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दुर्गा पूजा पुष्पांजली (Durga Puja Pushpanjali Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

76 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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महाकाली की स्तुति: दुर्गा पूजा पुष्पांजली

इस भजन में देवी दुर्गा की महिमा का गुणगान है, भाग्य और कल्याण की प्राप्ति के लिए श्रद्धासहित गाया जाता है।

 दुर्गा पूजा पुष्पांजली (Durga Puja Pushpanjali Lyrics in Hindi) - Bhaktilokदुर्गा पूजा प्रथम पुष्पांजली मंत्र - ॐ जयन्ती, मङ्गला, काली, भद्रकाली, कपालिनी ।दुर्गा, शिवा, क्षमा, धात्री, स्वाहा, स्वधा नमोऽस्तु ते॥एष सचन्दन गन्ध पुष्प बिल्व पत्राञ्जली ॐ ह्रीं दुर्गायै नमः॥दुर्गा पूजा द्वितीय पुष्पांजली मंत्र - ॐ महिषघ्नी महामाये चामुण्डे मुण्डमालिनी ।आयुरारोग्यविजयं देहि देवि! नमोऽस्तु ते ॥एष सचन्दन गन्ध पुष्प बिल्व पत्राञ्जली ॐ ह्रीं दुर्गायै नमः ॥दुर्गा पूजा तृतीया पुष्पांजली मंत्र - ॐ सर्व मङ्गल माङ्गल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके ।शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नामोऽस्तु ते ॥१॥सृष्टि स्थिति विनाशानां शक्तिभूते सनातनि ।गुणाश्रये गुणमये नारायणि! नमोऽस्तु ते ॥२॥शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे ।सर्वस्यार्तिहरे देवि! नारायणि! नमोऽस्तु ते ॥३॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

दुर्गा पूजा पुष्पांजली में देवी दुर्गा के अनेक स्वरूपों और शक्तियों की स्तुति की गई है। पहले मंत्र में 'जयन्ती', 'मङ्गला', 'काली' आदि नामों से देवी दुर्गा की भक्ति प्रकट की गई है। इनमें देवी के अनेक रूपों की पहचान है, जो उनके अद्भुत गुणों को दर्शाते हैं। 'दुर्गा', 'शिवा', 'क्षमा', 'धात्री' जैसे स्वरूप न केवल शक्तिशाली हैं, बल्कि भक्तों के कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहने वाली भी हैं। यहां भक्तों ने ये मंत्रों के माध्यम से देवी महाकाली और अन्य रूपों की स्तुति करके उनकी कृपा की याचना की है। पुष्पांजली में 'स्वाहा', 'स्वधा' जैसे शब्दों का प्रयोग यज्ञ और तर्पण की भावना को दर्शाता है, जो श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है।

भक्तों ने जिन भावनाओं के साथ इन मंत्रों का उच्चारण किया है, वे उनके समर्पण और आस्था को दर्शाते हैं। 'महिषघ्नी', 'महामाये', 'चामुण्डे' जैसे नामों में देवी की शक्ति और संघर्ष की छवि है। ये नाम हमें बताते हैं कि देवी दुर्गा सभी बुराईयों का नाश करने में सक्षम हैं। उनके गुणों का गुणगान करते हुए भक्त यहां 'आयुरारोग्यविजयं देहि देवि' कहकर अपने जीवन में सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्रार्थना कर रहे हैं। यहाँ तक कि शरणागत दीनार्त परित्राण की बात करते हुए यह संदेश दिया गया है कि देवी सबको संकट से उबारती हैं, जिससे भक्तों की आस्था और विश्वास मजबूत होता है।

इस भजन का मूल सिद्धांत 'भक्ति मार्ग' को दर्शाता है, जो ज्ञान और भक्ति के समन्वय से सम्पूर्णता की ओर ले जाता है। 'सृष्टि स्थिति विनाशानां शक्तिभूते सनातनि' के माध्यम से हमें यह महसूस होता है कि देवी दुर्गा सम्पूर्ण सृष्टि की आदिकारिणी हैं, जो सृष्टि और जीवन के सभी चरणों में साथ होती हैं। उनकी भक्ति से न केवल भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है, बल्कि आत्मिक शांति और साधना का मार्ग भी प्रशस्त होता है। इस दृष्टिकोण से यह भजन आत्मा के भीतर एक नया जागरण करने वाला, समर्पण और प्रेम की भावना को प्रगाढ़ करने वाला है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

दुर्गा पूजा पुष्पांजली का धार्मिक और पौराणिक महत्व अत्यधिक है। इसे देवी दुर्गा की आराधना के समय गाया जाता है, जो महाकाली की बहुत सारी शक्तियों का प्रतीक है। पुराणों में देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों का वर्णन किया गया है, जैसे दुर्गा सप्तशती, जहाँ वे राक्षस महिषासुर का नाश करती हैं। यह श्लोक देवी के प्रति भक्तों के भक्तिपूर्ण समर्पण का प्रतीक है और महासृष्टि के सृजन, स्थापन और विनाश के चक्र में उनकी केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है। देवी दुर्गा के प्रति इस भक्ति में शांति, समृद्धि और समग्र विकास की कामना की जाती है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। दुर्गा पूजा पुष्पांजली का जाप मानसिक संतुलन को बनाए रखने, आध्यात्मिक शांति को प्राप्त करने और जीवन में सकारात्मकता लाने में सहायक है। नियमित रूप से इस गीत का उच्चारण करने से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है, मानसिक तनाव में कमी आती है, और समस्त परेशानियाँ दूर होती हैं। इस भजन का अनुभवी रूप से उच्चारित करने से भक्तों को समाज में मान-सम्मान और प्यार प्राप्त होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह या शाम के समय करना उत्तम होता है। भक्तों को चाहिए कि वे पूजा स्थल को स्वच्छ करें, दीप जलाएँ और देवी दुर्गा को पुष्प अर्पित करें। शुभ विचारों के साथ बैठकर मंत्र का उच्चारण करें और मन में एकाग्रता बनाए रखें। ध्यान से इस भजन का जाप करने से भक्ति में वृद्धि होती है और देवी की कृपा प्राप्त होती है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

दुर्गा पूजा पुष्पांजली का महत्व क्या है?

दुर्गा पूजा पुष्पांजली का महत्व देवी दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की स्तुति करना और उनकी कृपा प्राप्त करना है। यह भजन भक्तों को मानसिक निर्माण और आध्यात्मिक साक्षात्कार में मदद करता है।

कब इस भजन का जाप करना सबसे अच्छा है?

इस भजन का जाप सुबह या शाम के समय करना अच्छा होता है। इसे ध्यानपूर्वक और श्रद्धा के साथ गाना चाहिए।

क्या इस भजन के जाप से जीवन में कोई बदलाव आ सकता है?

हाँ, नियमित रूप से इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, आत्मविश्वास और सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि हो सकती है। यह जीवन में सकारात्मकता भी लाता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 24 Aug 2026

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