वैदिक मंत्र संग्रह · पावन जप
14 पावन मंत्र उपलब्ध
१०८ जप विधि व भावार्थ

देवी दुर्गा व शक्ति मंत्र

देवी दुर्गा व शक्ति मंत्र के सभी शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, १०८ जप विधि, साधना नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ।

१०८ जप माला विधि
संस्कृत व हिंदी शुद्ध उच्चारण संदर्भ
बीज मंत्र ऊर्जा चक्र जागरण
संपादकीय संदर्भ-आधारित सामग्री
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देवी दुर्गा व शक्ति मंत्र सूची

नित्य साधना, मन की शांति एवं मनोकामना पूर्ति हेतु संपूर्ण मंत्र संकलन

कुल 14 मंत्र
Maa Kalaratri (कालरात्रि) १०८ जप विधि

ॐ कालरात्र्यै नमः

नवरात्रि के सातवें दिन माँ कालरात्रि की आराधना के लिए 'ॐ कालरात्र्यै नमः' मंत्र का जप किया जाता है। यह शक्तिशाली मंत्र साधक क…

Mahagauri (महागौरी) १०८ जप विधि

ॐ देवी महागौर्यै अमृतकलशायै नमः

महागौरी का अमृत कलश मंत्र जीवन, स्वास्थ्य और मोक्ष प्रदान करने वाला अत्यंत प्रभावशाली मंत्र है। नवरात्रि के पावन अवसर पर इस म…

Durga (Goddess Durga) १०८ जप विधि

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे

दुर्गा सप्तशती का नवार्ण मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' गुप्त नवरात्रि की साधना में अत्यंत प्रभावशाली माना गया है…

Maa Durga (चैत्र नवरात्रि) १०८ जप विधि

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे

चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर माँ दुर्गा के परम शक्तिशाली नवार्ण मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' के जप से अपनी आं…

Durga (Devi) १०८ जप विधि

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। ॐ नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः। नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणताः स्म ताम्॥

दुर्गा सप्तशती पाठ आरंभ मंत्र और उनकी व्याख्या के माध्यम से जानें शक्ति उपासना की सही विधि। यह संदर्भ एवं व्याख्या सहित सामग्…

Durga (Chamunda) १०८ जप विधि

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे

चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर जानें ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे मंत्र का महत्व, अर्थ और जाप विधि। यह शक्ति का सर्वोच्…

Durga (सर्वस्वरूपा) १०८ जप विधि

शरणागत दीनार्तपरित्राण परायणे। सर्वस्यातिहरे देवि नारायण नमोस्तुते।। सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वेशक्तिसमन्विते। भयेभ्यस्त्राहि नो देवी दुर्गे देवी नमोऽस्तु ते।। रोगानशेषानपहंसि तुष्टा। रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।। त्वमाश्रितानां न विपन्नराणाम्। त्वमाश्रिता हि श्रयतां प्रयान्ति।। सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि। एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम्।। जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा शिवा क्षमा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते।।

माँ दुर्गा की यह संपूर्ण स्तुति भक्तों को भय से मुक्त कर जीवन में सुख, समृद्धि और सुरक्षा प्रदान करती है। इसमें 'शरणागत दीनार…

Durga (विघ्नहर्ता) १०८ जप विधि

ॐ सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो, धन धान्यः सुतान्वितः। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः ॐ ।।

दुर्गा सर्व बाधा मुक्ति मंत्र जीवन के सभी विघ्नों और संकटों को दूर करने का अत्यंत प्रभावशाली उपाय है। संदर्भ एवं व्याख्या सहि…

Devi (Durga) १०८ जप विधि

या देवी सर्वभूतेषु कांत्तिरूपेण संस्थिता। या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता। या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

या देवी सर्वभूतेषु मंत्र दुर्गा सप्तशती का अत्यंत पवित्र एवं शक्तिशाली स्तोत्र है। यहाँ जानें इसका अर्थ, महत्व और जप विधि।

Chandraganta (Form of Goddess Durga) १०८ जप विधि

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चंद्रघण्टायै नमः

शत्रु, रोग और भय से मुक्ति के लिए माँ चंद्रघण्टा का अत्यंत शक्तिशाली भयंकर नाश मंत्र। जानें नवरात्रि के तीसरे दिन पूजित माँ च…

