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Durga Bhajan Lyrics

ॐ जय लक्ष्मी माता आरती (Om Jai Laxmi Mata Aart Lyrics in Hindi) - Gul Saxena Keshav Kundal Diwali Aarti - Bhaktilok

69 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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लक्ष्मी माता की आरती: सुख-समृद्धि का स्तोत्र

लक्ष्मी माता की आरती गाकर भक्ति के साथ सुख-समृद्धि पाने का मार्ग प्रशस्त करें।

ॐ जय लक्ष्मी माता, जय लक्ष्मी माता। जिनके चरणों में बसा धरती का पालन। सद्गुणों की धनी, ज्ञान की ज्योति, कहो लक्ष्मी माता। ॐ जय लक्ष्मी माता, जय लक्ष्मी माता। समस्त भूतों की, रक्षा करें माता। त्यागो मोह, त्यागो क्रोध, सच्चे भाव से करें भक्ति। ॐ जय लक्ष्मी माता, जय लक्ष्मी माता। धन-धान्य, सुख-समृद्धि, कीर्ति मनमें बसा। कृपा करें माता, जय लक्ष्मी माता। ॐ जय लक्ष्मी माता, जय लक्ष्मी माता। शुद्ध मन से जो गाए, सुख की बूँदें बरसाए। शांति का भंडार भरे, सबका मन हरशाए। ॐ जय लक्ष्मी माता, जय लक्ष्मी माता। जग में धरम की ज्योति, सबों को मिले सुख की अडती। जीवन में खुशहाली लाए, लक्ष्मी माता की कृपा से। ॐ जय लक्ष्मी माता, जय लक्ष्मी माता। सुख, शांति, समृद्धि की ज्योति।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

ॐ जय लक्ष्मी माता आरती में मां लक्ष्मी की महिमा का वर्णन किया गया है। मां लक्ष्मी को धन, ऐश्वर्य, सुख, और समृद्धि की देवी माना जाता है। इस आरती में भक्त उनके चरणों में नमस्कार करते हैं और उनसे सकारात्मक ऊर्जा एवं ध्यान की प्राप्ति की कामना करते हैं। "जिनके चरणों में बसा धरती का पालन" यह भावना दर्शाती है कि माता लक्ष्मी केवल भौतिक धनों की देवी नहीं, बल्कि वे पृथ्वी और उसके सभी प्राणियों के पालन में भी महत्वपूर्ण हैं। आरती की शुरुआती पंक्तियां साधक को प्रेरित करती हैं कि अपने जीवन में सद्गुणों का पालन करें और ज्ञान की ज्योति का अनुसरण करें। जब हम ग्यारह और धार्मिक भाव से इस आरती का गायन करते हैं, तो वह हमें मानसिक शांति और भक्ति के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती है।

आरती में पारंपरिक रूप से लक्ष्मी माता की स्तुति की जाती है, जिसमें "त्यागो मोह, त्यागो क्रोध" जैसे वाक्यांश भक्तों को अध्यात्मिक विकास के लिए प्रेरित करते हैं। यह हमें याद दिलाती है कि सच्ची भक्ति केवल भौतिक इच्छाओं की पूर्ति नहीं बल्कि आंतरिक शांति, संयम, और सकारात्मकता का भी विचार करती है। 'धन-धान्य, सुख-समृद्धि' की कामना करते हुए हम अपने जीवन को समृद्ध बनाने के लिए माता लक्ष्मी की कृपा चाहते हैं। यह आरती न केवल समस्त भूतों की रक्षा की गुहार करती है, बल्कि हमें बलिदान, सच्चाई, और उद्देश्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहने का भी संदेश देती है।

इस भक्तिगीत में भक्ति मार्ग की गहनता है, जो हमें समझाती है कि भक्ति के माध्यम से हम अपने मन के आंतरिक संघर्षों को त्याग सकते हैं। 'माता की कृपा' का जादू हमें जीवन की हर राह में मार्गदर्शन देता है। धार्मिक आस्था के अनुसार, लक्ष्मी माता का आशीर्वाद हमे न केवल धन का भंडार प्रदान करता है, बल्कि हमें शांति और समृद्धि की ओर भी ले जाता है। यह गीत भक्तों को याद दिलाता है कि सच्चा सुख भौतिक वस्तुओं में नहीं, बल्कि आत्मिक विकास और परमात्मा के साथ संबंध में निहित है। इसलिए, हमें भक्ति करना चाहिए और जीवन के हर क्षेत्र में मां लक्ष्मी की कृपा को ध्यान में रखकर आगे बढ़ना चाहिए।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

लक्ष्मी माता की आरती का बड़ा धार्मिक और दार्शनिक महत्व है। पुराणों के अनुसार, लक्ष्मी देवी का जन्म समुद्र मंथन से हुआ था। उन्हें सर्वत्र धन, ऐश्वर्य एवं सुख की देवी माना गया है। देवी लक्ष्मी का पूजन विशेष रूप से दिवाली जैसे पर्वों पर किया जाता है, जहां घरों को रोशन किया जाता है ताकि माता लक्ष्मी का आगमन सच्चे मन से हो सके। महाभारत और रामायण में भी देवी लक्ष्मी के प्रति भक्ति और व्रत का वर्णन मिलता है। इस आरती का पाठ करने से भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं और उन्हें मानसिक शांति के साथ-साथ भौतिक समृद्धि की प्राप्ति होती है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। लक्ष्मी माता की आरती का पाठ करने से भक्तों को शांति, समृद्धि एवं मानसिक संतोष प्राप्त होता है। नियमित रूप से इसे गाने से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। यह आरती नकारात्मक ऊर्जा को दूर करके सकारात्मकता को बढ़ाती है और परिवार में प्रेम व सद्भाव का संचार करती है। भक्तों की इच्छाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

लक्ष्मी माता की आरती का पाठ सुबह के समय या शाम को करना अत्यंत फलदायी होता है। इसमें एक दीपक जलाना, माता लक्ष्मी की तस्वीर या प्रतिमा के सामने रखना, और पुष्प अर्पण करना चाहिए। प्रवृत्तियों में ध्यान लगाकर आरती का गान करना चाहिए। भक्त को समर्पित भाव से और शुद्ध मन से आरती का पाठ करना चाहिए, ताकि माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्रकट हो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यह आरती कब और क्यों गाई जाती है?

यह आरती विशेष रूप से दिवाली जैसे पर्वों पर गाई जाती है, जब भक्त लक्ष्मी माता से समृद्धि और सुख का आशीर्वाद मांगते हैं।

लक्ष्मी माता की आरती के पाठ से क्या लाभ होते हैं?

लक्ष्मी माता की आरती का पाठ करने से मानसिक शांति, धन और समृद्धि की प्राप्ति होती है। यह व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाती है।

क्या लक्ष्मी माता की आरती का पाठ नियमित करना चाहिए?

हां, लक्ष्मी माता की आरती का नियमित पाठ करना चाहिए, जिससे भक्त की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं और उनकी जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 28 Aug 2026

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