आज का पंचांग | सूर्योदय: ०५:४५ AM | सूर्यास्त: ०६:५० PM
radha bhajan

ब्राह्मणी माता की आरती लिरिक्स (Brahmacharini Mata Ki Aarti Lyrics in Hindi) - Om Jai Brahmani Mata Hindi Aarti - Bhaktilok

227 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
आकार:
कंट्रास्ट:

 

ब्राह्मणी माता की आरती लिरिक्स (Brahmacharini Mata Ki Aarti Lyrics in Hindi) - 


जय ब्रम्चारिणी माँ

मैया जय ब्रम्चारिणी माँ ।

अपने भक्त जानो पर

करती सदा दया ।।

जय ब्रम्चारिणी माँ ।।


दर्शन अनुपम मधुरं

साधना रत रहती ।

शिव जी की आरधना

मैया सदा करती ।।


जय ब्रम्चारिणी माँ ।।


बाहिने हाथ कमंडल

दाहिने में माला ।

रूप जो त्रिमय अद्भुत

सुख देने वाला ।।


जय ब्रम्चारिणी माँ ।।


देवऋषि मुनि साधु

गुण माँ के गाते ।

शक्ति स्वरूपा मैया

सबकुछ तुझको ध्याते ।।


जय ब्रम्चारिणी माँ ।।


संजम तब वैराग्य

प्राणी वो पाता ।

ब्रम्चारिणी माँ को

निशिदिन जो ध्याता ।।


जय ब्रम्चारिणी माँ ।।


नवदुर्गाओं में मैया

दूजा तुम्हारा स्वरूप ।

स्वेत वस्त्र धारिणी माँ

ज्योतिर्मय तेरा रूप ।।


जय ब्रम्चारिणी माँ ।।


दूजे नवरात्रे मैया

जो तेरा व्रत धरे ।

करके दया जगजननी

तू उसको तारे ।।


जय ब्रम्चारिणी माँ ।।


शिव प्रिय शिवा ब्राह्मणी

हमपे दया करियो ।

बालक है तेरे ही

दया दृष्टि रखियो ।।


जय ब्रम्चारिणी माँ ।।


शरण तिहारी आये

ब्रम्हाणी माता ।

करुणा हमपे दिखाओ

शुभ फल की दाता ।।


जय ब्रम्चारिणी माँ ।।


माँ ब्रम्चारिणी की आरती

जो कोई गावे ।

कहत शिवानंद स्वामी

मनवांछित फल पावे ।।


जय ब्रम्चारिणी माँ ।।


जय ब्रम्चारिणी माँ

मैया जय ब्रम्चारिणी माँ ।

अपने भक्त जानो पर

करती सदा दया ।।



*** Singer:- Anuradha Paudwal ***


🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "ब्राह्मणी माता की आरती लिरिक्स (Brahmacharini Mata Ki Aarti Lyrics in Hindi) - Om Jai Brahmani Mata Hindi Aarti - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 12 Aug 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!