संक्षेप रामायण – श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

चरित्रवान् कश्च कोपि क्षमावान् कश्च पण्डितः । एकान्तगुणशाली च सर्वशत्रुनिषूदनः ॥

हिंदी अनुवाद

कौन चरित्रवान् है, कौन क्षमावान् है, कौन विद्वान् है, कौन एकान्त में भी गुणशाली है और सब शत्रुओं का नाश करने वाला है?

अर्थ / व्याख्या

वाल्मीकि ने आदर्श पुरुष के और गुण पूछे – चरित्र, क्षमा, पाण्डित्य, अद्वितीय गुण और शत्रुविनाशक क्षमता।

टिप्पणी

यह श्लोक वाल्मीकि के प्रश्नों की श्रृंखला को आगे बढ़ाता है। एकान्तगुणशाली का अर्थ है जो सब प्रकार से गुणों से सम्पन्न हो। सर्वशत्रुनिषूदनः विशेषण राम के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है, क्योंकि उन्होंने रावण सहित अनेक राक्षसों का वध किया।

॥ श्री रामायण – बालकाण्ड – प्रथम सर्ग – चतुर्थ श्लोक ॥

चरित्रवान् कश्च कोपि क्षमावान् कश्च पण्डितः ।
एकान्तगुणशाली च सर्वशत्रुनिषूदनः ॥
caritravān kaśca kopi kṣamāvān kaśca paṇḍitaḥ | ekāntaguṇaśālī ca sarvaśatruniṣūdanaḥ ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : कौन चरित्रवान् है, कौन क्षमावान् है, कौन विद्वान् है, कौन एकान्त में भी गुणशाली है और सब शत्रुओं का नाश करने वाला है?

🔹 English Translation : Who is of noble character, who is forbearing, who is learned, who is endowed with singular virtues, and who is the destroyer of all enemies?

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
चरित्रवान्विशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनउत्तम चरित्र वाला
कःसर्वनामकौन
चअव्ययऔर
कः अपि (कोपि)सर्वनाम (कः + अपि)कोई (भी)
क्षमावान्विशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनक्षमाशील
कःसर्वनामकौन
चअव्ययऔर
पण्डितःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनविद्वान्, ज्ञानी
एकान्तगुणशालीविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन (एकान्त + गुण + शालिन्)अद्वितीय गुणों वाला
चअव्ययऔर
सर्वशत्रुनिषूदनःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनसभी शत्रुओं का विनाश करने वाला

📖 साहित्यिक विश्लेषण

इस श्लोक में कः की पुनरावृत्ति से प्रश्न की तीव्रता बढ़ी है। कोपि (कः + अपि) अनिश्चयवाचक सर्वनाम है, जो व्यापकता को दर्शाता है। एकान्तगुणशाली का अर्थ है जिसके गुण अद्वितीय हों, जिनकी तुलना न हो सके। सर्वशत्रुनिषूदनः श्रीराम के लिए सर्वथा उपयुक्त है, क्योंकि उन्होंने अकेले ही राक्षसों का संहार किया।

🕉️ आध्यात्मिक संदेश

चरित्र, क्षमा, ज्ञान, अद्वितीय गुण और शत्रुओं पर विजय – ये सभी एक आदर्श जीवन के लक्षण हैं। क्षमा (forgiveness) को सर्वोच्च गुण माना गया है। शत्रु का विनय करने का अर्थ केवल बाहरी शत्रु ही नहीं, बल्कि आंतरिक शत्रु (काम, क्रोध, लोभ) का नाश भी है।

॥ जय श्री राम ॥