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मै दुखियारा धाम पे तेरे आ गया लिरिक्स (Mai Dukhiyara Dham Pe Tere aa Gaya Lyrics in Hindi) - Shiv Bhajan - Bhaktilok

88 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

 

मै दुखियारा धाम पे तेरे आ गया लिरिक्स (Mai Dukhiyara Dham Pe Tere aa Gaya Lyrics in Hindi) - 


दरबार तेरा है सबसे निराला 

तेरे दर्शन जो पाये 

हो जाये किस्मत वाला आ..आ .... 

सुन ले पुकार बाबा सुन ले पुकार 

मै दुखियारा धाम पे तेरे आ गया 

सुन ले पुकार बाबा सुन ले पुकार 


भटका हु मै दर दर मिला ना सहारा 

भोलेनाथ कब से द्वार तेरे आ गया 

मै दुखियारा नाम पे तेरे आ गया 

सुन ले पुकार बाबा सुन ले पुकार 


अपनों ने ठुकराया तु अपना ले ना 

आया तेरे शरण मुझे अपना बना लेना 

तेरे सिवा अब कोई नहीं बाबा मेरा 

मुझ को भरोसा इस दुनिया में बस तेरा 


अपनों ने ठुकराया तु अपना ले ना 

आया तेरे शरण मुझे अपना बना लेना 

दया का तु सागर भोले नाथ बाबा 

सर को झुकाकर तेर चरणों में आ गया 

मै दुखियारा नाम पे तेरे आ गया 

सुन ले पुकार बाबा सुन ले पुकार 


भोले नाथ बाबा ...सुन ले पुकार 

सुन ले पुकार ...


मैंने सुनी है महिमा तेरे नाम कि

सुन्दर पावन उज्जैन वाले धाम कि 

अवतारी तु भोला डमरू वाला है 

तूने ही सारी सृष्टि को संभाला है 


मैंने सुनी है महिमा तेरे नाम कि

सुन्दर पावन उज्जैन वाले धाम कि 

बिगड़ा नसीबा मेरा बनादे 

यही आस लेके तेरे दरबार आ गया 

मै दुखियारा नाम पे तेरे आ गया 

सुन ले पुकार बाबा सुन ले पुकार 


नजरे करम कि करदे बस एक बार तु 

दे दे मुझको थोडा सा बस प्यार तु 

रहू सदा तेरे दर का बनकर गुलाम 

गाऊ तेरी महिमा सुबह और श्याम


नजरे करम कि करदे बस एक बार तु 

दे दे मुझको थोडा सा बस प्यार तु 

चरणों कि धूलि माथे से लगाले

भोलेनाथ कब से द्वार तेरे आ गया 

मै दुखियारा नाम पे तेरे आ गया 

सुन ले पुकार बाबा सुन ले पुकार 



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भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

देवादिदेव महादेव को समर्पित यह भजन "मै दुखियारा धाम पे तेरे आ गया लिरिक्स (Mai Dukhiyara Dham Pe Tere aa Gaya Lyrics in Hindi) - Shiv Bhajan - Bhaktilok" भगवान शिव के कल्याणकारी और वैराग्यपूर्ण रूप का सजीव चित्रण करता है। शिव का अर्थ ही कल्याण है। इस भजन के शब्दों के माध्यम से साधक शिव की अनंत चेतना, भस्म आरती, डमरू की ध्वनि और ध्यानमग्न मुद्रा का ध्यान करता है।

शिव भक्ति का मूल सिद्धांत यही है कि जगत की प्रत्येक नश्वर वस्तु का अंत शिव में ही होना है। यह भजन भक्त को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर आत्मा के वास्तविक स्वरूप को पहचानने की प्रेरणा देता है। शिव का नाम पंचमहाभूतों को नियंत्रित करने वाली परम शक्ति का प्रतीक है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव अत्यंत भोले हैं और साधारण जल तथा बेलपत्र अर्पण करने मात्र से भी प्रसन्न हो जाते हैं। इस शिव भजन का संकीर्तन करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और कुंडली के ग्रहों के दोष शांत होते हैं।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। नियमित शिव भजन और पंचाक्षरी मंत्र (ॐ नमः शिवाय) के जप से तनाव का नाश होता है, अवसाद दूर होता है और अंतर्मन में अपूर्व शांति का उदय होता है। यह आरोग्य और दीर्घायु प्रदान करने में भी सहायक है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

शिव संकीर्तन के लिए प्रदोष काल (संध्या समय) अथवा सोमवार का दिन सर्वोत्तम माना जाता है। उत्तर दिशा की ओर मुख करके कुशासन पर बैठकर शिवजी का ध्यान करते हुए भजन गाएं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भगवान शिव को शीघ्र प्रसन्न करने की सरल विधि क्या है?

शुद्ध जल, बेलपत्र, धतूरा अर्पित करते हुए श्रद्धापूर्वक शिव मंत्र अथवा भजनों का संकीर्तन करने से महादेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

शिव भजनों के लिए कौन सा दिन विशेष है?

सोमवार, प्रदोष व्रत की तिथि और महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की उपासना और भजन संकीर्तन के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

क्या शिव जी की उपासना से कुंडली के दोष दूर होते हैं?

हाँ, भगवान शिव (महाकाल) की आराधना से कालसर्प दोष, राहु-केतु दोष और शनि जनित कष्टों का निवारण होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 22 Aug 2026

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