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Rani Sati Dadi Bhajan

दादी माँ लायो थारो चुंदड़ी लिरिक्स (Dadi maa layo tharo chundadi Lyrics in Hindi) - Rani Sati Dadi Bhajan - Bhaktilok

75 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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दादी माँ की अद्भुत कृपा और भक्ति

यह भजन दादी माँ की पूजा एवं उनके प्रति असीम भक्ति का सार है, इसे श्रद्धा से गाएं।

दादी माँ लायो थारो चुंदड़ी लिरिक्स (Dadi maa layo tharo chundadi Lyrics in Hindi) - दादी थारे दरबार थारो टाबर आयो लाल रंग की चुंदड़ी जयपुर ते लायोथाने उड़ावन खातिर चन्दड़ी लायोलाल रंग की चुंदड़ी जयपुर ते लायोचुंदड़ी सितारों जडी मोती चमकेगोटा और किनारी मैया किरण दमकेथाने चुंदड़ी उड़ाऊ करो मन चाहयो लाल रंग की चुंदड़ी जयपुर ते लायो……..2झुन्झुनू बुलावो म्हाने बारम्बार माँमनडे ने भा गयो प्यारो द्वार माँथारे मन्दिरये के शिखर पे झंडो लहरायोलाल रंग की चुंदड़ी जयपुर ते लायो……..2ममता की मूरत म्हारी दादी रानी माँगुण थारो गाऊ करदो पावन वाणी माँपेड़े भोग लगाऊ घर को मावो कड़वायोलाल रंग की चुंदड़ी जयपुर ते लायो……..2कृपा का हाथ म्हारे शीश धरईयो शक्ति भक्ति देके माँ निहाल करियोभूलन हरीश ने सेवा में चित लायोलाल रंग की चुंदड़ी जयपुर ते लायो……..2

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन 'दादी माँ लायो थारो चुंदड़ी' में दादी माँ के प्रति गहरी श्रद्धा और भक्ति दर्शाई गई है। यह भजन एक समर्पण और प्रेम का प्रतीक है, जिसमें भक्त आशा करते हैं कि दादी माँ उनकी जीवन की कठिनाइयों को दूर करेंगी। 'लाल रंग की चुंदड़ी जयपुर ते लायो' यह इंगित करती है कि भक्त अपनी दादी माँ को महत्त्वपूर्ण वस्त्र अर्पित कर रहे हैं, जो प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। उत्कर्ष एवं आशीर्वाद की प्रतीकीकरण के रूप में 'चंदड़ी सितारों जड़ी मोती चमके' का प्रयोग किया गया है, जो दादी माँ की दिव्यता और आशीर्वाद की चमक को दर्शाता है।

भजन के विभिन्न अंश भक्त की भावनाओं और तीव्रता को प्रकट करते हैं। जैसे कि 'झुन्झुनू बुलावो म्हाने बारम्बार माँ', यहाँ भक्त दादी माँ को बार-बार बुला रहे हैं, जो दादी माँ के प्रति आस्था और उत्कृष्ट भावनाओं को दर्शाता है। यह निश्चित करता है कि दादी माँ की कृपा हमेशा सदैव उनके ऊपर बनी रहे। 'कृपा का हाथ म्हारे शीश धरईयो' यहाँ पर भक्ति की गहराई व्यक्त होती है, जिसमें भक्त अपने शीश को दादी माँ के पास करते हैं, अपनी समर्पण भावना को दर्शाते हुए वह उनकी आशीर्वाद की कामना करते हैं।

यह भजन भक्तिपथ की एक अद्वितीय परिभाषा प्रस्तुत करता है। भक्त की भावना में दादी माँ के प्रति आदर, प्रेम, और समर्पण की गहराई है। भक्ति मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति केवल वस्तुओं की पूजा नहीं करता, बल्कि सच्चे मन और भाव से अपने इष्ट देवता के प्रति समर्पण करता है। 'ममता की मूरत म्हारी दादी रानी' इस पंक्ति में दादी माँ को ममता का स्वरूप स्वरूप में दिखाया गया है, जो इस भक्ति मार्ग की विशेषता है कि जब भी मनुष्य अपने ईश्वर की सेवा करता है, वह सच्चे प्रेम और श्रद्धा के साथ करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन माँ दादी रानी की पूजा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो कृष्ण, राम, और विभिन्न पौराणिक कथाओं में माता की भूमिका की याद दिलाता है। दादी माँ का उल्लेख भारतीय संस्कृति में ममता, दया, और करुणा का प्रतीक है। कई पुराणों में माँ के प्रति भक्ति को सर्वोच्च माना गया है और उदाहरणस्वरूप, देवी भागवत में माँ की शक्ति एवं प्रेम का वर्णन मिलता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का गायन मन की शांति, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। यह मानसिक तनाव को कम करने, आध्यात्मिक विकास में मदद करता है, और भक्त को अपने जीवन में संतुलन और आत्म-संतोष लाने में सहायता करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का गायन प्रात:काल या संध्या समय में करना श्रेयस्कर होता है। पूजा करते समय दीप जलाना और फूलों का अर्पण करना शुभ माना जाता है। ध्यान मुद्रा में बैठकर या एकाग्रता से भजन गाना आवश्यक है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

दादी माँ कौन हैं और उनका महत्व क्या है?

दादी माँ भारतीय परंपरा में शक्ति और ममता का प्रतीक मानी जाती हैं। उन्हें भक्त श्रृष्टि की संरक्षक और सहायता देने वाली देवी के रूप में मानते हैं।

इस भजन को किस प्रकार से गाया जाना चाहिए?

इस भजन को ध्यान लगाकर, प्रेम और श्रद्धा के साथ गाना चाहिए। शांत वातावरण में एकाग्रता से गाने से इसका प्रभाव अधिक होता है।

इस भजन के लाभ क्या हैं?

यह भजन मानसिक शांति, भक्ति में वृद्धि, और आत्मिक साक्षात्कार के लिए लाभकारी है। नियमित गायन से भक्त की जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आ सकते हैं।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 29 Aug 2026

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