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अंबे तू है जगदंबे काली आरती लोरिक्स (Ambe Tu Hai Jagdambe Kali Aarti Lyrics in Hindi) - By Anuradha Paudwal Ambe Bhajan - Bhaktilok

91 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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जगदंबे की कृपा: अंबे आरती का भव्य पाठ

शिव और शक्ति की महिमा का बखान करती इस आरती में माँ जगदंबे की स्तुति की गई है।

 अंबे तू है जगदंबे काली आरती लोरिक्स (Ambe Tu Hai Jagdambe Kali Aarti Lyrics in Hindi) - अंबे तू है जगदंबे कालीजय दुर्गे खप्पर वाली ।तेरे ही गुण गाये भारतीओ मैया हम सब उतरें तेरी आरती ॥तेरे भक्त जनो परभीर पडी है भारी माँ ।दानव दल पर टूट पडोमाँ करके सिंह सवारी ।सौ-सौ सिंहो से बलशालीअष्ट भुजाओ वालीदुष्टो को पलमे संहारती ।ओ मैया हम सब उतरें तेरी आरती ॥अंबे तू है जगदंबे कालीजय दुर्गे खप्पर वाली ।तेरे ही गुण गाये भारतीओ मैया हम सब उतरें तेरी आरती ॥माँ बेटे का है इस जग मेबडा ही निर्मल नाता ।पूत – कपूत सुने है पर नमाता सुनी कुमाता ॥सब पे करूणा दरसाने वालीअमृत बरसाने वालीदुखियो के दुखडे निवारती ।ओ मैया हम सब उतरें तेरी आरती ॥अंबे तू है जगदंबे कालीजय दुर्गे खप्पर वाली ।तेरे ही गुण गाये भारतीओ मैया हम सब उतरें तेरी आरती ॥नही मांगते धन और दौलतन चांदी न सोना माँ ।हम तो मांगे माँ तेरे मन मेइक छोटा सा कोना ॥सबकी बिगडी बनाने वालीलाज बचाने वालीसतियो के सत को सवांरती ।ओ मैया हम सब उतरें तेरी आरती ॥अंबे तू है जगदम्बे कालीजय दुर्गे खप्पर वाली ।तेरे ही गुण गाये भारतीओ मैया हम सब उतरें तेरी आरती ॥चरण शरण मे खडे तुम्हारीले पूजा की थाली ।वरद हस्त सर पर रख दोमॉ सकंट हरने वाली ।मॉ भर दो भक्ति रस प्यालीअष्ट भुजाओ वालीभक्तो के कारज तू ही सारती ।ओ मैया हम सब उतरें तेरी आरती ॥अंबे तू है जगदम्बे कालीजय दुर्गे खप्पर वाली ।तेरे ही गुण गाये भारतीओ मैया हम सब उतरें तेरी आरती ॥*** Singer - Anuradha Paudwal ***Also Read Maa Sherawali:- माँ बुलाती है (Maa Bulaati Hai Lyricsin Hindi) - by Sunny Hari Sherawali Bhajan - शेरावाली के भवन में छम छम नाचे लांगुरिया (Sherawali Ke Bhawan Mein cham Cham Nache Laguriya Lyrics in Hindi) - Sherawali Bhajan - 

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में माँ जगदंबे की महिमा का वर्णन किया गया है। 'अंबे तू है जगदंबे काली' का उद्घाटन करते हुए भक्त माँ की विविध शक्तियों का गुणगान करते हैं। मां को 'दुर्गे खप्पर वाली' के नाम से संबोधित किया गया है, जो उन्होंने अपनी बहादुरी और शक्ति के प्रतीक हैं। 'तेरे भक्त जनो पर भारी पडी है माँ' पंक्ति में भक्तों की दुर्दशा के संकेत हैं, जिन्हें माँ की कृपा की आवश्यकता है। आगे, 'दानव दल पर टूट पडो' का अर्थ है कि माँ अपनी शक्तियों के माध्यम से बुराई का नाश करती हैं और भक्तों को संकट से उबारती हैं। माँ की अष्ट भुजाओं का उल्लेख यह दर्शाता है कि वे सर्वसमर्थ हैं एवं दुष्टों का संहार करने में सक्षम हैं। इस आरती में मान्यता है कि माँ केवल शक्ति का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे करुणा, दया, और स्नेह की भी मूरत हैं, जो भक्तों के दुख को दूर करती हैं।

