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Durga Bhajan Lyrics

दुर्गा देवी स्तुति लिरिक्स (Durga Stuti in Sanskrit Lyrics Sanskrit)

69 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें


दुर्गा देवी स्तुति लिरिक्स (Durga Stuti in Sanskrit Lyrics Sanskrit) - Bhaktilok

दुर्गा देवी स्तुति लिरिक्स (Durga Stuti in Sanskrit Lyrics Sanskrit) - 

या देवी सर्वभुतेशु विष्णु मयेति सद्बिता

नमस् तस्यै नमस् तस्यै नमस् तस्यै नमो नमः.


या देवी सर्वभुतेशु बुद्धि रूपेण संस्थिता

नमस् तस्यै….


या देवी सर्वभुतेशु निद्रा रूपेण संस्थिता

नमस् तस्यै….


या देवी सर्वभुतेशु क्षुधा रूपेण संस्थिता

नमस् तस्यै….


या देवी सर्वभुतेशु छाया रूपेण संस्थिता

नमस् तस्यै….


या देवी सर्वभुतेशु सकती रूपेण संस्थिता

नमस् तस्यै….


या देवी सर्वभुतेशु त्रिसना रूपेण संस्थिता

नमस् तस्यै….


या देवी सर्वभुतेशु क्संती रूपेण संस्थिता

नमस् तस्यै….


या देवी सर्वभुतेशु लज्जा रूपेण संस्थिता

नमस् तस्यै….


या देवी सर्वभुतेशु शांति रूपेण संस्थिता

नमस् तस्यै….


या देवी सर्वभुतेशु श्रद्धा रूपेण संस्थिता

नमस् तस्यै….


या देवी सर्वभुतेशु काँटी रूपेण संस्थिता

नमस् तस्यै….


या देवी सर्वभुतेशु लक्ष्मी रूपेण संस्थिता

नमस् तस्यै….


या देवी सर्वभुतेशु वृत्ति रूपेण संस्थिता

नमस् तस्यै….


या देवी सर्वभुतेशु स्मृति रूपेण संस्थिता

नमस् तस्यै….


या देवी सर्वभुतेशु दया रूपेण संस्थिता

नमस् तस्यै….


या देवी सर्वभुतेशु तुस्ती रूपेण संस्थिता

नमस् तस्यै….


या देवी सर्वभुतेशु मत्री रूपेण संस्थिता

नमस् तस्यै….


नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नम:। 

नम: प्रकृत्यै भद्रायै नियता: प्रणता: स्म ताम्॥


रौद्रायै नमो नित्यायै गौर्यै धा˜यै नमो नम:। 

ज्योत्स्नायै चेन्दुरूपिण्यै सुखायै सततं नम:॥


कल्याण्यै प्रणतां वृद्ध्यै सिद्ध्यै कुर्मो नमो नम:। 

नैर्ऋत्यै भूभृतां लक्ष्म्यै शर्वाण्यै ते नमो नम:॥

दुर्गायै दुर्गपारायै सारायै सर्वकारिण्यै। 

ख्यात्यै तथैव कृष्णायै धूम्रायै सततं नम:॥


अतिसौम्यातिरौद्रायै नतास्तस्यै नमो नम:। 

नमो जगत्प्रतिष्ठायै देव्यै कृत्यै नमो नम:॥


या देवी सर्वभूतेषु विष्णुमायेति शब्दिता। 

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥


या देवी सर्वभेतेषु चेतनेत्यभिधीयते। 

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥


या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता। 

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥


या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता। 

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥


या देवी सर्वभूतेषु क्षुधारूपेण संस्थिता। 

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥


या देवी सर्वभूतेषुच्छायारूपेण संस्थिता। 

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥


या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता। 

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥


या देवी सर्वभूतेषु तृष्णारूपेण संस्थिता। 

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥


या देवी सर्वभूतेषु क्षान्तिरूपेण संस्थिता। 

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥


या देवी सर्वभूतेषु जातिरूपेण संस्थिता। 

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥


या देवी सर्वभूतेषु लज्जारूपेण संस्थिता। 

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥


या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता। 

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥


यादेवी सर्वभूतेषु श्रद्धारूपेण संस्थिता। 

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥


या देवी सर्वभूतेषु कान्तिरूपेण संस्थिता। 

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥


या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता। 

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥


या देवी सर्वभूतेषु वृत्तिरूपेण संस्थिता। 

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥


या देवी सर्वभूतेषु स्मृतिरूपेण संस्थिता। 

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥


या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता। 

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥


या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता। 

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥


या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता। 

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥


या देवी सर्वभूतेषु भ्रान्तिरूपेण संस्थिता। 

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥


इन्द्रियाणामधिष्ठात्री भूतानां चाखिलेषु या। 

भूतेषु सततं तस्यै व्याप्तिदेव्यै नमो नम:॥


चितिरूपेण या कृत्स्नमेतद्व्याप्य स्थिता जगत्। 

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥


स्तुता सुरै: पूर्वमभीष्टसंश्रयात्तथा सुरेन्द्रेण दिनेषु सेविता।

करोतु सा न: शुभहेतुरीश्वरी शुभानि भद्राण्यभिहन्तु चापद:॥


या साम्प्रतं चोद्धतदैत्यतापितै-रस्माभिरीशा च सुरैर्नमस्यते।

या च स्मृता तत्क्षणमेव हन्ति न: सर्वापदो भक्ति विनम्रमूर्तिभि:॥

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती को समर्पित यह भजन "दुर्गा देवी स्तुति लिरिक्स (Durga Stuti in Sanskrit Lyrics Sanskrit)" जगत जननी की कृपा और महिमा का गान करता है। सनातन परंपरा में स्त्री शक्ति को सृष्टि का आदि कारण माना गया है। इस भजन की एक-एक पंक्ति माता के ममतामयी और दुष्टनाशिनी रूप का वर्णन करती है।

भजन का मूल स्वर माता के प्रति समर्पण का है। जब भक्त माता के चरणों में प्रणाम कर अपनी प्रार्थना रखता है, तो देवी मां उसके समस्त कष्टों को हर लेती हैं। यह भजन साधक के भीतर शक्ति, करुणा, तेज और पवित्रता का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

देवीभागवत पुराण के अनुसार, माता की उपासना से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की सिद्धि होती है। विशेषकर नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन करने से घर में रिद्धि-सिद्धि और सुख-समृद्धि का वास होता है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। देवी भजनों के संकीर्तन से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है, दरिद्रता का नाश होता है और व्यापार तथा नौकरी में उन्नति के द्वार खुलते हैं। यह जीवन में सुख, शांति और सुरक्षा का अनुभव कराता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

माता की पूजा के लिए शुक्रवार, अष्टमी तिथि और नवरात्रि का काल सर्वोत्तम है। पूजा स्थान पर लाल फूल, धूप-दीप अर्पित कर मां के सामने घी का अखण्ड ज्योत जलाएं और भक्तिभाव से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन विशेष रूप से कब करना चाहिए?

यद्यपि नियमित संकीर्तन उत्तम है, किन्तु शुक्रवार के दिन और शारदीय व चैत्र नवरात्रि के पावन दिनों में मां दुर्गा के भजन असीम सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं।

देवी पूजा में किस रंग के वस्त्रों का उपयोग करना शुभ माना जाता है?

माता दुर्गा और शक्ति स्वरूपा देवी पूजा में लाल, पीले अथवा नारंगी (भगवा) रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना गया है।

क्या देवी उपासना से व्यापारिक बाधाएं दूर होती हैं?

हाँ, मां लक्ष्मी और मां दुर्गा की कृपा से व्यापार में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Aug 2026

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