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हरि मोह पै नज़रे कर्म करो(hari moh pai najre karm karo lyrics in hindi) - bhaktilok

47 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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हरि भक्ति: जीवन के कार्यों में ध्यान केंद्रित करना

यह भजन हरि की भक्ति की प्रेरणा देता है, जिससे जीवन के कार्यों में सही दिशा मिले।

हरि मोह पै नज़रे कर्म करो ,सब जग छोड़ शरण में आयो ,सर पर हाथ धरो।यह जग बैरी पड़ो है ,बहु विधि नाच करो।सर पर काम ,काम में वासना ,हिरदे कपट भरो।विषय बेलि फलयो फल लागा ,मन चाखत न टरो।चलत फिरत सुमिरन करे मनवा ,बैठ भजन न करो।छूट गई सब आरती पूजा ,जप-माला न फिरो।‘मधुप’ कुञ्ज मैं कागा बोलत ,चित न हंस धरो।गुरुदेव भव-भंजन स्वामी ,किस विध पार करो।हरि मोह पै नज़रे कर्म करो।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन की मुख्य थीम 'हरि मोह पै नज़रे कर्म करो' पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि हरि की कृपा और याद के माध्यम से सभी कार्य करने चाहिए। पहले पंक्ति में कहा गया है कि भक्ति के मार्ग पर चलना और संसारिक बंधनों को छोड़ना ही सच्चा मोक्ष है। 'सब जग छोड़ शरण में आयो' का अर्थ है कि सभी सांसारिक वस्तुओं की अपेक्षा हरि के चरणों में शरण लेना चाहिए। आगे लिखा है कि 'यह जग बैरी पड़ो है', अर्थात् यह संसार धोखे में लिपटा हुआ है और इसलिए हमें यहाँ आने वाले मोह-माया से बचकर रहना चाहिए। भजन में 'सर पर हाथ धरो' का अभिप्राय मार्गदर्शक की आवश्यकता को दर्शाता है, जो हमें सही रास्ता दिखा सके।

इस भजन में छिपा भावार्थ हमारे भीतर की भावनाओं और संसार की वास्तविकताओं को उजागर करता है। 'काम, काम में वासना' से यह संदेश मिलता है कि हमें अपनी इच्छाओं और वासनाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए। इसके साथ ही यह भी इंगित करता है कि संसार में भटकने के बजाय हमें भक्ति और ध्यान में लिपटा रहना चाहिए। 'चलत फिरत सुमिरन करे मनवा' इस अभिप्राय से जुड़ा है कि हर समय, हर अवस्था में हरि का स्मरण करना चाहिए, जिससे मन को शांति और संतोष मिल सके। 'मधुप कुञ्ज' में 'कागा बोलत' का यह संकेत है कि जब हम गुरु के मार्ग पर चलते हैं तो हमें ध्यान केंद्रित करना चाहिए और व्यर्थ की बातें नहीं करनी चाहिए।

इस भजन में भक्ति मार्ग (Bhakti Marg) के तत्व भी प्रदर्शित होते हैं, जब हम हरि की भक्ति की ओर अग्रसर होते हैं। विश्वास, समर्पण और शरणागति का संदेश इसे एक मजबूत आधार देते हैं। जब हम भक्ति में लीन होते हैं तब जीवन में सच्ची संतोष प्राप्ति होती है। यह भजन हमें सिखाता है कि हमारे कर्मों का मूल्य तभी है जब वे हरि की कृपा के माध्यम से हो। अंतिम पंक्ति में 'गुरुदेव भव-भंजन स्वामी' कहकर यह संकेत मिलता है कि गुरु का मार्गदर्शन इस भक्ति के लिए अनिवार्य हैं, क्योंकि वे हमारे भवबंधन को खत्म कर सकते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन विभिन्न धार्मिक ग्रंथों जैसे कि रामायण और उपनिषदों का संदर्भ देता है, जहाँ भक्तों की भक्ति और समर्पण पर अधिकतम बल दिया गया है। उपनिषदों में सद्गुरु की महिमा और हरि की भक्ति का महत्व बताया गया है, जिससे जीव मोक्ष की ओर अग्रसर होते हैं। भक्ति को सबसे सरल और प्रभावी साधना माना गया है। ये सभी बातें हमारे भजन के श्रवण और निरंतरता में गहराई से जुड़ी हैं।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का उच्चारण करते समय मानसिक शांति प्राप्त होती है, जिससे मन की अशांति दूर होती है। इसके माध्यम से आत्मिक ऊर्जा का संचार होता है और भक्त को एकाग्रता की स्थिति मिलती है। नियमित रूप से इस भजन का पाठ करने से नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति और आध्यात्मिक विकास संभव है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ प्रातःकाल या सांयकाल किया जाता है, जब मन शान्त और एकाग्र होता है। उपासना में एक दीया जलाना, फूलों का भोग लगाना और स्वच्छ मन से हरि का नाम सुमिरना आदर्श है। सही मुद्रा में बैठकर और अवश्य ध्यान लगाते हुए भजन का पाठ करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या हरि मोह पै नज़रे कर्म करो का अर्थ है?

इसका अर्थ है कि अपने सभी कार्यों को हरि की भक्ति और उनकी दृष्टि में करना चाहिए, ताकि सभी कार्य सफल और सार्थक हो सकें।

इस भजन का प्रमुख संदेश क्या है?

इस भजन का प्रमुख संदेश है कि संसार के मोह से मुक्त होकर हरि की शरण में जाना और हमेशा उनके नाम का सुमिरन करना। यह भक्ति का आधार है।

किस प्रकार का ध्यान इस भजन में बताया गया है?

इस भजन में ध्यान का महत्व बताया गया है, जिसमें व्यक्ति को अपने मन को हरि की भक्ति में एकाग्र करके कामना और वासना से दूर रहना सीखना होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 23 Aug 2026

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