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वो श्याम धणी मेरा हाँ शीश का दानी है (Wo Shyam Dhani Mera Sheesh Ka Dhani Hai Lyrics in Hindi) | Rohit Rajput - Bhaktilok

177 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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वो श्याम धणी मेरा हाँ शीश का दानी है (Wo Shyam Dhani Mera Sheesh Ka Dhani Hai Lyrics in Hindi) | Rohit Rajput - 


Song: वो श्याम धणी मेरा हाँ शीश का दानी है (Wo Shyam Dhani Mera Sheesh Ka Dhani Hai Lyrics in Hindi)

Singer: Rohit Rajput (9910813070)

Music: Gautam Arora

Lyrics: Smarth Jammu Wala 

Director, DOP & Editor: KD Kashyap

Video: Soch Productions

Blessings: Mahant Hari Bhai Ji & Ustad Kuldeep Singh Ji 

Category: Shyam Bhajan

Producers: Ramit Mathur

Label: Yuki


वो श्याम धणी मेरा हाँ शीश का दानी है (Wo Shyam Dhani Mera Sheesh Ka Dhani Hai Lyrics in Hindi):- 


जिसे पूजे सारा ज़माना ये दुनिया दीवानी है 

वो श्याम धणी मेरा हाँ शीश का दानी है 

हाँ तीन बाणधारी जो इसकी निशानी है 

वो श्याम धणी मेरा हाँ शीश का दानी है 


हारे का सहारा मेरा श्याम धणी कहलाये 

चरणों से लगा ले जो भी इसके दर पे आये 

अपने भक्तों की दूर कर देता परेशानी है 

वो श्याम धणी मेरा हाँ शीश का दानी है 


एक इशारे पे तूने शीश का दान किया था 

मुरली वाले ने वर में तुझे श्याम का नाम दिया था 

सारे जगत में जिसका कोई ना सानी है 

वो श्याम धणी मेरा हाँ शीश का दानी है 


सारे जग में गूँज रहा है बाबा तेरा नाम 

समर्थ जम्मू वाला रोहित आये तेरे धाम 

तेरे नाम कर दी बाबा सारी ज़िंदगानी है 

वो श्याम धणी मेरा हाँ शीश का दानी है 

 

🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "वो श्याम धणी मेरा हाँ शीश का दानी है (Wo Shyam Dhani Mera Sheesh Ka Dhani Hai Lyrics in Hindi) | Rohit Rajput - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 14 Aug 2026

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