मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
हरिवरासनम विश्वमोहनम (Harivarasanam Vishvamohanam lyrics in Telugu) -
శరణం అయ్యప్ప స్వామి శరణం అయ్యప్ప |
శరణం అయ్యప్ప స్వామి శరణం అయ్యప్ప ||
హరివరాసనం స్వామి విశ్వమోహనం |
హరిదదిస్వరం ఆరాధ్యపాదుకం ||
అరివిమర్థనం స్వామి నిత్యనర్తనం |
హరిహరాత్మజం స్వామి దేవమాశ్రయే || 1 ||
శరణం అయ్యప్ప స్వామి శరణం అయ్యప్ప |
శరణం అయ్యప్ప స్వామి శరణం అయ్యప్ప ||
శరణకీర్తనం స్వామి శక్తమానసం |
భరణలోలుపం స్వామి నర్తనాలసం ||
అరుణభాసురం స్వామి భూతనాయకం |
హరిహరాత్మజం స్వామి దేవమాశ్రయే || 2 ||
ప్రణయసత్యకం స్వామి ప్రాణనాయకం |
ప్రణతకల్పకం స్వామి సుప్రభాన్చితం ||
ప్రనవమందిరం స్వామి కీర్తనప్రియం |
హరిహరాత్మజం స్వామి దేవమాశ్రయే || 3 ||
శరణం అయ్యప్ప స్వామి శరణం అయ్యప్ప |
శరణం అయ్యప్ప స్వామి శరణం అయ్యప్ప ||
తురగవాహనం స్వామి సుందరాననం |
వరగదాయుధం స్వామి వేదవర్నితం ||
గురు కృపాకరం స్వామి కీర్తనప్రియం |
హరిహరాత్మజం స్వామి దేవమాశ్రయే || 4 ||
త్రిభువనార్చనం స్వామి దేవతాత్మకం |
త్రినయనంప్రభుం స్వామి దివ్యదేశికం ||
త్రిదశపూజితం స్వామి చిన్తితప్రదం |
హరిహరాత్మజం స్వామి దేవమాశ్రయే || 5 ||
శరణం అయ్యప్ప స్వామి శరణం అయ్యప్ప |
శరణం అయ్యప్ప స్వామి శరణం అయ్యప్ప ||
భవభయాపహం స్వామి భావుకావహం |
భువనమోహనం స్వామి భూతిభూషణం ||
ధవలవాహనం స్వామి దివ్యవారణం |
హరిహరాత్మజం స్వామి దేవమాశ్రయే || 6 ||
కళ మృదుస్మితం స్వామి సుందరాననం |
కలభకోమలం స్వామి గాత్రమోహనం ||
కలభకేసరి స్వామి వాజివాహనం |
హరిహరాత్మజం స్వామి దేవమాశ్రయే || 7 ||
శరణం అయ్యప్ప స్వామి శరణం అయ్యప్ప |
శరణం అయ్యప్ప స్వామి శరణం అయ్యప్ప ||
శ్రితజనప్రియం స్వామి చిన్తితప్రదం |
శృతివిభూషణం స్వామి సాధుజీవనం ||
శృతిమనోహరం స్వామి గీతలాలసం |
హరిహరాత్మజం స్వామి దేవమాశ్రయే || 8 ||
శరణం అయ్యప్ప స్వామి శరణం అయ్యప్ప |
శరణం అయ్యప్ప స్వామి శరణం అయ్యప్ప ||
हरिवरासनम विश्वमोहनम (Harivarasanam lyrics in Hindi) -
शरणम अयप्पा स्वामी शरणम अयप्पा |
शरणम अयप्पा स्वामी शरणम अयप्पा ||
हरिवरासनम् स्वामी विश्वमोहनम् |
हरिदादिस्वरम आराध्यपादुकम ||
अरिविमार्थनं स्वामी नित्यनर्तन |
हरिहरात्मजं स्वामी देवमाश्रये || 1 ||
शरणम अयप्पा स्वामी शरणम अयप्पा |
शरणम अयप्पा स्वामी शरणम अयप्पा ||
शरणकीर्तन स्वामी शक्तमानसम |
भरणलुपम् स्वामी नार्थनालसम ||
अरुणाभसुरं स्वामी भूतनायकम् |
हरिहरात्मजं स्वामी देवमाश्रये || 2 ||
प्रणयसत्यकं स्वामी प्रणयकम् |
प्रणतकल्पक स्वामी सुप्रभञ्चितम् ||
प्रणव मंदिरम् स्वामी कीर्तनप्रियम् |
हरिहरात्मजं स्वामी देवमाश्रये || 3 ||
शरणम अयप्पा स्वामी शरणम अयप्पा |
शरणम अयप्पा स्वामी शरणम अयप्पा ||
थुरागवाहनम स्वामी सुंदराननम |
वरगदायुधं स्वामी वेदवर्णितम् ||
गुरु कृपाकारम स्वामी कीर्तनप्रियम |
हरिहरात्मजं स्वामी देवमाश्रये || 4 ||
त्रिभुवनार्चनं स्वामी देवतातमिम |
त्रिनयनं प्रभुम् स्वामी दिव्यदेशिकम् ||
त्रिदसपूजितं स्वामी चिन्तितप्रदम् |
हरिहरात्मजं स्वामी देवमाश्रये || 5 ||
शरणम अयप्पा स्वामी शरणम अयप्पा |
शरणम अयप्पा स्वामी शरणम अयप्पा ||
भावभयपहम् स्वामी भावुकवहम् |
भुवनमोहनं स्वामी भूतिभूषणं ||
धवलावहनम् स्वामी दिव्यवरणम् |
हरिहरात्मजं स्वामी देवमाश्रये || 6 ||
कला मृदुस्मिथम स्वामी सुंदराननम |
कलाभकोमलम् स्वामी गत्रमोहनम् ||
कलाभकेसरी स्वामी वाजीवाहनम् |
हरिहरात्मजं स्वामी देवमाश्रये || 7 ||
शरणम अयप्पा स्वामी शरणम अयप्पा |
शरणम अयप्पा स्वामी शरणम अयप्पा ||
श्रीतजनाप्रियं स्वामी चिन्तितप्रदाम् |
श्रुतिविभूषणं स्वामी साधुजीवनम् ||
श्रुतिमनोहरम स्वामी गीतालालसम |
हरिहरात्मजं स्वामी देवमाश्रये || 8 ||
शरणम अयप्पा स्वामी शरणम अयप्पा |
शरणम अयप्पा स्वामी शरणम अयप्पा ||
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "हरिवरासनम विश्वमोहनम (Harivarasanam Vishvamohanam lyrics in Telugu) - హరివరాసనం విశ్వమోహనం - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें