीया जलाएं और पुष्प अर्पित करें। ध्यानपूर्वक बैठकर शुद्ध मन से कृष्ण की छवि का स्मरण करें। यह भक्त को मानसिक शांति और दिव्यता का अनुभव कराता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का क्या महत्व है?

यह भजन भक्तों को कृष्ण की मोहक छवि के प्रति अपनी भक्ति व्यक्त करने का एक अद्भुत माध्यम है, जो व्यक्ति के मनोभाव को सकारात्मक रूप में परिवर्तित करता है।

भजन के माध्यम से क्या लाभ उठाया जा सकता है?

भजन का नियमित जाप मानसिक शांति, आध्यात्मिक प्रगति और जीवन में सकारात्मकता लाने में मदद करता है। भक्त की आत्मा को सुकून और संतोष मिलता है।

कब और किस प्रकार से इस भजन का अभ्यास करना चाहिए?

सुबह या शाम को इस भजन का जाप करना उचित है। ध्यान से बैठकर, वातावरण को शुद्ध करने के लिए एक दीया जलाना चाहिए। यह भक्ति को और तत्पर बनाता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 23 Aug 2026

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