माँ जगदंबे का भक्तों के साथ अत्यंत गहरा संबंध है। आरती में इस भाव को स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है। 'माँ बेटे का है इस जग मे बड़ा ही निर्मल नाता' पंक्ति के माध्यम से माँ और भक्त के मधुर नाते को उजागर किया गया है। माँ की करुणा किसी भी भक्त का दुख मिटाने में सक्षम है। 'दुखियो के दुखडे निवारती' पंक्ति भक्तों की अनुकंपा की ओर इशारा करती है और यह दर्शाता है कि माँ उन सभी की समस्याओं का समाधान करती हैं। आरती के इस अंश में भावुकता का अभिव्यक्ति प्रमुख है। माँ की चरणों में समर्पण करके भक्त अपनी आस्था व्यक्त करते हैं और इसके माध्यम से संकीर्णता से मुक्ति की खोज करते हैं।

इस आरती में भक्ति मार्ग का एक गहरा दर्शन मिलता है। आरती का पाठ केवल एक धार्मिक कर्म नहीं है, बल्कि यह आत्मा का शुद्धिकरण भी है। 'नहीं मांगते धन और दौलत' का मतलब है कि भक्त केवल भक्ति और शांति की खोज में हैं, न कि भौतिक वस्तुओं के पीछे। माँ को समर्पित 'किसी एक छोटे से कोने' के लिए प्रार्थना करना यह दर्शाता है कि भक्त की आस्था कितनी सच्ची है। इसका निहितार्थ यह है कि सच्ची भक्ति में संपूर्ण आत्मा का समर्पण होना चाहिए। माँ को प्रसन्न करने का यह प्रयास हमें अध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस आरती का स्वत: ही एक विशाल पौराणिक संदर्भ है। माँ जगदंबे को देवी दुर्गा का अवतार माना जाता है, जो दुष्टों का संहार करती हैं। पौराणिक कथाओं में देवी दुर्गा की शक्ति का वर्णन मिलता है, जहां उन्होंने महिषासुर का वध किया। यह आरती उस शक्तिशाली माँ की आराधना करती है जो असुरों के खिलाफ अपने भक्तों की रक्षा करती हैं। महाभारत और पुराणों में माँ की महिमा का अत्यधिक वर्णन है, जो उन्हें अनेकों संकटों से उबारने वाली देवी के रूप में प्रस्तुत करता है। दुर्गा सप्तशती में माँ के असाधारण गुणों का उल्लेख मिलता है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। इस आरती का नियमित पाठ मानसिक शांत और सकारात्मक ऊर्जा को उत्पन्न करता है। इसके साथ माँ की भक्ति से व्यक्ति को मनोबल और आत्मविश्वास मिलता है। यह आरती भक्तजन के तनाव को कम करती है और आध्यात्मिक अनुभव में सुधार करती है। जब भक्त इस आरती का पाठ करते हैं, तो उन्हें आंतरिक सुख और शांति का अनुभव होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस आरती का पाठ सुबह के समय करना विशेष फलदायी माना जाता है। पूजा स्थल पर एक दीया जलाना, मीठे फल, या माँ की पसंदीदा वस्तुएं अर्पित करना उचित है। भक्त को ध्यानपूर्वक और शुद्ध मन से आरती का पाठ करना चाहिए। आरती के समय भक्त को एकाग्रता से बैठकर मानसिक रूप से माँ के चरणों में समर्पण करना चाहिए, जिससे पूर्ण मनोबल के साथ भक्ति स्थापित हो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

अंबे की आरती का अर्थ क्या है?

अंबे की आरती देवी दुर्गा या माँ जगदंबे की महिमा का वर्णन करती है। यह आरती भक्तों को उनके कष्टों से मुक्ति दिलाने और आशीर्वाद देने के लिए है।

इस आरती का पाठ किस समय करना चाहिए?

इस आरती का पाठ सुबह और संध्या के समय करना उत्तम होता है, क्योंकि इससे दिनभर सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

क्या इसे सुनने से भी लाभ होता है?

हाँ, अंबे की आरती सुनने से भक्तों को मानसिक शांति, खुशी, और आध्यात्मिक उन्नति का अनुभव होता है। यह सुनने से संजीवनी शक्ति भी मिलती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 21 Aug 2026

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