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हरि नाम के रस को पी पी कर आनंद में जीना सिख लिया लिरिक्स (Hari Nam Ke Ras Ko Pi Pi Kar Aanand Me Jeena Seekh Liya Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

68 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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हरि नाम रस: भक्ति में आनंद का अनुभव

हरि नाम के अमृत को पीकर आनंद से जीवन जीने की साधना का यह भजन आपके मन को प्रसन्नता प्रदान करेगा।

हरि नाम के रस को पी पी कर आनंद में जीना सीख लिया हरि नाम के रस को पी पी कर आनंद में जीना सीख लिया आनंद में जीना सीख लिया आनंद में जीना सीख लिया प्रभु प्रेम प्याला सत्संग में जाकर के पीना सीख लिया हरि नाम के रस को पी पी कर आनंद में जीना सीख लिया।। हरी नाम की मस्ती अनोखी है पी करके हमने देखी हैं सब चिंताओं को छोड़ के अब मस्ती में रहना सीख लिया हरि नाम के रस को पी पी कर आनंद में जीना सीख लिया।। पीकर के आनंद आता है यह झूठा जग नहीं भाता है तुम भी थोड़ी सी पिया करो यह सब से कहना सीख लिया हरि नाम के रस को पी पी कर आनंद में जीना सीख लिया।। हरि नाम में चूर जो रहते हैं माया से दूर वो रहते हैं हरी याद रहे हर पल हमको प्रभु नाम को जपना सीख लिया हरि नाम के रस को पी पी कर आनंद में जीना सीख लिया।। कहना यह ‘चित्र विचित्र’ का है मुश्किल से मिलता मौका है हरि नाम के पागल बन जाओ सब को समझाना सीख लिया हरि नाम के रस को पी पी कर आनंद में जीना सीख लिया।। हरि नाम के रस को पी पी कर आनंद में जीना सीख लिया हरि नाम के रस को पी पी कर आनंद में जीना सीख लिया आनंद में जीना सीख लिया आनंद में जीना सीख लिया प्रभु प्रेम प्याला सत्संग में जाकर के पीना सीख लिया हरि नाम के रस को पी पी कर आनंद में जीना सीख लिया।।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय हरि नाम के रस को पीकर आनंद में जीना है। हरि नाम का उच्चारण एक विशेष प्रकार की भक्ति और आनंद का अनुभव कराता है। 'हरि नाम के रस को पी पी कर आनंद में जीना सीख लिया' इस पंक्ति में यह स्पष्ट किया गया है कि सच्चे भक्त अपनी साधना से हरि नाम का रस चखते हैं, जिससे उन्हें मानसिक शांति और आनंद की प्राप्ति होती है। प्रभु प्रेम प्याला का उल्लेख इस बात की ओर इशारा करता है कि जब हम सत्संग में भाग लेते हैं और एकत्रित होकर हरि का नाम लेते हैं, तो वास्तविक प्रभु प्रेम का अनुभव होता है। ऐसा प्रेम सभी चिंताओं से परे ले जाता है और भक्त को परम आनंद में डुबो देता है।

भावार्थ की दृष्टि से, यह भजन भक्तों को यह प्रेरणा देता है कि संसार की परिस्थितियों की चिंता छोड़कर, हरि नाम का जाप करने से मन को शांति और सच्चे आनंद की अनुभूति होती है। 'पीकर के आनंद आता है, यह झूठा जग नहीं भाता है' से स्पष्ट होता है कि भक्ति का सचमुच का आनंद संसार के माया के झूठे सुखों से कहीं ऊँचा है। जब भक्त हरि नाम में डूब जाता है, तो वह आध्यात्मिक बदली में हर पल हरि को याद करता है, और इस प्रकार माया की बेड़ियों से मुक्त होता है। भजन का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू 'हरि नाम के पागल बन जाओ' है, जो कि यह बताता है कि जब हम पूरी तरह से हरि नाम में लीन होते हैं तो हमें संसार की भौतिकता से कोई लेना-देना नहीं रह जाता।

यह भजन भक्ति मार्ग की महत्वपूर्णता को भी उजागर करता है, जिसमें हरि नाम का जाप और सत्संग का विशेष स्थान है। हिन्दू धर्म में भक्ति की परंपरा का गर्व है, जिसके अंतर्गत भक्त विभिन्न रूपों में अपने इष्ट देवता को समर्पित होकर नाम जपते हैं। इस भजन में हरि नाम का रस पीकर जीवन जीने की प्रेरणा दी गई है, जो भक्ति में गहराई और आत्मिक शांति का मार्ग दर्शाता है। यह भक्ति का सार यही है कि जब भक्त हरि नाम का जप करते हैं, तो वह अपने जीवन में स्थायी आनंद और शांति पाने में सक्षम होते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्वपूर्ण स्थान है क्योंकि यह भक्तों को भक्ति और साधना के माध्यम से परमात्मा के अनुग्रह को समझाता है। पुराणों में भी भक्ति मार्ग की महिमा का विस्तार से विवेचन किया गया है। महाभारत में युधिष्ठिर के द्वारा हरि के नाम का जाप करके कठिनाईयों से मुक्ति पाने का उल्लेख मिलता है। इसके अलावा, उपनिषदों में भी सच्चे आत्मज्ञान की प्राप्ति का मार्ग भक्ति के माध्यम से ही दर्शाया गया है। यह भजन उसी तत्व का अनुसरण करते हुए भक्तों को प्रेरित करता है कि उन्हें प्रार्थना और भक्ति से परमात्मा का अनुभव करना चाहिए।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का ध्यान करने से मानसिक तनाव में कमी आती है और आत्मिक ऊर्जा का संचार होता है। हरि नाम का जाप करने से मानव के भीतर से नकारात्मकता समाप्त होती है और सकारात्मकता का संचार होता है। यह मानसिक स्थिति को स्थिर बनाकर भक्त को शांति प्रदान करता है, जिससे जीवन का प्रत्येक क्षण आनंदमय हो उठता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का गायन सुबह सूर्योदय के समय या शाम के समय करना श्रेष्ठ है। पूजा स्थल पर एक दीप जलाएं और स्वच्छ मन से इस भजन का उच्चारण करें। मन में भक्ति, श्रद्धा और अद्भुत प्रेम के भाव रखें ताकि हरि नाम का रस सच्ची अनुभूति के साथ प्राप्त हो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का अर्थ क्या है?

यह भजन हरि नाम की महिमा और इसके रस का अनुभव कराने का संदेश देता है। भक्तों को आनंद में जीने की प्रेरणा दी जाती है।

किस समय इस भजन का जप करना चाहिए?

सुबह या शाम के समय इस भजन का जप करना उत्तम माना जाता है। यह मन को शांति और सकारात्मकता प्रदान करता है।

हरि नाम के महत्व के पीछे क्या तर्क है?

हरि नाम का जप श्रद्धा के साथ करने से आत्मिक उन्नति होती है और भक्त माया से मुक्त होकर परम आनंद का अनुभव करते हैं।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 30 Aug 2026

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