गोविंदा हरि गोविंदा (Govinda Hari Govinda Lyrics in Hindi) -
गोविंदा... गोविंदा...
गोविंदा... गोविंदा...
श्री श्रीनिवास गोविंदा
श्री वेंकटेश गोविंदा
भक्तवत्सल गोविंदा
भगवत्प्रिय गोविंदा
गोविंदा हरि गोविंदा
वेंकटरमन गोविंदा.||2||
नित्यनिर्मला गोविंदा
नीलमेघस्याम गोविंदा
पुराणपुरुष गोविंदा
पुंडरीकाक्ष गोविंदा
गोविंदा हरि गोविंदा
वेंकटरमन गोविंदा.||2||
नंदनंदन गोविंदा
नवनीता चोरा गोविंदा
पशुपालक श्री गोविंदा
पापाविमोचना गोविंदा
गोविंदा हरि गोविंदा
वेंकटरमन गोविंदा.||2||
दुष्टसंहारा गोविंदा
दुरिता निवारण गोविंदा
शिष्ट परिपालक गोविंदा
कष्ट निवारण गोविंदा
गोविंदा हरि गोविंदा
वेंकटरमन गोविंदा.||2||
वज्रमकूटधारा गोविंदा
वराहमूर्ति गोविंदा
गोपीजनलोला गोविंदा
गोवर्धनोद्धारा गोविंदा
गोविंदा हरि गोविंदा
वेंकटरमन गोविंदा.||2||
दशरथनन्दन गोविंदा
दशमुख मर्दाना गोविंदा
पक्षीवाहन गोविंदा
पांडवप्रिय गोविंदा
गोविंदा हरि गोविंदा
वेंकटरमन गोविंदा.||2||
मत्स्य कूर्म गोविंदा
मधुसूदन हरि गोविंदा
वराह नरसिम्हा गोविंदा
वामन ब्रुघुराम गोविंदा
गोविंदा हरि गोविंदा
वेंकटरमन गोविंदा.||2||
बलरामानुज गोविंदा
बहुधा कल्किधर गोविंदा
वेणुगणप्रिय गोविंदा
वेंकटरमन गोविंदा
गोविंदा हरि गोविंदा
वेंकटरमन गोविंदा.||2||
सीतानायक गोविंदा
श्रीतापरिपालक गोविंदा
दरिद्राजनपोषक गोविंदा
धर्मसंस्थापक गोविंदा
गोविंदा हरि गोविंदा
वेंकटरमन गोविंदा.||2||
अनाथ रक्षक गोविंदा
आपद्भाण्डव गोविंदा
शरणगतवत्सल गोविंदा
करुणासागर गोविंदा
गोविंदा हरि गोविंदा
वेंकटरमन गोविंदा.||2||
कमलादलक्ष गोविंदा
कामिताफलदाता गोविंदा
पापविनासाका गोविंदा
पाहि मुरारे गोविंदा
गोविंदा हरि गोविंदा
वेंकटरमन गोविंदा.||2||
श्रीमुद्रंकिता गोविंदा
श्रीवत्संकिता गोविंदा
धरणीनायक गोविंदा
दिनाकरतेजा गोविंदा
गोविंदा हरि गोविंदा
वेंकटरमन गोविंदा.||2||
पद्मावतीप्रिय गोविंदा
प्रसन्नमूर्ति गोविंदा
अभयहस्ता प्रदर्शन गोविंदा
गोविंदा हरि गोविंदा
वेंकटरमन गोविंदा.||2||
शंखचक्रधर गोविंदा
सरंगजा गधादरा गोविंदा
विराजतीरस्थ गोविंदा
विरुद्धिमार्धन गोविंदा
गोविंदा हरि गोविंदा
वेंकटरमन गोविंदा.||2||
सहस्रनाम गोविंदा
सरसिजानयना गोविंदा
लक्ष्मीवल्लभ गोविंदा
लक्ष्मणराज गोविंदा
गोविंदा हरि गोविंदा
वेंकटरमन गोविंदा.||2||
कस्तूरीतिलका गोविंदा
कंचनांबरधारा गोविंदा
गरुड़वाहन गोविंदा
गनालोला गोविंदा
गोविंदा हरि गोविंदा
वेंकटरमन गोविंदा.||2||
वनरसेविता गोविंदा
वाराधिबंधन गोविंदा
एकस्वरुप गोविंदा
सप्त गिरीश गोविंदा
गोविंदा हरि गोविंदा
वेंकटरमन गोविंदा.||2||
श्री राम कृष्ण गोविंदा
रघुकुला नंदन गोविंदा
प्रत्यक्षदेव गोविंदा
परमदायकर गोविंदा
गोविंदा हरि गोविंदा
वेंकटरमन गोविंदा.||2||
वज्र कवचधर गोविंदा
वैभव मूर्ति गोविंदा
रत्न किरिदा गोविंदा
वासुदेवतनया गोविंदा
गोविंदा हरि गोविंदा
वेंकटरमन गोविंदा.||2||
ब्रह्माण्डरूप गोविंदा
भक्तरक्षक गोविंदा
नित्यकल्याण गोविंदा
नीरजनाभ गोविंदा
गोविंदा हरि गोविंदा
वेंकटरमन गोविंदा.||2||
आनंदरूप गोविंदा
आद्यन्तराहित गोविंदा
इहपरादायक गोविंदा
इभाराजरक्षक गोविंदा
गोविंदा हरि गोविंदा
वेंकटरमन गोविंदा.||2||
शेषशायिनी गोविंदा
शेषाद्रिनिलय गोविंदा
सिरनिवासा गोविंदा
श्री वेंकटेश गोविंदा
गोविंदा हरि गोविंदा
वेंकटरमण गोविंदा .||3||
🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "गोविंदा हरि गोविंदा (Govinda Hari Govinda Lyrics in Hindi) - Hari Bhajan - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

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