Devi (Gauri Narayani) १०८ जप विधि

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। त्र्यम्बक शरण्ये गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये मंत्र दुर्गा सप्तशती का एक अत्यंत मंगलकारी एवं शक्तिशाली स्तोत्र है। जानें इस पावन मंत्र का अर्थ, लाभ और ज…

Durga (बाल शांति प्रदायिनी) १०८ जप विधि

बालग्रहभिभूतानां बालानां शांतिकारकम्। संघातभेदे च नृणां मातृक्रिमुतम्।।

अशांत और भयभीत शिशुओं को शांत करने तथा बाल ग्रह दोषों से रक्षा के लिए माँ दुर्गा का यह मंत्र अत्यंत चमत्कारी है। जानिए इस मंत…

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मंत्र साधना एवं 108 जप के सार्वभौमिक नियम

शास्त्रसम्मत विधि से जप करने पर ही मंत्र की पूर्ण ऊर्जा एवं मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है

1. ब्रह्ममुहूर्त एवं समय

सूर्योदय से पूर्व (ब्रह्ममुहूर्त, प्रातः 4:00 से 6:00 बजे) अथवा संध्याकाल में जप करने से मन स्वतः एकाग्र व शांत रहता है।

2. आसन एवं दिशा

कुशा, ऊनी अथवा स्वच्छ सूती आसन पर बैठें। जप के समय साधक का मुख सदैव पूर्व (East) अथवा उत्तर (North) दिशा की ओर होना चाहिए।

3. 108 जप माला विधि

रुद्राक्ष, तुलसी अथवा स्फटिक माला से 108 बार जप करें। माला फेरते समय सुमेरु (शीर्ष दाने) को कभी लांघा नहीं जाता।

4. भाव एवं एकाग्रता

मंत्र के अर्थ का ध्यान करते हुए उपांशु (होंठ हिलें पर आवाज न आए) या मानस जप करना शास्त्रों में सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

देवी दुर्गा व शक्ति मंत्र का आध्यात्मिक महत्व

सनातन परंपरा में देवी दुर्गा व शक्ति मंत्र का पाठ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा और आत्मबल की प्राप्ति का सशक्त माध्यम है। वैदिक ऋषियों ने प्रत्येक मंत्र में ध्वनि कंपन (Sound Frequency) का ऐसा संयोजन किया है जो साधक की चेतना को उच्चतम स्तर पर प्रतिष्ठित करता है।

१. बीज मंत्र और उनकी दिव्य शक्ति

इस श्रेणी के मंत्रों में निहित बीज मंत्र शरीर के ऊर्जा चक्रों (Chakra System) को सक्रिय करते हैं। जब साधक एकाग्रचित्त होकर नित्य जप करता है, तो उसके भीतर की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है और दैवीय अनुकंपा का अनुभव होता है।

संपादकीय सुझाव: मंत्र जप के समय मन में किसी प्रकार का संशय न रखें। पूर्ण श्रद्धा, शुद्ध आसन और नियत समय पर जप करने से मंत्र सिद्धि शीघ्र प्राप्त होती है।

२. जप के उपरांत क्षमा प्रार्थना

मंत्र जप पूर्ण होने के बाद कम से कम २ मिनट मौन ध्यान करें और अंत में ईश्वर से अनजाने में हुई किसी भी त्रुटि (मात्रा, स्वर अथवा उच्चारण) के लिए क्षमा प्रार्थना करें।

देवी दुर्गा व शक्ति मंत्र – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

शास्त्रसम्मत संदर्भों के आधार पर तैयार महत्वपूर्ण जिज्ञासाएं एवं समाधान

शास्त्रों के अनुसार प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त अथवा संध्याकाल में शुद्ध आसन पर बैठकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके 108 बार रुद्राक्ष अथवा तुलसी माला से जप करना सर्वोत्तम माना गया है।

हाँ, शुद्ध भाव, पवित्रता और श्रद्धा के साथ कोई भी साधक इन पावन वैदिक स्तुति मंत्रों का जप कर सकता है।

भारतीय ज्योतिष और खगोल शास्त्र में 27 नक्षत्र होते हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। 108 बार मंत्र जप करने से ब्रह्मांड की समस्त सकारात्मक ऊर्जा हमारे शरीर और मन के साथ संरेखित होती है।