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वैदिक मंत्र संकलन

ॐ विष्णुः विष्णुः विष्णुः। अद्यैतच्चैत्र मासे, शुक...

जानिए चैत्र नवरात्रि घटस्थापना के अटल संकल्प मंत्र का अर्थ, महत्व, सही विधि और लाभ। अटल संकल्प से मिलती है सिद्धि और सफलता।

मंत्र पाठ पढ़ें
मंत्र विवरण (Live Details)
Durga (Goddess Durga) सम्बन्धित देव
2,405+ कुल मंत्र दर्शन
Durga Saptashati, Navratri Puja Vidhi, Vrat Sankalp Prakaran वैदिक ग्रन्थ स्रोत
मूल वैदिक मंत्रोच्चार (Hindi & English)
ॐ विष्णुः विष्णुः विष्णुः। अद्यैतच्चैत्र मासे, शुक्ल पक्षे, प्रतिपदायाम्, अमुक गोत्रः अमुक नामाहं, सकल पाप क्षयार्थं, ग्रह दोष निवारणार्थं, आरोग्य-ऐश्वर्य-अभीष्ट सिद्ध्यर्थं, चैत्र नवरात्र व्रतं अटल संकल्पेन करिष्ये।
Om Vishnuḥ Vishnuḥ Vishnuḥ। Adyaitachaitra māse, śukla pakṣe, pratipadāyām, amuka gotraḥ amuka nāmāhaṃ, sakala pāpa kṣayārthaṃ, graha doṣa nivāraṇārthaṃ, ārogya-aiśvarya-abhīṣṭa siddhyarthaṃ, caitra navarātra vrataṃ aṭala saṅkalpena kariṣye।
देवी / देवता Durga (Goddess Durga)
वैदिक स्रोत Durga Saptashati, Navratri Puja Vidhi, Vrat Sankalp Prakaran
श्रेणी Navratri
सुझावित जप संख्या 108 बार
उत्तम जप समय ब्रह्ममुहूर्त या सूर्योदय (Brahma Muhurta or Sunrise)
अनुशंसित जाप माला रुद्राक्ष माला (Rudraksha)

मंत्र का हिंदी अर्थ (Word Meaning)

भगवान विष्णु को तीन बार नमन। आज चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को, मैं (अपना गोत्र एवं नाम) समस्त पापों के क्षय, ग्रह दोषों के निवारण, आरोग्य, ऐश्वर्य और मनोवांछित सिद्धि के लिए, अटल संकल्प के साथ चैत्र नवरात्र व्रत कर रहा हूँ।

विशिष्ट लाभ एवं नियम (Benefits & Rules)

जाप के विशिष्ट लाभ

सकारात्मक ऊर्जा का संचार, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति।

आवश्यक सावधानियां

स्वच्छता का ध्यान रखें, पूर्ण श्रद्धा और मौन भाव से जप करें।

विस्तृत आध्यात्मिक व्याख्या एवं लाभ

चैत्र घटस्थापना का अटल संकल्प मंत्र | Chaitra Ghatasthapana Ka Atal Sankalp Mantra – नवरात्रि में संकल्प की शक्ति का महत्व और दिव्य पृष्ठभूमि

चैत्र घटस्थापना का अटल संकल्प मंत्र | Chaitra Ghatasthapana Ka Atal Sankalp Mantra – नवरात्रि में संकल्प की शक्ति सनातन धर्म में अत्यंत प्रभावशाली और जाग्रत मंत्र माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस मंत्र का नियमित जप करने से साधक को भगवान Durga (Goddess Durga) का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। जब मनुष्य जीवन में कठिनाइयों, मानसिक अशांति या स्वास्थ्य समस्याओं से घिर जाता है, तब Durga (Goddess Durga) की आराधना और इस महामंत्र का जप एक अचूक कवच की तरह कार्य करता है। यह मंत्र न केवल हमारे बाह्य जीवन को संतुलित करता है, बल्कि हमारे सूक्ष्म शरीर और चक्रों को भी ऊर्जावान बनाता है। जब साधक पूर्ण श्रद्धा के साथ इस दिव्य ध्वनि का उच्चारण करता है, तो उसके भीतर की सुप्त चेतना जागृत होने लगती है और ईश्वरीय सत्ता से उसका संबंध प्रगाढ़ होता है।

मंत्र का जप करने की सही शास्त्रोक्त विधि (Sadhana Vidhi)

मंत्र साधना की पूर्ण सफलता के लिए शास्त्रों में एक निश्चित विधि और नियम बताए गए हैं। इस मंत्र का जप करते समय निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है:

  • उत्तम समय (Best Time): इस मंत्र के जाप के लिए सर्वोत्तम समय ब्रह्ममुहूर्त या सूर्योदय (Brahma Muhurta or Sunrise) माना जाता है। इस समय प्रकृति में सत्व गुण की प्रधानता होती है जिससे मन आसानी से एकाग्र हो जाता है।
  • दिशा और आसन: साधक को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके कुशा या ऊन के आसन पर बैठना चाहिए।
  • जाप माला (Beads): इस दिव्य मंत्र का जप करने के लिए रुद्राक्ष माला (Rudraksha) का उपयोग किया जाना चाहिए।
  • जप संख्या (Chanting Count): प्रतिदिन कम से कम 108 बार (एक माला) जप करना अत्यंत फलदायी होता है।

मंत्र के दिव्य लाभ (Detailed Benefits)

नियमित रूप से इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करने से साधक को निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:

  1. मानसिक शांति और तनाव मुक्ति: मंत्र की ध्वनि तरंगें मस्तिष्क की तंत्रिकाओं को शांत करती हैं जिससे अनिद्रा, भय और चिंता का नाश होता है। यह मानसिक साहस को बढ़ाता है।
  2. सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह: घर के वातावरण में सकारात्मक कंपन उत्पन्न होते हैं जिससे वास्तु दोष और बुरी नजर का प्रभाव समाप्त होता है।
  3. शारीरिक आरोग्यता: ध्वनि कंपन से शरीर के भीतर के चक्र सक्रिय होते हैं, जो रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाते हैं। विशेषकर सकारात्मक ऊर्जा का संचार, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति। में लाभ होता है।
  4. आध्यात्मिक उन्नति: साधक का मन अंतर्मुखी होता है, ध्यान में गहराई आती है और मानसिक एकाग्रता का विकास होता है।

जाप के दौरान सावधानियां (Precautions)

मंत्र जप एक अत्यंत संवेदनशील साधना है। जप के दौरान मन में किसी के प्रति द्वेष भावना न रखें। आचरण सात्विक रखें, मांसाहार और मद्यपान से पूर्णतः दूर रहें। मंत्र का उच्चारण स्पष्ट और शांत कंठ से करें, अधिक जोर से चिल्लाकर या अत्यंत मंद गति से न बोलें। साधना काल में ब्रह्मचर्य और सादगी का पालन करने से मंत्र की शक्ति शीघ्र जाग्रत होती है। मुख्य सावधानी के रूप में: स्वच्छता का ध्यान रखें, पूर्ण श्रद्धा और मौन भाव से जप करें। का सदैव पालन करना चाहिए।

भक्तिलोक टीम

संपादित: भक्तिलोक वेद एवं शास्त्र शोध मंडल

सनातन ग्रंथों, मंत्र महोदधि, और वैदिक संहिताओं के आधार पर प्रमाणित संकलन।

समीक्षित एवं तथ्य-जांचित तिथि: 10 Aug 2026

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