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योधानामग्निकल्पानां पेशलानाममर्षिणाम् । सम्पूर्णा कृतविद्यानां गुहा केसरिणामिव ॥
हिंदी भावार्थ:
“अयोध्या नगरी अग्नि के समान तेजस्वी, चतुर, क्रोधी और विद्या में निपुण योद्धाओं से भरी हुई थी, मानो सिंहों से भरी हुई गुफा हो।”
विशेष व्याख्या:
यह श्लोक अयोध्या के योद्धाओं के गुणों का वर्णन करता है।
टिप्पणी: यहाँ उपमा अलंकार है - केसरिणामिव (सिंहों के समान)। योद्धाओं की तुलना सिंहों से की गई है, जो साहस और पराक्रम के प्रतीक हैं।
काम्बोजविषये जातैर्बाह्लीकैश्च हयोत्तमैः । वनायुजैर्नदीजैश्च पूर्णा हरिहयोत्तमैः ॥
हिंदी भावार्थ:
“अयोध्या नगरी काम्बोज देश में उत्पन्न, बाह्लीक देश के, वनायु प्रदेश के तथा नदी तट पर जन्मे उत्तम घोड़ों से भरी हुई थी।”
विशेष व्याख्या:
इस श्लोक में अयोध्या में विभिन्न देशों के उत्तम घोड़ों का वर्णन है।
टिप्पणी: यहाँ चार प्रकार के घोड़ों का उल्लेख है: काम्बोज (संभवतः अफगानिस्तान क्षेत्र), बाह्लीक (बैक्ट्रिया), वनायु (अरब या फारस), और नदीज (नदी के किनारे के देश)। ये सभी प्राचीन काल में अश्वों के लिए प्रसिद्ध थे।
विन्ध्यपर्वतजैर्मत्तैः पूर्णा हैमवतैरपि । मदान्वितैरतिबलैर्मातङ्गैः पर्वतोपमैः ॥
हिंदी भावार्थ:
“अयोध्या विन्ध्य पर्वत पर उत्पन्न, हिमालय से आए हुए, मद से युक्त, अति बलशाली और पर्वत के समान विशाल हाथियों से भरी हुई थी।”
विशेष व्याख्या:
अयोध्या में विभिन्न पर्वतों से आए विशाल हाथियों का वर्णन।
टिप्पणी: इस श्लोक में विन्ध्य और हिमालय से आए हाथियों का उल्लेख है, जो मतवाले, अतिबलशाली और पर्वताकार थे। हाथी राजसी वैभव के प्रतीक हैं।
ऐरावतकुलीनैश्च महापद्मकुलैस्तथा । अञ्जनादपि निष्क्रान्तैर्वामनादपि च द्विपैः ॥
हिंदी भावार्थ:
“तथा ऐरावत कुल में उत्पन्न, महापद्म कुल के, अञ्जन और वामन नामक हाथियों के वंश से निकले हुए द्विपों (हाथियों) से भी वह नगरी भरी थी।”
विशेष व्याख्या:
प्रसिद्ध हाथी वंशों का वर्णन।
टिप्पणी: ऐरावत, महापद्म, अञ्जन और वामन - ये सभी दिग्गज हाथियों के नाम हैं या प्रसिद्ध नस्लें। ऐरावत इन्द्र का हाथी है। इन वंशों के हाथी अत्यंत बलशाली माने जाते थे।
भदैर्मन्द्रैर्मृगैश्चैव भद्रमन्द्रमृगैस्तथा । भद्रमन्द्रैर्भद्रमृगैर्मृगमन्द्रैश्च सा पुरी ॥
हिंदी भावार्थ:
“उस नगरी में भद्र, मन्द्र, मृग, भद्रमन्द्र, भद्रमृग, मृगमन्द्र आदि प्रकार के हाथी थे।”
विशेष व्याख्या:
अयोध्या में अनेक प्रकार के हाथी।
