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Durga Bhajan Lyrics

जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी : आरती (Jai Ambe Gauri Maiya Jai Shyama Gauri) | Durga Maa Aarti - Jai Ambe Gauri with Lyrics - जय अम्बे गौरी आरती

66 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें




जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी : आरती (Jai Ambe Gauri Maiya Jai Shyama Gauri) | Durga Maa Aarti - Jai Ambe Gauri with Lyrics - जय अम्बे गौरी आरती

जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी : आरती (Jai Ambe Gauri Maiya Jai Shyama Gauri) | Durga Maa Aarti - Jai Ambe Gauri with Lyrics - जय अम्बे गौरी आरती

जय अम्बे गौरी

मैया जय श्यामा गौरी ।

तुमको निशदिन ध्यावत

हरि ब्रह्मा शिवरी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


मांग सिंदूर विराजत

टीको मृगमद को ।

उज्ज्वल से दोउ नैना

चंद्रवदन नीको ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


कनक समान कलेवर

रक्ताम्बर राजै ।

रक्तपुष्प गल माला

कंठन पर साजै ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


केहरि वाहन राजत

खड्ग खप्पर धारी ।

सुर-नर-मुनिजन सेवत

तिनके दुखहारी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


कानन कुण्डल शोभित

नासाग्रे मोती ।

कोटिक चंद्र दिवाकर

सम राजत ज्योती ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


शुंभ-निशुंभ बिदारे

महिषासुर घाती ।

धूम्र विलोचन नैना

निशदिन मदमाती ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


चण्ड-मुण्ड संहारे

शोणित बीज हरे ।

मधु-कैटभ दोउ मारे

सुर भयहीन करे ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


ब्रह्माणी रूद्राणी

तुम कमला रानी ।

आगम निगम बखानी

तुम शिव पटरानी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


चौंसठ योगिनी मंगल गावत

नृत्य करत भैरों ।

बाजत ताल मृदंगा

अरू बाजत डमरू ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


तुम ही जग की माता

तुम ही हो भरता

भक्तन की दुख हरता ।

सुख संपति करता ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


भुजा चार अति शोभित

खडग खप्पर धारी ।

मनवांछित फल पावत

सेवत नर नारी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


कंचन थाल विराजत

अगर कपूर बाती ।

श्रीमालकेतु में राजत

कोटि रतन ज्योती ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


श्री अंबेजी की आरति

जो कोइ नर गावे ।

कहत शिवानंद स्वामी

सुख-संपति पावे ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥


जय अम्बे गौरी

मैया जय श्यामा गौरी ।

माँ दुर्गा देव्यापराध क्षमा प्रार्थना स्तोत्रं


🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

प्रस्तुत राधा-कृष्ण भजन "जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी : आरती (Jai Ambe Gauri Maiya Jai Shyama Gauri) | Durga Maa Aarti - Jai Ambe Gauri with Lyrics - जय अम्बे गौरी आरती" के माध्यम से भक्त और आराध्य के परम संबंध को दर्शाया गया है। वैष्णव संप्रदाय में राधा-कृष्ण का प्रेम लौकिक प्रेम न होकर जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। इस भजन की एक-एक पंक्ति का सार यही है कि भगवान श्री कृष्ण स्वयं राधा रानी के प्रेम के अधीन हैं। बिना राधा के न तो वे मुरली बजाते हैं और न ही गोपी-गोपियों को सुख देते हैं।

भजन के पदों में यह स्पष्ट होता है कि वृंदावन की कुंज गलियों में जब तक 'राधे-राधे' नाम की गूंज नहीं होती, तब तक भगवान श्यामसुंदर का मन भी वहां नहीं रमता। भक्त राधा जी से आग्रह करता है कि वे भी कृष्ण की इस भक्ति और दिव्यता का रहस्य उजागर करें, ताकि एक सामान्य साधक भी कृष्ण प्रेम का अधिकारी बन सके।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

ब्रह्म पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार, भगवान कृष्ण की आराधना से पूर्व राधा जी का नाम स्मरण करना अनिवार्य माना गया है। राधा नाम की महिमा स्वयं कृष्ण गाते हैं। इस भजन को श्रद्धापूर्वक गाने या सुनने से साधक के हृदय में भक्ति रस का संचार होता है और मानसिक विकारों तथा चिंताओं का समूल नाश होता है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। राधा-कृष्ण भजन के गायन से गृहक्लेश दूर होता है, दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और पारिवारिक वातावरण सात्विक बनता है। यदि इसका नियमित संकीर्तन किया जाए, तो साधक को मानसिक एकाग्रता और दिव्य शांति की अनुभूति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन के संकीर्तन के लिए सर्वोत्तम समय प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त) अथवा संध्या आरती के समय का है। गायन के समय दीप प्रज्वलित कर, तुलसी दल अर्पित करें और शुद्ध भाव से युगल सरकार (राधा-कृष्ण) की छवि का ध्यान करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन के मुख्य आराध्य देव कौन हैं?

इस भजन के मुख्य आराध्य देव युगल सरकार अर्थात भगवान श्री कृष्ण और श्री राधा रानी जी हैं।

राधा-कृष्ण भजन का पाठ किस दिन विशेष रूप से करना चाहिए?

यद्यपि भगवान के नाम संकीर्तन के लिए हर दिन शुभ है, किन्तु एकादशी, पूर्णिमा और शनिवार/रविवार के दिन इसका संकीर्तन विशेष फलदायी माना गया है।

क्या यह भजन पारिवारिक सुख-शांति के लिए सहायक है?

हाँ, राधा-कृष्ण के भक्तिमय भजनों को घर में नियमित रूप से गाने अथवा सुनने से दांपत्य प्रेम बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 24 Aug 2026

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