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वैदिक मंत्र संकलन

शरणागत दीनार्तपरित्राण परायणे। सर्वस्यातिहरे देवि ...

जानिए सुरक्षा और समृद्धि के लिए संपूर्ण दुर्गा स्तुति मंत्र का अर्थ, लाभ और सही जप विधि। यह मंत्र देवी के ग्यारह नामों का जप कर भय, रोग और शत्रुओं का नाश करता है।

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मंत्र विवरण (Live Details)
Durga (सर्वस्वरूपा) सम्बन्धित देव
2,270+ कुल मंत्र दर्शन
दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) एवं अन्य पौराणिक स्तोत्रों का सम्मिलित संग्रह वैदिक ग्रन्थ स्रोत
मूल वैदिक मंत्रोच्चार (Hindi & English)
शरणागत दीनार्तपरित्राण परायणे। सर्वस्यातिहरे देवि नारायण नमोस्तुते।। सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वेशक्तिसमन्विते। भयेभ्यस्त्राहि नो देवी दुर्गे देवी नमोऽस्तु ते।। रोगानशेषानपहंसि तुष्टा। रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।। त्वमाश्रितानां न विपन्नराणाम्। त्वमाश्रिता हि श्रयतां प्रयान्ति।। सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि। एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम्।। जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा शिवा क्षमा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते।।
Sharanagata Deenarta Paritrana Parayane |
Sarvasyatihare Devi Narayana Namostute ||
Sarvasvarupe Sarveshe Sarvashaktisamanvite |
Bhayebhyastrahi No Devi Durge Devi Namostu Te ||
Roganasheshanapahamsi Tusta |
Rushta Tu Kamansakalanabhishtan ||
Tvamashritanam Na Vipannaranam |
Tvamashrita Hi Shrayatam Prayanti ||
Sarvabadhaprashamanam Trailokyasya Khileshwari |
Evameva Tvaya Karyam Asmad Vairivinashanam ||
Jayanti Mangala Kali Bhadrakali Kapalini |
Durga Shiva Kshama Dhatri Svaha Svadha Namostu Te ||
देवी / देवता Durga (सर्वस्वरूपा)
वैदिक स्रोत दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) एवं अन्य पौराणिक स्तोत्रों का सम्मिलित संग्रह
श्रेणी Goddess
सुझावित जप संख्या 108 बार
उत्तम जप समय ब्रह्ममुहूर्त या सूर्योदय (Brahma Muhurta or Sunrise)
अनुशंसित जाप माला रुद्राक्ष माला (Rudraksha)

मंत्र का हिंदी अर्थ (Word Meaning)

हे देवी! आप शरण में आए हुए दीन-दुःखियों की रक्षा करने में तत्पर रहती हैं। हे सबके आधारभूता देवी नारायणी! आपको नमस्कार है। सबके स्वरूप में व्याप्त, सबके ईश्वर और सब शक्तियों से युक्त हे देवी दुर्गे! हमें सब भयों से बचाइए, आपको नमस्कार है। प्रसन्न होने पर आप असाध्य रोगों का नाश करती हैं और क्रुद्ध होने पर मनोवांछित कामनाओं को भी नष्ट कर देती हैं। आपके शरणागत भक्त कभी विपत्ति में नहीं पड़ते। आपकी शरण में आए हुए लोग परम आश्रय (मोक्ष) को प्राप्त होते हैं। हे सम्पूर्ण लोकों की ईश्वरी! सब प्रकार की बाधाओं का शमन करने वाली आप ही हमारे शत्रुओं का विनाश करें। जयन्ती, मंगला, काली, भद्रकाली, कपालिनी, दुर्गा, शिवा, क्षमा, धात्री, स्वाहा और स्वधा रूप में विराजमान देवी! आपको नमस्कार है।

विशिष्ट लाभ एवं नियम (Benefits & Rules)

जाप के विशिष्ट लाभ

सकारात्मक ऊर्जा का संचार, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति।

आवश्यक सावधानियां

स्वच्छता का ध्यान रखें, पूर्ण श्रद्धा और मौन भाव से जप करें।

विस्तृत आध्यात्मिक व्याख्या एवं लाभ

सुरक्षा और समृद्धि के लिए संपूर्ण दुर्गा स्तुति मंत्र | Complete Durga Mantra for Protection and Prosperity का महत्व और दिव्य पृष्ठभूमि

