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मां कूष्मांडा देवी की आरती लिरिक्स (Maa Kushmanda Devi Ki Aarti Lyrics in Hindi) - Khusmaanda Mata Aarti नवरात्रि चौथे दिन की आरती - Bhaktilok

103 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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कूष्मांडा देवी की आरती: भक्तों का संकट हरने वाली

कूष्मांडा देवी की आरती का यह पाठ श्रद्धा से करें, मनोकामनाएँ पूर्ण होंगी और मन में शांति का अनुभव होगा।

 मां कूष्मांडा देवी की आरती लिरिक्स (Maa Kushmanda Devi Ki Aarti Lyrics in Hindi) -पिगंला ज्वालामुखी निराली।शाकंबरी माँ भोली भाली॥लाखों नाम निराले तेरे ।भक्त कई मतवाले तेरे॥भीमा पर्वत पर है डेरा।स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥सबकी सुनती हो जगदंबे।सुख पहुँचती हो माँ अंबे॥तेरे दर्शन का मैं प्यासा।पूर्ण कर दो मेरी आशा॥माँ के मन में ममता भारी।क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥तेरे दर पर किया है डेरा।दूर करो माँ संकट मेरा॥मेरे कारज पूरे कर दो।मेरे तुम भंडारे भर दो॥तेरा दास तुझे ही ध्याए।भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥*** Singer: Anuradha Paudwal ***

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस आरती में मां कूष्मांडा की महिमा का वर्णन किया गया है, जो शक्ति और करुणा की प्रतीक हैं। पहले चरण में 'पिगंला ज्वालामुखी निराली' जैसे शब्दों द्वारा देवी की दिव्यता को दर्शाया गया है। यहां मां के विभिन्न नामों और उनके अद्भुत स्वरूपों का उल्लेख किया गया है। इस प्रकार भक्ति भाव से भरे भक्त इस आरती के माध्यम से मां से अपनी प्रतीकात्मक स्थलों को स्वीकारने और उनके दर पर प्रार्थना करने का संदेश देते हैं। इस आरती में यह भी कहा गया है कि मां का स्वरूप इतना विशाल और करुणामय है कि वह सबकी सुनती हैं और भक्तों के दुखों का निवारण करती हैं। इसके अलावा, भक्त की आस्था और ईश्वर में विश्वास का संदेश भी दिया गया है, यानी कि जैसे ही भक्त मां से प्रार्थना करते हैं, उन्हें आशीर्वाद मिलता है।

इसके भावार्थ को समझते हुए, प्रत्येक लाइन में मां की ममता और आशीर्वाद की गहराई को महसूस किया जा सकता है। 'तेरे दर्शन का मैं प्यासा' इस बात का प्रतीक है कि भक्त मां के दर्शन के लिए कितनी बेताब है और उनकी कृपा के लिए कितनी लालायित है। यह सिर्फ भक्ति की बात नहीं है, बल्कि मां के प्रति अटूट विश्वास और समर्पण की भी हर एक पंक्ति में झलक देखने को मिलती है। भक्त निवेदन करते हैं कि मां उनके संकटों को दूर करें और उनकी मनोकामनाओं को पूर्ण करें, जो यह दर्शाता है कि वे मां को अपनी सच्ची सहायक मानते हैं।

इस गाथा की आध्यात्मिक गहराई में भक्ति मार्ग का महत्वपूर्ण संदेश है। भक्ति के मार्ग पर चलना और पूर्ण आस्था से मां का ध्यान करना इस आरती का सार है। यहां मां का तात्पर्य सिर्फ देवी से नहीं है, बल्कि उस पूर्णता से है जिसमें भक्त अपनी दरकार के लिए आश्रय लेते हैं। इसके अलावा, यह आरती सभी भक्तों को प्रेरित करती है कि वे अपने कार्यों में मां की कृपा की तलाश करें, क्योंकि यह विश्वास ही उन्हें आत्मिक उन्नति की दिशा में ले जाएगा।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

कूष्मांडा देवी की आरती का एक गहरा महत्व है, खासकर नवरात्रि में, जब मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। विशेष रूप से चौथे दिन, मां कूष्मांडा का पूजन किया जाता है, जो सृष्टि की रचना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। मान्यता है कि अलौकिक शक्तियों वाले देवी कूष्मांडा ने अपने दिव्य हास्य से सृष्टि के आरंभ में अंधकार को दूर किया और इसे प्रकाश में परिवर्तित किया। उनके इस स्वरूप का वर्णन कई पुराणों में मिलता है, जहाँ वे सृष्टि, पालन, और संहार की अद्भुत शक्तियों की धारक मानी जाती हैं।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। कूष्मांडा देवी की आरती का पाठ मानसिक शांति और संतुलन लाने में सहायक होता है। नियमित रूप से इस आरती का पाठ करने से आंतरिक शक्ति में वृद्धि होती है, और भय और चिंता का निवारण होता है। इसके अलावा, भक्तों को मानसिक स्पष्टता और जीवन में सकारात्मकता का अनुभव होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस आरती का पाठ सुबह या शाम के समय किया जा सकता है, जब वातावरण अधिक शांत हो। आरती करते समय एक दीया जलाएं और मां को पुष्प, फल अर्पित करें। चित्त को शांत रखते हुए, श्रद्धा के साथ मंत्रों का उच्चारण करें। सही मनोदशा और ध्यान के साथ आरती करें ताकि मां की कृपा प्राप्त की जा सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

कूष्मांडा देवी की आरती का विशेष महत्व क्या है?

कूष्मांडा देवी की आरती का महत्व नवरात्रि में विशेष रूप से प्रगट होता है। इसे चौथे दिन किया जाता है, जो समस्त देवी स्वरूपों में से एक हैं, जो शक्ति, कृपा और सृष्टि का प्रतीक हैं।

इस आरती का पाठ करने से क्या लाभ होता है?

इस आरती का पाठ करने से मानसिक शांति, आंतरिक शक्ति में वृद्धि और संकटों का निवारण होने का विश्वास माना जाता है। श्रद्धा से की गई आरती जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।

किस समय इस आरती का पाठ करना उचित है?

कूष्मांडा देवी की आरती का पाठ सुबह या शाम के समय करना सर्वोत्तम माना जाता है। इस समय वातावरण शांति और भक्ति के लिए अनुकूल होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 28 Aug 2026

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