टिप्पणी: यहाँ हाथियों की विभिन्न नस्लों के नाम हैं। भद्र, मन्द्र, मृग आदि संकर नस्लें हैं। यह अयोध्या की पशुसम्पदा की विविधता को दर्शाता है।
नित्यमत्तैः सदा पूर्णा नागैरचलसंनिभैः । सा योजने द्वे च भूयः सत्यनामा प्रकाशते । यस्यां दशरथो राजा वसञ्जगदपालयत् ॥
हिंदी भावार्थ:
“वह नगरी सदा मतवाले और पर्वत के समान विशाल हाथियों से भरी रहती थी। वह दो योजन (लगभग 25 किमी) में फैली हुई थी और सत्यनामा (सत्यनाम) के नाम से प्रकाशित होती थी, जिसमें राजा दशरथ रहते हुए सम्पूर्ण जगत का पालन करते थे।”
विशेष व्याख्या:
अयोध्या का विस्तार और राजा दशरथ का शासन।
टिप्पणी: यहाँ अयोध्या की भौगोलिक स्थिति और उसके राजा का वर्णन है। "सत्यनामा" का अर्थ है सत्य नाम वाली, या जिसका नाम सत्य है। दशरथ उसमें रहकर जगत का पालन करते थे, जो उनके धार्मिक कर्तव्यपालन को दर्शाता है।
तां पुरीं स महातेजा राजा दशरथो महान् । शशास शमितामित्रो नक्षत्राणीव चन्द्रमाः ॥
हिंदी भावार्थ:
“उस महान् तेजस्वी राजा दशरथ ने उस पुरी (अयोध्या) पर शासन किया, जिन्होंने शत्रुओं का दमन कर रखा था, जैसे चन्द्रमा नक्षत्रों को शोभित करता है।”
विशेष व्याख्या:
राजा दशरथ का शासन।
टिप्पणी: यहाँ दशरथ की तुलना चन्द्रमा से की गई है। जैसे चन्द्रमा नक्षत्रों के बीच शोभा पाता है, वैसे ही दशरथ अयोध्या में शोभा पाते थे। "शमितामित्रः" का अर्थ है जिनके शत्रु शांत (परास्त) हो गए हैं।
तां सत्यनामां दृढतोरणार्गलाम् गृहैर्विचित्रैरुपशोभितां शिवाम् । पुरीमयोध्यां नृसहस्रसंकुलां शशास वै शक्रसमो महीपतिः ॥
हिंदी भावार्थ:
“उस सत्यनामा अयोध्या नगरी को, जिसके द्वार और अर्गल दृढ़ थे, जो विचित्र भवनों से सुशोभित थी, कल्याणकारी थी, और हजारों नरों से भरी हुई थी, उस महीपति (दशरथ) ने शासन किया, जो स्वयं इन्द्र के समान थे।”
विशेष व्याख्या:
अयोध्या का विस्तृत वर्णन और दशरथ की इन्द्र से तुलना।
टिप्पणी: यह श्लोक अयोध्या के स्वरूप का सार प्रस्तुत करता है। यह दृढ़ किलेबंद, सुन्दर भवनों से युक्त, कल्याणकारी और जनाकीर्ण थी। दशरथ ने इस पर इन्द्र के समान शासन किया।
शोधकर्ता व व्याख्याता
आचार्य रामानन्द त्रिपाठी
संस्कृत वाङ्मय एवं वाल्मीकि रामायण के शोधार्थी। संदर्भ-आधारित एवं प्रामाणिक ग्रंथों के अध्ययन का २०+ वर्षों का अनुभव।
संपादकीय समीक्षा
महंत रामशरण दास
अयोध्या वेद पीठ के वयोवृद्ध धर्माचार्य। उपलब्ध शास्त्रीय संदर्भों के आधार पर सामग्री का अंतिम प्रमाणीकरण।