सुरक्षा और समृद्धि के लिए संपूर्ण दुर्गा स्तुति मंत्र | Complete Durga Mantra for Protection and Prosperity सनातन धर्म में अत्यंत प्रभावशाली और जाग्रत मंत्र माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस मंत्र का नियमित जप करने से साधक को भगवान Durga (सर्वस्वरूपा) का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। जब मनुष्य जीवन में कठिनाइयों, मानसिक अशांति या स्वास्थ्य समस्याओं से घिर जाता है, तब Durga (सर्वस्वरूपा) की आराधना और इस महामंत्र का जप एक अचूक कवच की तरह कार्य करता है। यह मंत्र न केवल हमारे बाह्य जीवन को संतुलित करता है, बल्कि हमारे सूक्ष्म शरीर और चक्रों को भी ऊर्जावान बनाता है। जब साधक पूर्ण श्रद्धा के साथ इस दिव्य ध्वनि का उच्चारण करता है, तो उसके भीतर की सुप्त चेतना जागृत होने लगती है और ईश्वरीय सत्ता से उसका संबंध प्रगाढ़ होता है।

मंत्र का जप करने की सही शास्त्रोक्त विधि (Sadhana Vidhi)

मंत्र साधना की पूर्ण सफलता के लिए शास्त्रों में एक निश्चित विधि और नियम बताए गए हैं। इस मंत्र का जप करते समय निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है:

  • उत्तम समय (Best Time): इस मंत्र के जाप के लिए सर्वोत्तम समय ब्रह्ममुहूर्त या सूर्योदय (Brahma Muhurta or Sunrise) माना जाता है। इस समय प्रकृति में सत्व गुण की प्रधानता होती है जिससे मन आसानी से एकाग्र हो जाता है।
  • दिशा और आसन: साधक को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके कुशा या ऊन के आसन पर बैठना चाहिए।
  • जाप माला (Beads): इस दिव्य मंत्र का जप करने के लिए रुद्राक्ष माला (Rudraksha) का उपयोग किया जाना चाहिए।
  • जप संख्या (Chanting Count): प्रतिदिन कम से कम 108 बार (एक माला) जप करना अत्यंत फलदायी होता है।

मंत्र के दिव्य लाभ (Detailed Benefits)

नियमित रूप से इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करने से साधक को निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:

  1. मानसिक शांति और तनाव मुक्ति: मंत्र की ध्वनि तरंगें मस्तिष्क की तंत्रिकाओं को शांत करती हैं जिससे अनिद्रा, भय और चिंता का नाश होता है। यह मानसिक साहस को बढ़ाता है।
  2. सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह: घर के वातावरण में सकारात्मक कंपन उत्पन्न होते हैं जिससे वास्तु दोष और बुरी नजर का प्रभाव समाप्त होता है।
  3. शारीरिक आरोग्यता: ध्वनि कंपन से शरीर के भीतर के चक्र सक्रिय होते हैं, जो रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाते हैं। विशेषकर सकारात्मक ऊर्जा का संचार, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति। में लाभ होता है।
  4. आध्यात्मिक उन्नति: साधक का मन अंतर्मुखी होता है, ध्यान में गहराई आती है और मानसिक एकाग्रता का विकास होता है।

जाप के दौरान सावधानियां (Precautions)

मंत्र जप एक अत्यंत संवेदनशील साधना है। जप के दौरान मन में किसी के प्रति द्वेष भावना न रखें। आचरण सात्विक रखें, मांसाहार और मद्यपान से पूर्णतः दूर रहें। मंत्र का उच्चारण स्पष्ट और शांत कंठ से करें, अधिक जोर से चिल्लाकर या अत्यंत मंद गति से न बोलें। साधना काल में ब्रह्मचर्य और सादगी का पालन करने से मंत्र की शक्ति शीघ्र जाग्रत होती है। मुख्य सावधानी के रूप में: स्वच्छता का ध्यान रखें, पूर्ण श्रद्धा और मौन भाव से जप करें। का सदैव पालन करना चाहिए।

भक्तिलोक टीम

संपादित: भक्तिलोक वेद एवं शास्त्र शोध मंडल

सनातन ग्रंथों, मंत्र महोदधि, और वैदिक संहिताओं के आधार पर प्रमाणित संकलन।

समीक्षित एवं तथ्य-जांचित तिथि: 10 Aug 2026

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