सर्ग का संक्षिप्त परिचय एवं प्रसंग
प्रसंग सार संक्षेप
जब सभी सहयोगी चले गए, तब राम ने पुष्पक विमान को उसके स्वामी कुबेर के पास लौटने की आज्ञा दी और उसे विदा किया।
सर्ग की विस्तृत पृष्ठभूमि
आध्यात्मिक व्याख्या एवं कथा
📖 श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण – उत्तरकाण्ड – सर्ग ५०
(राम द्वारा पुष्पक विमान को विदा करना)
🔆 प्रस्तावना : सभी सहयोगियों के जाने के बाद, पुष्पक विमान अयोध्या में ही खड़ा था। यह विमान कुबेर का था, जिसे रावण ने बलपूर्वक छीन लिया था। अब राम ने उसे उसके वास्तविक स्वामी को लौटाने का निश्चय किया।
✈️ पुष्पक विमान को संबोधन (श्लोक १-१०)
हे विमान महाभाग कुबेरस्य महात्मनः॥
त्वया लङ्का समानीता हत्वा रावणमाहवे।
कृतं त्वया महत्कार्यं सुग्रीवाद्यैश्च वानरैः॥
इदानीं गन्तुमिच्छामि यत्र ते वसतिः प्रिया।
कुबेरभवनं दिव्यं तत्र गच्छ सुखं विभो॥
इत्युक्तं रामवचनं श्रुत्वा पुष्पकमब्रवीत्।
प्राञ्जलिः प्रणतो भूत्वा रामं सत्यपराक्रमम्॥
राम त्वयि महाभाग स्नेहो मे परमो धृतः।
इच्छामि त्वत्समीपेऽहं नित्यं वस्तुं सुखं प्रभो॥
न्यायेन ग्रहणं दानं सतां मार्गः सनातनः॥
कुबेरस्य त्वमत्यर्थं प्रियो भ्राता महात्मनः।
तेन त्यक्तो न जाने त्वं कथं तिष्ठसि मत्समीपतः॥
गच्छ त्वं वै महाभाग मत्प्रियं कर्तुमर्हसि।
कुबेरं प्राप्य भद्रं ते मामपि स्मर सर्वदा॥
इत्युक्त्वा राघवो राजा पुष्पकं प्रददौ तदा।
रत्नानि विविधान्यस्य वासांसि विविधानि च॥
पुष्पकं प्रतिगृह्यार्थं रामं प्रदक्षिणीकृतम्।
प्रणनाम च रामाय प्रीत्या परमया युतः॥
🙌 विमान का प्रस्थान (श्लोक ११-२०)
रामेण समनुज्ञातं कुबेरभवनं प्रति॥
गच्छन्तं तं नरव्याघ्रो रामः प्राञ्जलिरब्रवीत्।
स्वस्ति तेऽस्तु गमिष्यामि कुबेरसदनं प्रति॥
इत्युक्त्वा राघवो राजा प्रेक्षते स्म दिवाकरम्।
पुष्पकं चापि यान्तं तं यावद्दृष्टिः प्रवर्तते॥
ततः प्रविविशे वेश्म सीतया सहितः प्रभुः।
हनूमता च धर्मात्मा सेव्यमानः सुखं स्थितः॥
एवं पुष्पकमामन्त्र्य रामो राजीवलोचनः।
रेमे राज्ये स्थितो धीमान्धर्मेण पालयन्प्रजाः॥
परवस्तु न गृह्णाति यद्यपि स्यात्प्रियं सदा॥
एतदाख्यानमाख्यातं पुष्पकस्य विसर्जनम्।
यः पठेत्प्रयतो नित्यं स याति परमां गतिम्॥
इति वाल्मीकिना प्रोक्तं रामायणमनुत्तमम्।
श्रृण्वन्ति ये नरा भक्त्या ते यान्ति परमां गतिम्॥
🔍 सर्ग का गूढ़ार्थ एवं विशेष महत्त्व
⚖️ नीति और धर्म का पालन
राम ने पुष्पक विमान, जो उनके अधिकार में था, को उसके वास्तविक स्वामी कुबेर को लौटा दिया। यह उनके धर्मपरायणता और नीतिपरायणता का उत्कृष्ट उदाहरण है।
💎 आसक्ति से मुक्ति
राम किसी भी वस्तु में आसक्त नहीं थे। उन्होंने स्नेह के बावजूद विमान को विदा किया। यह वैराग्य का आदर्श है।
सर्ग के पावन श्लोक (मूल पाठ व अर्थ)
नीचे महर्षि वाल्मीकि रचित इस सर्ग के सभी श्लोक, उनके मूल देवनागरी छंद, सरल हिंदी अनुवाद एवं व्याख्या सहित प्रस्तुत किए गए हैं।
इस सर्ग के श्लोक वर्तमान में अद्यतन किए जा रहे हैं। कृपया कुछ समय पश्चात देखें।
आचार्य रामानन्द त्रिपाठी
संस्कृत वाङ्मय एवं वाल्मीकि रामायण के शोधार्थी। संदर्भ-आधारित एवं प्रामाणिक ग्रंथों के अध्ययन का २०+ वर्षों का अनुभव।
महंत रामशरण दास
अयोध्या वेद पीठ के वयोवृद्ध धर्माचार्य। उपलब्ध शास्त्रीय संदर्भों के आधार पर सामग्री का अंतिम प्रमाणीकरण।