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Holi Bhajan

भर दे रे श्याम झोली भर दे लिरिक्स (Bhar De Re Shyam Jholi Bhar De Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

59 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्याम की भक्ति: दया और कृपा के लिए प्रार्थना

श्याम के प्रति अटूट श्रद्धा व्यक्त करने वाला भजन, भक्ति का सच्चा माध्यम है।

भर दे रे श्याम झोली भर दे लिरिक्स (Bhar De Re Shyam Jholi Bhar De Lyrics in Hindi) - भरदे रे श्याम झोली भरदेभरदे ना बहला ओ बातों मेंना बहला ओ बातों में।।दिन बीते बीती रातेंअपनी कितनी हुई रे मुलाकातेंतुझे जाना पहचानातेरे झूठे हुए रे सारे वादेभूले रे श्याम तुम तो भूलेक्या रखा है बातों मेंभर दे रे श्याम झोली भरदे।।नादान है अनजान हैंश्याम तू ही मेरा भगवान हैतुझे चाहूं तुझे पाऊंमेरे दिल का यही अरमान हैपढ़ ले रे श्याम दिल की पढ़लेसब लिखा है आंखों मेंभरदे रे श्याम झोली भरदे।।मेरी नैया ओ कन्हैयापार करदे तू बनके खिवैयामैं तो हारा गम का माराआजा आजा ओ बंशी के बजैयालेले रे श्याम अब तो लेलेलेले मेरा हाथ हाथों मेंभर दे रे श्याम झोली भरदे।।मैं हूं तेरा तू है मेरामैंने डाला तेरे दर पे डेरामुझे आस है विश्वास हैश्याम भर देगा दामन तु मेराझूमें रे श्याम ‘नन्दू’ झूमेंझूमें तेरी बांहों मेंभर दे रे श्याम झोली भरदे।।भरदे रे श्याम झोली भरदेभरदे ना बहला ओ बातों मेंना बहला ओ बातों में।।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय है भक्त की श्याम के प्रति विशेष प्यार और उसकी कृपा की कामना। भजन में कहा गया है कि भक्त की झोली यानि जीवन में खुशी, समृद्धि और सुख के लिए श्याम की कृपा का संदेश है। 'भर दे रे श्याम झोली भर दे' का आशय है कि भक्त अपने जीवन के सभी दुःख और निराशाओं से उबरना चाहता है और इसमें श्याम की रहमती की बहुत आवश्यकता है। 'तुझे जाना पहचानते' वाक्य से यह स्पष्ट होता है कि भक्त और श्याम के बीच एक गहरा संबंध है। भक्त श्याम को अपने जीवन का पालनकर्ता मानता है। 'दिन बीते बीती रातें' वो समय है जो भक्त ने अपने प्रिय सखा के बिना बिताया है, जिसमे वह उनकी मौजूदगी की कद्र करता है। श्याम की झूठे वादों का जिक्र भक्त की भ्रम और विश्वास के द्वंद्व को दर्शाता है।

भक्ति के इस चित्रण में गहरी भावनाएँ छिपी हैं। यह भजन श्याम के प्रति अनन्य प्रेम, भरोसा और अज्ञेयता का संकेत है। 'मैं तो हारा गम का मारा' इस वाक्य में भक्त की दुख और कष्ट का बयान किया गया है। वो श्याम से कृपा की याचना कर रहा है ताकि उसकी नैया पार हो सके। भक्त न केवल श्याम को भगवान मानता है, बल्कि यह भी अपेक्षा रखता है कि कमजोरियों के बावजूद वह उसकी विशुद्ध इच्छा और प्यार को समझे। श्याम के साथ सम्बन्ध की यह अहसास अनकही भावनाओं को स्पष्ट करती है। 'तू बनके खिवैया' ये संकेत करता है कि श्याम न केवल एक दिव्य शक्ति है, बल्कि वह अपने भक्त को जीवन के हर मोड़ पर संजीवनी देने वाली शक्ति है।

इस भजन में भक्ति मार्ग की गहराई को समझा जा सकता है। भक्त का श्याम के प्रति समर्पण और प्रेम ही इस मार्ग का परिभाषा है। 'मैं हूं तेरा तू है मेरा' यह वाक्य आत्मा की एकता और एक-दूसरे में विलीन होने के भाव को दर्शाता है। यह भक्ति के सच्चे अर्थ को स्पष्ट करता है कि भक्त अपने ईश्वर में विलीन हो जाता है। भक्त श्याम को न केवल एक देवता, बल्कि दिव्य प्रेम और दया का स्रोत मानता है। इस प्रकार, यह भजन उन सभी के लिए एक निर्देश है जो अपने भीतर प्रेम और भक्ति को विकसित करना चाहते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व भारतीय पौराणिक कथाओं, विशेषकर श्री कृष्ण के जीवन में गहराई से निहित है। कृष्ण को श्याम के नाम से संदर्भित किया गया है, जो उनके रंग और व्यक्तित्व की पहचान है। श्री कृष्ण की लीलाओं का वर्णन महाभारत और भागवत पुराण में हुआ है। भक्तों के लिए यह भजन उनके विभिन्न रूपों में कृष्ण की भक्ति को व्यक्त करता है। भारतीय संस्कृति में, श्याम की पूजा प्रेम और भक्ति का प्रतीक मानी जाती है। यह भजन भक्ति के मार्ग को स्पष्ट करता है, जिसमें प्रेम और विश्वास का सरलता से समावेश होता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप मानसिक शांति, आध्यात्मिक संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा का संवर्धन करता है। यह भक्तों को अपने विचारों को केन्द्रित करने में मदद करता है, जिससे वे अपने जीवन की कठिनाइयों को समझने और पार करने में सक्षम होते हैं। नियमित रूप से इस भजन का गान करने से आत्मविश्वास बढ़ता है और आंतरिक बल की प्राप्ति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का गायन सुबह या शाम के समय किया जाना चाहिए, जब वातावरण शांत हो। भक्ति भाव से दीया जलाकर, फूलों का आभूषण अर्पित करके और ध्यान की मुद्रा में सुनने या गाने से भजन का प्रभाव बढ़ता है। भक्त को शुद्ध मन से, श्याम के प्रति प्रेम और समर्पण के साथ इस भजन का जाप करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन को गाने का उद्देश्य क्या है?

इस भजन का उद्देश्य श्याम के प्रति भक्ति और प्रेम का प्रदर्शन करना है, साथ ही उनके प्रति विश्वास मजबूत करना है।

कौन सी अवस्थाओं में इस भजन का जाप किया जा सकता है?

इस भजन का जाप किसी भी दुख-दर्द या कठिनाई में किया जा सकता है, जो कि भक्त को मानसिक शक्ति देने में मदद करता है।

क्या इस भजन का गान नियमित करना लाभकारी है?

हां, नियमित रूप से इस भजन का गान करने से मानसिक शांति और स्थिरता का अनुभव होता है, जो जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 29 Aug 2026

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