हरी ॐ साईं ॐ चंदन का तूने तिलक लगाया लिरिक्स (Hari om Sai om Chandan ka Tune Tilak Lagaya Lyrics in Hindi) -
हरी ॐ हरी ॐ साईं ॐ साईं ॐ
साईं ॐ साईं ॐ साईं ॐ साईं ॐ
चंदन का तूने तिलक लगाया
पानी से तूने दीपक जलाया
दूर से देखा तो दीपक जला था
वो तो अपना साई बाबा था
शिर्डी के बाबा साईं रे
मुझे अपना रूप दिखायी दे
हरी ॐ हरी ॐ साईं ॐ साईं ॐ
साईं ॐ साईं ॐ साईं ॐ साईं ॐ
काशी भी देखी मथुरा भी देखा
शिरडी न देखी तो क्या तूने देखा
दूर से देखा तो पत्थर पड़ा था
वो तो अपना साईं बाबा था
शिर्डी के बाबा साईं रे
मुझे अपना रूप दिखायी दे
हरी ॐ हरी ॐ साईं ॐ साईं ॐ
साईं ॐ साईं ॐ साईं ॐ साईं ॐ
तूँ है दाता तूँ है विधाता
तूँ है पिता और तुम्ही हो माता
तूने सब की विगड़ी बनाई
मेरी भी विगड़ी बना दे ओ साई
शिर्डी के बाबा साईं रे
मुझे अपना रूप दिखायी दे
हरी ॐ हरी ॐ साईं ॐ साईं ॐ
साईं ॐ साईं ॐ साईं ॐ साईं ॐ
सत्य पे चलना तूने सिखाया
कौन है अपना कौन पराया
जीने की सच्ची राह दिखाई
भक्ति की मन में ज्योत जलाई
शिर्डी के बाबा साईं रे
मुझे अपना रूप दिखायी दे
हरी ॐ हरी ॐ साईं ॐ साईं ॐ
साईं ॐ साईं ॐ साईं ॐ साईं ॐ
शिरडी को तूने स्वर्ग बनाया
श्रद्धा सबूरी का मंत्र सुनाया
तेरी महिमा की है बलिहारी
पूज रहे तुझे नर और नारी
शिर्डी के बाबा साईं रे
मुझे अपना रूप दिखायी दे
हरी ॐ हरी ॐ साईं ॐ साईं ॐ
साईं ॐ साईं ॐ साईं ॐ साईं ॐ
अंधों को तूने ज्योति दिलाई
भूखे को तूने रोटी दिलाई
कोढ़ी को तूने काया दिलाई
क्या कहूँ तेरी लीला है न्यारी
शिर्डी के बाबा साईं रे
मुझे अपना रूप दिखायी दे
हरी ॐ हरी ॐ साईं ॐ साईं ॐ
साईं ॐ साईं ॐ साईं ॐ साईं ॐ ||
*** Singer - Vijay Soni ***
🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)
शिरडी के साईं बाबा को समर्पित यह भजन "हरी ॐ साईं ॐ चंदन का तूने तिलक लगाया लिरिक्स (Hari om Sai om Chandan ka Tune Tilak Lagaya Lyrics in Hindi) - Sai bHajan - Bhaktilok" सबका मालिक एक होने के सिद्धांत को प्रतिपादित करता है। साईं बाबा का जीवन काल सादगी, प्रेम, सहिष्णुता और मानवता का संदेश देता है। इस भजन की सरल पंक्तियां भक्त को सीधे बाबा के दिव्य आशीर्वाद और करुणा से जोड़ती हैं।
भजन का मुख्य भाव श्रद्धा और सबूरी (धैर्य) का है। साईं बाबा अपने भक्तों को वचन देते हैं कि जो भी उनके द्वार पर आएगा, वह कभी खाली हाथ नहीं जाएगा। बाबा की उदी (भस्म) और उनके वचनों का स्मरण ही इस भजन का सार है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)
साईं बाबा के भजनों के संकीर्तन से भक्तों के मन में धर्म-जाति के भेद से ऊपर उठकर प्राणी मात्र के प्रति प्रेम की भावना जागृत होती है। बाबा की पूजा में सादगी और शुद्ध अंतःकरण का विशेष महत्त्व है।
संतों और ऋषियों के आध्यात्मिक इतिहास की गहरी समझ के लिए संत एवं ऋषि ज्ञानकोश अवश्य पढ़ें। साईं बाबा के भजन से पारिवारिक शांति प्राप्त होती है, मन के द्वेष और कलह दूर होते हैं और साधक में संतोष तथा धैर्य का विकास होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)
साईं बाबा की आराधना के लिए गुरुवार का दिन विशेष रूप से फलदायी है। साईं बाबा की मूर्ति या चित्र के सम्मुख दीप जलाकर, उदी का तिलक लगाएं और श्रद्धापूर्वक भजन गाएं।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
शिरडी साईं बाबा की उपासना के दो मुख्य स्तंभ क्या हैं?
बाबा ने अपने भक्तों को 'श्रद्धा' (विश्वास) और 'सबूरी' (धैर्य) को जीवन का मूल आधार बनाने की शिक्षा दी थी।
साईं भजनों के संकीर्तन के लिए कौन सा दिन उत्तम है?
गुरुवार (गुरु दिवस) का दिन साईं बाबा के पूजन, व्रत और भजन संकीर्तन के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।
साईं बाबा की 'उदी' का क्या महत्त्व है?
उदी बाबा की धूनी की पवित्र भस्म है। भक्तों का अटूट विश्वास है कि उदी धारण करने से शारीरिक बीमारियां और मानसिक कष्ट दूर होते हैं।
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