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Durga Bhajan Lyrics

नदी किनारे मईया का घाट (Nadi Kinare Maiya Ka Ghat) - Shahnaz Akhtar Maa Durga Bhajan - Bhaktilok

50 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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देवी दुर्गा की कृपा का उद्घोष

इस भजन के माध्यम से माँ दुर्गा की कृपा और उनके दिव्य आश्रय की अनुभूति करें।

नदी किनारे मईया का घाट, हर दम करे सबकी वो साथ। करे जो भजते उसका ध्यान, करे शुभ फल सब की शान। माँ का दरबार सजा है यहाँ, जो भी आऐ कर दे सबका ध्यान। धन, दौलत, ऐश्वर्य मिले, माँ की कृपा से सब कुछ खिले। जय जय मां, जय माँ दुर्गा, जय माँ, जय माता दी। नदी किनारे माँ का ठिकाना, जो भी भक्ति करे, उसे सवाना। जन्म जन्म का ऋण चुकाए, जो कष्ट में हो, उसे बचाए। माँ की महिमा बड़ाई ना जाए, सर्वत्र बसी, हर दिल में समाए। जय जय मां, जय माँ दुर्गा, जय माँ, जय माता दी। गंगा के जल से नहाए, माँ के चरणों में जो आए। अपने भक्तों को वो बचाए, हर बुराई से उसे बचाए। माँ का शरण में जो आए, उसका भाग्य जगाए। जय जय मां, जय माँ दुर्गा, जय माँ, जय माता दी। संसार में जो भी परेशानी, माँ की शरण में सबकी नआरानी। हर दुख-दर्द मिट जाएं, माँ के चरणों में जो आएं। सच्चा प्रेम हो जो माँ से, सपना भी पूरा हो उसका। जय जय मां, जय माँ दुर्गा, जय माँ, जय माता दी।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय माँ दुर्गा की महिमा और भक्ति है। पहले अंतरे में भक्तों को दर्शाया गया है कि नदी किनारे माँ का घाट है, जहाँ सभी भक्त मिलकर माँ दुर्गा की पूजा करते हैं। 'हर दम करे सबकी वो साथ' से स्पष्ट है कि माँ अपनी संतान के साथ सदैव रहती हैं, और जो भी भक्त उनका ध्यान करते हैं, उन्हें शुभ फल प्राप्त होते हैं। इस प्रकार, भक्तों को माँ की कृपा से धन, दौलत, और ऐश्वर्य का अनुभव होता है। यह दर्शाता है कि माँ का सच्चा ध्यान करना समस्त इच्छाओं की पूर्ति का आधार है।

दूसरे अंतरे में माँ दुर्गा की शरण में आने वाले भक्तों के जीवन में होने वाले बदलाव को दर्शाया गया है। 'जन्म जन्म का ऋण चुकाए' का अर्थ है कि माँ की भक्ति केवल इस जन्म तक सीमित नहीं होती, बल्कि पिछले जन्मों के कष्ट भी दूर कर देती है। यह भावर्थ भक्तों को आश्वस्त करता है कि माँ की शरण में आने से सारे संकट समाप्त हो जाते हैं। यहाँ माँ की सर्वव्यापकता की भी व्याख्या की गई है, जहाँ वे हर दिल में बसी हुई हैं, जिसका अर्थ है कि सभी में माँ की उपस्थिति होती है।

तीसरे अंतरे में माँ दुर्गा की कृपा से जीवन में आने वाले सकारात्मक बदलावों का वर्णन किया गया है। माता की आराधना से भक्तों को न केवल भक्ति का अहसास होता है, बल्कि उनके कष्टों का भी निवारण होता है। भक्ति मार्ग का सार यही है कि भक्त सच्चे मन से माता की आराधना करें, जिससे उन्हें मानसिक, भौतिक और आध्यात्मिक सुख प्राप्त होता है। माँ का शरणागतवृत्ति का भाव भक्तों को एक गहरे विश्वास के साथ माँ की ओर खींचता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व कई धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है, जैसे देवी महात्म्य में माँ दुर्गा की शक्ति और उनके भक्तों पर कृपा का विस्तार से विवरण मिलता है। यहाँ तक कि पुराणों में भी ये कहा गया है कि जो भक्त सच्चे मन से माँ की आराधना करता है, उसे संपूर्ण सुख एवं शांति की प्राप्ति होती है। माँ दुर्गा की आराधना करने से भक्त को उनके शरण में आने का सौभाग्य प्राप्त होता है, जिससे वे समस्त दुःख-दर्दों से मुक्त हो जाते हैं।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा, और आत्मविश्वास प्राप्त होता है। साथ ही, इसमें ध्यान लगाने से भक्तों के जीवन में खुशियाँ, समृद्धि और सुख-शांति का वास होता है। यह माँ दुर्गा की कृपा से सभी नकारात्मकता को दूर करने में सहायक है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह सूर्योदय के समय या शाम को संध्या के समय करना उत्तम रहता है। पूजा के समय भगवान के दिव्य चित्र के समक्ष दीप जलाएं और फलों या फूलों का भोग अर्पित करें। ध्यान लगाते हुए मन को शुद्ध करें और माँ के प्रति अपनी भक्ति भावनाएँ व्यक्त करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का अर्थ क्या है?

यह भजन माँ दुर्गा की महिमा और उनके भक्तों पर कृपा का वर्णन करता है, यह उन्हें समस्याओं से छुटकारा दिलाने का वचन देता है।

क्या इस भजन का जाप करना आवश्यक है?

भजन का जाप करना माँ दुर्गा की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने का एक जरिया है, जो मानसिक शांति और सुख की अनुभूति कराता है।

इस भजन को कब गाना चाहिए?

इस भजन को सुबह या शाम के समय गाना चाहिए, जिससे मन में सकारात्मकता और भक्ति का संचार हो सके।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 27 Aug 2026

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