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म्हारी रनू बाई क माननी बुलाई गणगौर गणेश कुशवाह (mhari anu bayi k mnni bulayi khelam aayi gangor mayi gangor bhajan Lyrics in Hindi)

38 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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गणेश की कृपा: रनू बाई का भव्य आवाहन

गणेश जी की कृपा से समृद्धि एवं खुशी के लिए यह भजन सुनें और आनंद का अनुभव करें।

म्हारी रनू बाई क मननि बुलाई ,खेलण आई गणगौर माईगणगोर खेलण हाउ झमराल गली गई थी,न व्हासी , न व्हासी टोपली लई आईं ,खेलण आई गणगोर माईम्हारी रणु बाई क मननि बुलाई ,खेलण आई गणगौर माईगणगोर खेलण हाउ किसान गली गई थी,न व्हासी , न व्हासी घउ लई आईं ,खेलण आई गणगोर माईम्हारी रणु बाई क मननि बुलाई ,खेलण आई गणगौर माईगणगोर खेलण हाउ पंचायती गली गई थी,न व्हासी , न व्हासी चूंदड़ लई आईं ,खेलण आई गणगोर माईम्हारी रणु बाई क मननि बुलाई ,खेलण आई गणगौर माईगणगोर खेलण हाउ कुम्हार गली गई थी ,न व्हासी , न व्हासी दिवलो लई आईं ,खेलण आई गणगोर माईम्हारी रणु बाई क मननि बुलाई ,खेलण आई गणगौर माईगणगोर खेलण हाउ सुतार गली गई थी ,न व्हासी , न व्हासी बाजुठ लई आईं ,खेलण आई गणगोर माई

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय गणेश जी की आराधना एवं उनकी कृपा का अनुभव करना है। गणगौर माता का उल्लेख इस भजन में प्रमुखता से किया गया है, जो सामूहिक आनंद एवं उत्सव का प्रतीक है। 'म्हारी रनू बाई क मननि बुलाई' पंक्ति में गणेश जी का प्रेम व आशीर्वाद प्राप्त करने का आग्रह किया गया है। यहाँ गीत में विभिन्न गली-चौराहों का उल्लेख है, जैसे 'झमराल गली', 'किसान गली', इत्यादि। ये पंक्तियाँ दर्शाती हैं कि गणेश जी की कृपा हर सामान्य व्यक्ति तक पहुँचती है, चाहे वह किसान हो, कुम्हार हो या सुतार। इस प्रकार भजन में सामाजिक एकता और सहयोग का बोध कराया गया है।

भावार्थ की दृष्टि से यह भजन न केवल गणेश जी की आराधना है, बल्कि यह समूहिकता का संदेश भी देता है। जब 'गणगौर माई' का नाम आता है, तो यह समृद्धि, खुशियाँ और नई शुरुआत का आधिक्य लाता है। प्रत्येक गली का उल्लेख एक विशेष समुदाय की पहचान को दर्शाता है, जहाँ सभी जातियों के लोग मिलकर गणेश जी की पूजा करते हैं। इस भजन में एक प्रकार की प्रसन्नता और उल्लास का अनुभव होता है, जो जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में गणेश जी के प्रति श्रद्धा को व्यक्त करता है। इससे यह भी सिखने को मिलता है कि पूजा केवल व्यक्तिगत नहीं होनी चाहिए, अपितु सामूहिक प्रयास जरूरी है।

तत्ववार दृष्टि से यह भजन भक्ति मार्ग (Bhakti Marg) का उपदेश करता है। गणपति, जो सभी विघ्नों के नाशक हैं, उनकी उपासना से मंगल एवं सुख की प्राप्ति होती है। इस भजन में विभिन्न शिल्पियों एवं किसानों की विनम्रता और मेहनत को महत्व दिया गया है। यह दर्शाता है कि हमारा कर्म और भक्ति, दोनों मिलकर हमें वैभव के रास्ते पर आगे बढ़ाते हैं। भक्ति एक समर्पण है, जो हमें ध्यान और साधना के माध्यम से ज्ञानबोध की ओर ले जाता है। इस भजन में विभिन्न समुदायों का संगम यह दर्शाता है कि भगवान की उपासना में कोई भेदभाव या सीमाएँ नहीं हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व शास्त्रीय एवं पौराणिक संदर्भ में भी स्पष्ट है। गणेश जी की पूजा श्रावण और नवरात्रि के अवसर पर बड़ी धूमधाम से की जाती है, जैसा कि मार्कंडेय पुराण में बताया गया है। भक्ति के ऐसे भजनों का गूढ़ अर्थ जीवन में सकारात्मकता लाना है। 'गणगौर' की साफ-सुथरी चित्तवृत्ति से हमें संयमित और सरल जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है। श्रुतियों और उपनिषदों में सभी देवी-देवताओं की उपासना में सामाजिक एकता को महत्वपूर्ण माना गया है। यह भजन भी उसी सामाजिक एकता को महत्वपूर्ण रूप से प्रतिबिंबित करता है।

प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के जन्म और उनकी कथाओं का संपूर्ण विवरण जानने के लिए ब्रह्म पुराण गणेश महिमा का पाठ करें। गणेश जी की आराधना और इस भजन का श्रवण करने से व्यक्ति को मानसिक शांति, तनाव में कमी, और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। यह भक्ति हमें ध्यान लगाने और आत्मा की शुद्धि में भी सहायता करती है। नियमित रूप से इस भजन का सस्वर पाठ हमारे नकारात्मक विचारों को दूर कर एकाग्रता और उत्साह को बढ़ाता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह या शाम के समय करते हुए, एक शांत और पवित्र स्थान चुनें। दीपक जलाना और फूलों का भोग लगाना इसे और भी विशेष बनाता है। बैठने का उचित आसन धारण करें और पूरे ध्यान के साथ गणेश जी का स्मरण करें। मन में श्रद्धा और भक्ति की भावना लाते हुए भजन का उच्चारण करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या यह भजन सामूहिक पूजा में गाया जा सकता है?

हाँ, यह भजन सामूहिक पूजा में गाने के लिए अति उपयुक्त है। इससे सभी भक्तों में एकता और सामूहिक खुशी का अनुभव होता है।

गणेश जी की पूजा में इस भजन का क्या महत्व है?

यह भजन गणेश जी को विशेष तौर पर समर्पित है, जो विघ्न हर्ता हैं। उनकी कृपा प्राप्त करने का यह एक सशक्त माध्यम है।

क्या इस भजन का कोई विशेष समय है?

इस भजन का पाठ सुबह-सुबह या संध्या के समय करना अधिक फायदेमंद होता है, जब मन स्वच्छ और अंतर्मुखी होता है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Aug 2026

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