संक्षेप रामायण – श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

कोऽस्मिन् साम्प्रतं लोके गुणवान् कश्च वीर्यवान् । धर्मज्ञश्च कृतज्ञश्च सत्यवाक्यो दृढव्रतः ॥

हिंदी अनुवाद

इस समय इस संसार में कौन गुणवान्, कौन वीर्यवान्, कौन धर्मज्ञ, कौन कृतज्ञ, कौन सत्यवादी और दृढ़व्रत है?

अर्थ / व्याख्या

यह प्रश्न वाल्मीकि ने नारद से पूछा कि वर्तमान में संसार में ऐसा कौन है जो गुणवान्, वीर, धर्मज्ञ, कृतज्ञ, सत्यवादी और दृढ़व्रत हो।

टिप्पणी

इस श्लोक से वाल्मीकि की जिज्ञासा प्रकट होती है। वे ऐसे व्यक्ति की खोज में हैं जो सम्पूर्ण गुणों से युक्त हो। यह प्रश्न आगे चलकर राम के चरित्र के वर्णन का मार्ग प्रशस्त करता है। नारद इन्हीं गुणों से युक्त श्रीराम का वर्णन करेंगे।

॥ श्री रामायण – बालकाण्ड – प्रथम सर्ग – तृतीय श्लोक ॥

कोऽस्मिन् साम्प्रतं लोके गुणवान् कश्च वीर्यवान् ।
धर्मज्ञश्च कृतज्ञश्च सत्यवाक्यो दृढव्रतः ॥
ko'smin sāmprataṃ loke guṇavān kaśca vīryavān | dharmajñaśca kṛtajñaśca satyavākyo dṛḍhavrataḥ ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : इस समय इस संसार में कौन गुणवान्, कौन वीर्यवान्, कौन धर्मज्ञ, कौन कृतज्ञ, कौन सत्यवादी और दृढ़व्रत है?

🔹 English Translation : Who in this world at present is virtuous, who is valiant, who is knowledgeable of dharma, who is grateful, who is truthful, and who is firm in vows?

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
कःसर्वनाम, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनकौन
अस्मिन्सर्वनाम, पुल्लिंग, सप्तमी एकवचन (इदम्)इस (लोक) में
साम्प्रतम्अव्ययअब, वर्तमान काल में
लोकेपुल्लिंग, सप्तमी एकवचनसंसार में
गुणवान्विशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनगुणों वाला
कःसर्वनामकौन
चअव्ययऔर
वीर्यवान्विशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनपराक्रमी, वीर्ययुक्त
धर्मज्ञःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनधर्म का ज्ञाता
चअव्ययऔर
कृतज्ञःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनउपकार मानने वाला
चअव्ययऔर
सत्यवाक्यःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनसत्य बोलने वाला
दृढव्रतःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनदृढ़ प्रतिज्ञा वाला

📚 व्याख्या एवं विशेष

वाल्मीकि ने यहाँ छः प्रमुख गुणों को सूचीबद्ध किया है – गुणवत्ता, पराक्रम, धर्मज्ञता, कृतज्ञता, सत्यवादिता और दृढ़प्रतिज्ञता। ये वे लक्षण हैं जो एक आदर्श मानव, विशेषकर राजा या महापुरुष में होने चाहिए। नारद आगे इन सभी गुणों से युक्त श्रीराम का वर्णन करते हैं।

व्याकरणिक दृष्टि से कोऽस्मिन् में सन्धि है (कः + अस्मिन्)। साम्प्रतम् क्रियाविशेषण वर्तमान काल को इंगित करता है, जिससे प्रश्न की तात्कालिकता स्पष्ट होती है।

🕉️ आध्यात्मिक संदेश

यह श्लोक हमें जीवन के आदर्शों की ओर प्रेरित करता है। हमें स्वयं में इन गुणों को विकसित करने का प्रयास करना चाहिए। साथ ही, जब हम किसी महापुरुष की खोज करते हैं, तो हमें इन्हीं मापदंडों पर उन्हें परखना चाहिए।

॥ जय श्री राम ॥